शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार पर कुलपति का प्रहार, ब्रह्माकुमारीज ने किया शिक्षकों का सम्मान

शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार पर कुलपति का प्रहार, ब्रह्माकुमारीज ने किया शिक्षकों का सम्मान

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कार्यक्रम में 150 से अधिक शिक्षकों का तिलक, पौधा और स्मृति चिन्ह देकर सम्मान किया गया। समाजसेवक अनिल मिश्रा द्वारा अपने दिवंगत पिता स्व. श्याम सुंदर मिश्रा की स्मृति में सभी शिक्षकों को डायरी और पेन भेंट किए गए।

मंच का संचालन ब्रह्माकुमारी प्रतिमा बहन ने किया। कार्यक्रम में उप यातायात प्रभारी अभय तिवारी, समाजसेवक मंगल पांडे, नवीन गोयल, डॉ. संजय गोयल सहित बड़ी संख्या में नगरवासी उपस्थित रहे।

रेखा बहन ने गुरु वंदना गीत प्रस्तुत किया, जबकि अदिति शगुन मान्या एवं साथियों ने मनमोहक नृत्य प्रस्तुति दी।

शिक्षक दिवस पर सरगुजा में आयोजित सम्मान समारोह में कुलपति प्रो. प्रेम प्रकाश सिंह ने शिक्षा व्यवस्था से भ्रष्टाचार मिटाने की आवश्यकता बताई। ब्रह्माकुमारीज ने शिक्षकों को सम्मानित किया और शिक्षा में आध्यात्मिकता के महत्व पर जोर दिया।

 

अंबिकापुर, 5 सितंबर। शिक्षक दिवस के अवसर पर सरगुजा में ब्रह्माकुमारीज सेवा केंद्र द्वारा “शिक्षक – ज्ञान, संस्कार और प्रेरणा के स्रोत” विषय पर संगोष्ठी और सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस मौके पर संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर प्रेम प्रकाश सिंह ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को भ्रष्टाचार से मुक्त करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

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उन्होंने कहा कि आज सरकारी और गैर-सरकारी दोनों ही संस्थानों में भ्रष्टाचार गहराई तक प्रवेश कर चुका है और शिक्षा व्यवस्था भी इससे अछूती नहीं है। उच्च पदों पर बैठे शिक्षित लोग भाषण तो आदर्श देते हैं लेकिन उनके आचरण और व्यवहार विपरीत दिखाई देते हैं। शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान देना नहीं बल्कि गलत के खिलाफ खड़े होने का साहस भी प्रदान करना है।

प्रो. सिंह ने अभिभावकों को भी जिम्मेदारी निभाने का संदेश देते हुए कहा कि वे विद्यालयों और महाविद्यालयों में शिक्षण कार्य का निरीक्षण करें ताकि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।

ब्रह्माकुमारीज का संदेश – शिक्षा में आध्यात्मिकता जरूरी

कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारी विद्या दीदी ने कहा कि शिक्षा सिर्फ किताबों और डिग्रियों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसमें आध्यात्मिकता का समावेश होना जरूरी है। आध्यात्मिक शिक्षा से ही दया, करुणा, संतोष और सेवा भावना जागृत होती है। उन्होंने राजयोग मेडिटेशन की अनुभूति भी कराई।

अन्य वक्ताओं के विचार

श्री साई बाबा आदर्श महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. राजेश श्रीवास्तव ने कहा कि शिक्षा प्रणाली को सशक्त बनाने के लिए इंडियन टीचर सर्विस (आईटीएस) शुरू की जानी चाहिए, जैसे देश में IAS और IPS सेवाएं हैं।

केंद्रीय विद्यालय अंबिकापुर के प्राचार्य राजेश प्रसाद ने कहा कि गुरु शब्द का अर्थ ही अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाना है। गुरु को एक चरित्र शिल्पी बनकर विद्यार्थियों का भविष्य गढ़ना चाहिए।

शासकीय कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग कॉलेज अंबिकापुर के एचओडी डॉ. मोहन राव मामडीकर, आईटीआई अंबिकापुर की प्राचार्य श्रीमती पूर्णिमा पटेल और समग्र शिक्षा के एपीसी संजय सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किए।