दसूरे राज्यों से फर्जी दस्तावेजों पर एनओसी प्राप्त कर मध्यप्रदेश में पंजीकृत हुए वाहनों के विरुद्ध कार्यवाही

भोपाल । प्रतिवर्ष अन्य राज्यों से एनओसी प्राप्त कर 20 हजार से अधिक वाहन मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों में पंजीकृत किये जाते हैं। केन्द्रीय मोटरयान अधिनियम, 1988 की धारा 44(2) में वर्ष 2021 में परिवर्तन उपरांत ऐसे वाहनों को एनओसी पर पंजीयन करने वाले राज्य के आर.टी.ओ. के समक्ष अब प्रस्तुत नहीं किया जाना है परंतु जो राज्य एनओसी प्रदाय करता है या जो राज्य वाहन का प्रथम दफे पंजीयन करता है, उस राज्य की जिम्मेदारी है कि वह संबंधित वाहन के संबंध में समस्त आवश्यक जांच करे, वाहन के संबंध में रिपोर्ट प्राप्त करें एवं आवश्यकता अनुरूप उनका मोबाइल नंबर इंद्राज / सत्यापित करें।

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कुछ राज्यों में साठगांठ कर बिना असली दस्तावेजों के आधार पर एनओसी प्राप्त कर मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों में वाहन पंजीकरण के संबंध में परिवहन आयुक्त कार्यालय में माह जून में गोपनीय जानकारी प्राप्त होने पर परिवहन आयुक्त द्वारा ऐसे एनओसी प्राप्त कर वाहनों के पंजीयन के दौरान फर्जीवाड़ा न हो सकें इसके लिए विस्तृत निर्देश जारी किये गये हैं। कुछ राज्य विशेष से प्राप्त हो रहे एनओसी का सत्यापन Homologation पोर्टल पर करने एवं वहां जानकारी उपलब्धन होने पर वाहन का चौसिंस नंबर वाहन निर्माताओं से चेक कराने के लिये निर्देशित किया गया है ताकि इस तरह के कृत्य पर पूर्णतः रोक लगायी जा सके।

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इसके फलस्वरूप अब इस तरह के वाहनों के पंजीयन की संभावना लगभग नगण्य हो गयी है। इस तरह की व्यवस्था आदेशित करने के साथ-साथ पिछले वर्षों में पंजीकृत हुए वाहनों की जांच के लिए भी परिवहन आयुक्त द्वारा निर्देशित किया गया है, जिसके फलस्वरूप उज्जैन जिले में 126 वाहनों के दस्तावेज फर्जी (निर्माता कम्पनियो से प्राप्त रिपोर्ट अनुसार) पाये जाने पर उनके पंजीयन निरस्त किये गये तथा संदेह के दायरे में आये 292 वाहन स्वामियों को नोटिस जारी किए गए हैं। कार्यवाही पूर्ण कर रिपोर्ट पुलिस विभाग को भी आवश्यक कार्यवाही के लिए साझा करने के निर्देश समस्त आर.टी.ओ. को दिये गये हैं। ऐसे वाहनों के परमिट भी निरस्त किये जाएगें और यह कार्यवाही आगे आने वाले दिनों में भी निरंतर जारी रहे, ऐसे निर्देश परिवहन आयुक्त, द्वारा जारी किये गये। प्रदेश के वाहन स्वामियों को भी हिदायत दी जाती है कि वह दूसरे राज्यों से एनओसी पर वाहन खरीदते वक्त दस्तावेजों की सत्यता बावत् आवश्यक सावधानी बरतें, अन्यथा उनकी भूमिका संदेह के दायरे में रखी जाकर उनके विरूद्ध भी कार्यवाही की जाएगी।