सीपी राधाकृष्णन बने भारत के 15वें उपराष्ट्रपति

सीपी राधाकृष्णन बने भारत के 15वें उपराष्ट्रपति

file_000000000ae07206b6dd6cb6073112cd
WhatsApp Image 2026-03-12 at 6.47.26 PM (1)
file_000000009a407207b6d77d3c5cd41ab0

सितंबर 2030 तक रहेगा कार्यकाल, 53 दिन बाद सार्वजनिक कार्यक्रम में दिखे पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़

नई दिल्ली। देश को नया उपराष्ट्रपति मिल गया है। एनडीए उम्मीदवार और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल चंद्रपुरम पोन्नुसामी राधाकृष्णन (सीपी राधाकृष्णन) ने बुधवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य समारोह में भारत के 15वें उपराष्ट्रपति पद की शपथ ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें संविधान की शपथ दिलाई। 67 वर्षीय राधाकृष्णन का कार्यकाल 11 सितंबर 2030 तक रहेगा।

समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्री, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री और कई गणमान्य हस्तियां मौजूद रहीं। पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी और वेंकैया नायडू भी कार्यक्रम में पहुंचे। सबसे खास दृश्य तब देखने को मिला जब पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, जो इस्तीफे के बाद पहली बार सार्वजनिक कार्यक्रम में दिखे, वे भी समारोह में मौजूद रहे।

शपथ के बाद राज्यसभा में बैठक

शपथ ग्रहण समारोह के तुरंत बाद उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन दोपहर 12:30 बजे राज्यसभा के सभी नेताओं और अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। राज्यसभा के सभापति के तौर पर यह उनकी पहली आधिकारिक जिम्मेदारी होगी।

जगदीप धनखड़ 53 दिन बाद दिखे

21 जुलाई को स्वास्थ्य कारणों से उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने वाले जगदीप धनखड़ 53 दिन बाद किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में नजर आए। वे समारोह के दौरान पूर्व उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू के पास बैठे देखे गए। शपथ ग्रहण के बाद राधाकृष्णन उनसे विशेष रूप से मिलने भी पहुंचे।

एक दिन पहले दिया था राज्यपाल पद से इस्तीफा

सीपी राधाकृष्णन को उपराष्ट्रपति पद की जिम्मेदारी संभालने से पहले महाराष्ट्र के राज्यपाल पद से इस्तीफा देना पड़ा। गुरुवार को उन्होंने औपचारिक तौर पर त्यागपत्र सौंपा, जिसे राष्ट्रपति मुर्मू ने स्वीकार कर लिया। उनके इस्तीफे के बाद गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत को महाराष्ट्र का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

चुनाव परिणाम : विपक्षी उम्मीदवार को हराया

एनडीए उम्मीदवार राधाकृष्णन को 9 सितंबर को हुए चुनाव में भारी जीत मिली। उन्होंने विपक्षी उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी को 152 वोटों के अंतर से हराया।

66071dc5-2d9e-4236-bea3-b3073018714b
hotal trinetra
gaytri hospital

राज्यसभा महासचिव और निर्वाचन अधिकारी पीसी मोदी ने बताया कि कुल 781 सांसदों में से 767 ने मतदान किया। इनमें 752 वोट वैध और 15 अमान्य पाए गए। राधाकृष्णन को कुल 452 वोट मिले, जबकि रेड्डी को 300 वोट मिले।

दिलचस्प बात यह रही कि एनडीए को उम्मीद से 14 वोट ज्यादा मिले। माना जा रहा है कि विपक्षी खेमे में क्रॉस-वोटिंग हुई है।

किन-किन दलों ने समर्थन दिया

एनडीए को पहले से 427 सांसदों का समर्थन था। लेकिन चुनाव में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के 11 सांसदों ने भी राधाकृष्णन के पक्ष में मतदान किया।
वहीं 13 सांसदों ने मतदान से परहेज किया, जिनमें—

बीजू जनता दल (BJD) के 7 सांसद

भारत राष्ट्र समिति (BRS) के 4 सांसद

शिरोमणि अकाली दल का 1 सांसद

1 निर्दलीय सांसद शामिल रहे।

सीपी राधाकृष्णन : राजनीतिक यात्रा

सीपी राधाकृष्णन का जन्म 4 अप्रैल 1957 को तमिलनाडु में हुआ था। वे पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट रहे हैं और लंबे समय से भाजपा से जुड़े हुए हैं।

1998 और 1999 में वे कोयंबटूर से लोकसभा सांसद चुने गए।

भाजपा की तमिलनाडु इकाई में वे राज्य अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

2021 में उन्हें भाजपा ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल किया।

बाद में वे झारखंड और महाराष्ट्र के राज्यपाल भी रहे।

उनकी पहचान एक सुलझे हुए और सौम्य राजनेता के तौर पर होती है, जो दक्षिण भारत में भाजपा के संगठन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा चुके हैं।

राजनीतिक महत्व

सीपी राधाकृष्णन की जीत को एनडीए के लिए राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

1. यह नतीजा दिखाता है कि विपक्षी खेमे में एकजुटता की कमी है।

2. एनडीए को मिले अतिरिक्त 14 वोट क्रॉस-वोटिंग की ओर इशारा करते हैं।

3. दक्षिण भारत में भाजपा की पैठ को मजबूत करने के लिहाज से भी राधाकृष्णन की उपस्थिति अहम मानी जा रही है।

समारोह की मुख्य झलकियां

शपथ समारोह का समापन राष्ट्रगान से हुआ।

राधाकृष्णन ने ईश्वर के नाम पर अंग्रेजी में शपथ ली।

शपथ ग्रहण के बाद पीएम मोदी ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से बधाई दी।

समारोह में कई राज्यों के मुख्यमंत्री, मंत्री और सांसद मौजूद रहे।

भारत के 15वें उपराष्ट्रपति के रूप में सीपी राधाकृष्णन की ताजपोशी न केवल एक संवैधानिक बदलाव है, बल्कि यह देश की राजनीति में नए समीकरणों और भविष्य की संभावनाओं की ओर भी संकेत करती है। एनडीए को मिली अप्रत्याशित बढ़त और विपक्ष की खेमेबंदी में आई दरार आने वाले दिनों की राजनीतिक तस्वीर को और स्पष्ट करेगी।