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छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता में बड़ा बदलाव: अब कलेक्टर सुनेंगे द्वितीय अपील, 2601 केस जिला न्यायालयों में शिफ्ट | Pradesh Khabar






बड़ा फैसला: छत्तीसगढ़ में भू-राजस्व संहिता में संशोधन, अब कलेक्टर करेंगे द्वितीय अपील की सुनवाई | Pradesh Khabar


स्थान: अम्बिकापुर / रायपुर
तारीख: 03 मई 2026

राजस्व मामलों में बड़ी राहत: अब जिले में ही होगी ‘द्वितीय अपील’ की सुनवाई, भू-राजस्व संहिता की धारा 44 में संशोधन

रायपुर/अम्बिकापुर: छत्तीसगढ़ शासन ने प्रदेश के भू-स्वामियों और राजस्व मामलों से जुड़े पक्षकारों को बड़ी राहत देते हुए छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता 1959 में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। विधि एवं विधायी कार्य विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, संहिता की धारा 44 में संशोधन कर अब द्वितीय अपील की सुनवाई का अधिकार संबंधित जिले के कलेक्टर को सौंप दिया गया है।

क्या हुआ है बदलाव?

छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता संशोधन अधिनियम 2026 के तहत धारा 44 की उपधारा (2) के उपखण्ड (क) के स्थान पर नवीन प्रावधान प्रतिस्थापित किए गए हैं। पहले द्वितीय अपील की सुनवाई के लिए पक्षकारों को संभागीय मुख्यालय या रायपुर (राजस्व मंडल) के चक्कर लगाने पड़ते थे, लेकिन अब यह शक्ति जिला कलेक्टर के पास होगी।

कुल 2601 लंबित द्वितीय अपील प्रकरण जिला कलेक्टर न्यायालयों में होंगे स्थानांतरित

आम जनता को कैसे मिलेगा लाभ?

इस ऐतिहासिक निर्णय से राजस्व न्याय प्रक्रिया न केवल सुलभ होगी, बल्कि इसमें तेजी भी आएगी। अब पक्षकारों को अपील की सुनवाई के लिए अपने जिले से बाहर नहीं जाना पड़ेगा। इससे उनके समय और संसाधनों (आर्थिक व्यय) की बड़ी बचत होगी। शासन की इस पहल का मुख्य उद्देश्य निचले स्तर पर ही न्याय सुनिश्चित करना और राजस्व न्यायालयों के बोझ को कम करना है।

स्थानांतरण की प्रक्रिया शुरू

नवीन व्यवस्था के प्रभावी होते ही, पूरे प्रदेश से कुल 2601 लंबित द्वितीय अपील प्रकरणों को संबंधित जिलों के कलेक्टर न्यायालयों में स्थानांतरित करने की कार्यवाही शुरू कर दी गई है। राज्य शासन की इस अभिनव पहल से आम नागरिकों और किसानों में हर्ष की लहर है, क्योंकि अब उनके भूमि विवादों का निपटारा उनके अपने ही जिले में त्वरित रूप से हो सकेगा।