Ayodhya Ramlala Aarti Live Darshan 11 October 2025: अयोध्या में हुआ श्री रामलला का भव्य श्रृंगार, जानें आरती और भोग का पूरा क्रम

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Ayodhya Ramlala Aarti Live Darshan 11 October 2025: अयोध्या में हुआ श्री रामलला का भव्य श्रृंगार, जानें आरती और भोग का पूरा क्रम

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11 अक्टूबर 2025 को अयोध्या धाम में श्री रामलला का भव्य श्रृंगार हुआ। जानें प्रभु रामलला की आरती, भोग, श्रृंगार और दर्शन की पूरी परंपरा। देखें लाइव आरती वीडियो।

Ayodhya Ramlala Aarti Live Darshan 11 October: अयोध्या धाम में हुआ रामलला का भव्य श्रृंगार, जानें आरती और भोग का पूरा क्रम

तिथि: शनिवार, 11 अक्टूबर 2025 (कार्तिक कृष्ण पक्ष पंचमी, विक्रम संवत 2082)
स्थान: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र, अयोध्या धाम


संपूर्ण ब्रह्मांड के स्वामी रामलला का दिव्य श्रृंगार

अयोध्या में विराजमान प्रभु श्री रामलला सरकार का श्रृंगार आज कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि पर अत्यंत भव्य और अलौकिक रूप में संपन्न हुआ।
सुबह आरती के बाद रामलला का विशेष श्रृंगार किया गया, जिसमें उन्हें मौसम के अनुरूप वस्त्र पहनाए गए। भक्तों ने सुबह से ही मंदिर परिसर में पहुंचकर रामलला के दिव्य दर्शन किए।

रामलला की आरती, भोग और शयन की परंपरा हर दिन तय समय पर होती है, जिसमें भक्तों की अपार आस्था झलकती है।


रामलला की आरती का दैनिक क्रम

  1. प्रभात आरती (सुबह 6:30 बजे):
    सबसे पहले रामलला को जगाया जाता है, फिर अभिषेक, स्नान और वस्त्र धारण कराए जाते हैं। इसके बाद फूलों की माला और आभूषणों से श्रृंगार किया जाता है।

  2. भोग आरती (दोपहर 12:00 बजे):
    इस समय रामलला को विविध व्यंजन अर्पित किए जाते हैं, जो मंदिर की रसोई में शुद्ध सामग्री से तैयार किए जाते हैं।

  3. संध्या आरती (शाम 7:30 बजे):
    सूर्यास्त के बाद संध्या आरती का आयोजन होता है। मंदिर परिसर में घंटों, शंखनाद और जय श्री राम के उद्घोष से वातावरण भक्तिमय हो जाता है।

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  4. शयन आरती (रात 8:30 बजे):
    अंतिम आरती के बाद प्रभु को शयन करवाया जाता है, जिसके पश्चात दर्शन बंद हो जाते हैं।


श्रृंगार और वस्त्रों की विशेषता

  • गर्मियों में: हल्के सूती और पीले-केसरिया वस्त्र

  • शरद ऋतु में: रेशमी और गोटेदार पोशाक

  • सर्दियों में: ऊनी वस्त्र, स्वेटर और गर्म चादरें
    हर दिन रामलला को अलग-अलग रंग और वस्त्रों से सजाया जाता है।
    फूलों की माला विशेष रूप से दिल्ली से मंगाई जाती है, जो भगवान के श्रृंगार में दिव्यता जोड़ती है।


भोग के चार समय

रामलला को दिन में चार बार भोग लगाया जाता है —

  1. बाल भोग (सुबह)

  2. राजभोग (दोपहर)

  3. संध्या भोग (शाम)

  4. शयन भोग (रात्रि)

प्रत्येक समय के अनुसार अलग-अलग व्यंजन तैयार किए जाते हैं — दूध, मिश्री, फल, खीर, पूड़ी, सब्ज़ी और मिठाइयाँ भगवान को अर्पित की जाती हैं।


आज का दर्शन और श्रद्धालु उत्साह

शनिवार को बड़ी संख्या में भक्तों ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र में पहुंचकर भगवान श्री रामलला के दर्शन किए।
मंदिर में गूंजते रहे जयकारे — “जय श्री राम”, “सियावर रामचंद्र की जय” — और भक्तों ने आरती में सम्मिलित होकर दिव्यता का अनुभव किया।