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अम्बिकापुर के बजाय अब बलरामपुर कलेक्टर न्यायालय में सुलझेंगे उपखण्ड अधिकारी के विरुद्ध दर्ज राजस्व मामले





राजस्व प्रकरणों की सुनवाई अब कलेक्टर न्यायालय बलरामपुर में: नई व्यवस्था लागू

राजस्व प्रकरणों के त्वरित निराकरण हेतु बड़ी पहल: कलेक्टर न्यायालय, बलरामपुर-रामानुजगंज में सुनवाई व्यवस्था का विस्तार

बलरामपुर-रामानुजगंज: छत्तीसगढ़ शासन द्वारा भू-राजस्व व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ एवं जन-सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। ‘छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता (संशोधन) अधिनियम, 2026’ के क्रियान्वयन के साथ ही राजस्व प्रकरणों की सुनवाई और उनके निराकरण की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है।

संशोधन का मुख्य बिंदु: क्षेत्राधिकार का हस्तांतरण

छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता (संशोधन) अधिनियम, 2026 की धारा 44(2)(क) के तहत किए गए नवीन प्रावधानों के परिपालन में, अब जिला बलरामपुर-रामानुजगंज के अंतर्गत उपखण्ड अधिकारी (SDO) अथवा उप सर्वेक्षण अधिकारी द्वारा पारित आदेशों के विरुद्ध दायर अपील या अन्य प्रकरणों की सुनवाई का अधिकार क्षेत्र परिवर्तित कर दिया गया है।

पूर्व में जो प्रकरण न्यायालय आयुक्त, सरगुजा संभाग, अम्बिकापुर में विचाराधीन थे, उन सभी प्रकरणों को अब तत्काल प्रभाव से जिला स्तर पर स्थानांतरित कर दिया गया है। अब इन सभी मामलों की अग्रेत्तर कार्यवाही एवं अंतिम निराकरण कलेक्टर न्यायालय, बलरामपुर-रामानुजगंज द्वारा किया जाएगा।

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सुनवाई व्यवस्था में विस्तार: प्रति सप्ताह दो दिन होगी सुनवाई

कलेक्टर न्यायालय में राजस्व प्रकरणों की बढ़ती संख्या और पक्षकारों को होने वाली असुविधा को दृष्टिगत रखते हुए, जिला प्रशासन ने सुनवाई की व्यवस्था में महत्वपूर्ण विस्तार किया है।

  • पूर्व निर्धारित दिवस: प्रत्येक बुधवार (नियमित)।
  • नई व्यवस्था: अब बुधवार के अतिरिक्त प्रत्येक सप्ताह के शुक्रवार को भी प्रकरणों की नियमित सुनवाई सुनिश्चित की जाएगी।

इस दोहरी सुनवाई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य राजस्व वादों का त्वरित निस्तारण करना है, ताकि ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के पक्षकारों को न्याय पाने के लिए बार-बार चक्कर न लगाने पड़ें और लंबित प्रकरणों के बोझ को कम किया जा सके।

अधिवक्तागण एवं पक्षकारों के लिए आवश्यक सूचना

संबंधित अधीनस्थ न्यायालयों, बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों, वरिष्ठ अधिवक्तागण तथा समस्त पक्षकारों को सूचित किया जाता है कि वे संशोधित सुनवाई कैलेंडर का पालन करें।

सभी पक्षकारों से अपेक्षा है कि वे नियत तिथियों (बुधवार एवं शुक्रवार) को कलेक्टर न्यायालय में उपस्थित होकर अपनी पैरवी सुनिश्चित करें। इस संबंध में किसी भी प्रकार की तकनीकी सहायता या जानकारी के लिए कलेक्ट्रेट स्थित राजस्व शाखा के सूचना पटल से संपर्क किया जा सकता है।

सुशासन की दिशा में एक कदम

इस परिवर्तन को राजस्व प्रशासन में पारदर्शिता और गति लाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। स्थानीय प्रशासन का मानना है कि जिला स्तर पर ही अपीलीय न्यायालयों की कार्यक्षमता बढ़ाने से आम नागरिकों को न्याय सुलभ होगा और प्रशासनिक कार्यवाहियों में तेजी आएगी।


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