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दो नक्सलियों का एनकाउंटर, AK-47 समेत कई अन्य सामग्री बरामद, अभी भी हो रही रूक-रूक कर फायरिंग

नारायणपुर। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में नक्सलियों और जवानों के बीच मुठभेड़ हो गई। इस मुठभेड़ में दो माओवादियों को मार गिराया गया। साथ ही मौके से मृत नक्सलियों का शव और एके-47, सहित अन्य हथियार व भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री बरामद की गई है।

महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ सीमावर्ती क्षेत्र में नक्सलियों के मौजूदगी की सूचना

जानकारी के मुताबिक, नारायणपुर पुलिस को सूचना मिली थी कि अबूझमाड़, महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ सीमावर्ती क्षेत्र में बड़ी संख्या में माआवादी पहुंचे है और उनके द्वारा किसी घटना को अंजाम देने के लिए योजना बनाई जा रही है।

इस सूचना के बाद सुरक्षा बलों की टीम के द्वारा सर्चिंग अभियान शुरू किया गया। जवानों को जंगल में आते नक्सलियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। सुरक्षा बलों ने भी जवाबी कार्रवाई की। दोनों तरफ से हुई फायरिंग में जवानों ने दो माओवादियों को मार गिराया है।

नक्सलियों और सुरक्षा बलों के बीच रूक-रूक कर फायरिंग जारी है। फिलहाल मुठभेड़ स्थल से दो माओवादियों के शव को बरामद कर लिया गया है। मारे गये नक्लियों के शवों की शिनाख्त की जा रही है।

हथियार समेत अन्य सामग्री बरामद

मौके से AK-47 रायफल सहित अन्य हथियार तथा भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री, माओवादी साहित्य, प्रचार-प्रसार सामग्री एवं दैनिक उपयोग की वस्तुएँ बरामद की गई है।

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अभियान अभी भी जारी

सर्च अभियान अभी भी लगातार जारी है। अभियान पूर्ण होने के बाद विस्तृत जानकारी अलग से दी जाएगी।

अदरबेड़ा व वाट्टेकल गाँव में नक्सली स्मारक ध्वस्त

नारायणपुर पुलिस को नक्सल विरोधी अभियान में एक महत्वपूर्ण सफलता मिली है। 20 सितम्बर को पुलिस की डीआरजी नारायणपुर तथा आईटीबीपी की 29वीं एवं 38वीं वाहिनी की एस.ए.टी टीम ने संयुक्त रूप से सर्च ऑपरेशन चलाकर अदरबेड़ा और वाट्टेकल गाँव में बनाए गए नक्सली स्मारक को ध्वस्त किया।

यह स्मारक नक्सलियों द्वारा थुलथुली मुठभेड़ में मारे गए नक्सलियों की याद में बनाया गया था। नक्सली ऐसे स्मारकों के माध्यम से ग्रामीणों के बीच भय व प्रभाव जमाने तथा अपनी विचारधारा को प्रचारित करने की कोशिश करते हैं।

नारायणपुर पुलिस व सुरक्षा बलों ने इस कार्रवाई के माध्यम से यह स्पष्ट संदेश दिया है कि नक्सलवाद, उसकी विचारधारा और उसके प्रतीक चिन्ह किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। स्मारक ध्वस्त किए जाने से ग्रामीणों में सुरक्षा बलों के प्रति विश्वास और मनोबल में वृद्धि हुई है तथा क्षेत्र में शांति स्थापित करने की दिशा में यह कदम महत्वपूर्ण साबित होगा।

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