EPFO New Rules 2025: अब PF अकाउंट पूरी तरह खाली नहीं कर सकेंगे, जानिए क्या बदला
EPFO ने PF से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब अकाउंट में कुल राशि का 25% हिस्सा हमेशा रखना होगा। जानिए किन शर्तों में निकासी और पेनल्टी के नियम बदले।
PF नियमों में बड़ा बदलाव: अब अकाउंट पूरी तरह खाली नहीं कर सकेंगे कर्मचारी, जानें नए नियमों का असर
नई दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की केंद्रीय न्यासी बोर्ड (CBT) की बैठक में भविष्य निधि (PF) से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए हैं। इन बदलावों का सीधा असर लाखों कर्मचारियों पर पड़ेगा। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब कर्मचारी अपने PF अकाउंट को पूरी तरह खाली नहीं कर सकेंगे।
नई नीति के तहत, कुल जमा राशि का कम-से-कम 25% हिस्सा PF अकाउंट में बनाए रखना अनिवार्य होगा। यानी नौकरी छूटने या आंशिक निकासी के बावजूद, यह न्यूनतम बैलेंस बना रहेगा। इस राशि पर EPFO ब्याज देता रहेगा, जिससे कर्मचारियों की रिटायरमेंट सेविंग सुरक्षित रहेगी।
PF नियमों में क्या-क्या बदलाव हुए हैं?
न्यूनतम बैलेंस नियम:
- PF अकाउंट में कुल बैलेंस का 25% हिस्सा अब स्थायी रूप से रहना जरूरी होगा।
- इसे पूरी तरह निकालना संभव नहीं होगा।
निकासी की नई शर्तें:
- पहले जहां 2 महीने की बेरोजगारी के बाद PF पूरा निकाल सकते थे, अब 12 महीने का इंतजार जरूरी होगा।
- पूरी पेंशन राशि निकालने के लिए अब 36 महीने का वेटिंग पीरियड होगा।
आंशिक निकासी में राहत:
- आंशिक निकासी के लिए न्यूनतम सेवा अवधि घटाकर 12 महीने कर दी गई है।
- पहले की 13 शर्तें घटाकर अब 3 कैटेगरी बनाई गई हैं –
- 1️⃣ जरूरी जरूरतें (शादी, शिक्षा, बीमारी)
- 2️⃣ आवासीय जरूरतें
- 3️⃣ विशेष परिस्थितियां
- खास बात: अब विशेष परिस्थितियों में पैसे निकालने के लिए कारण बताने की जरूरत नहीं होगी।
‘विश्वास योजना’ लागू:
- PF कॉन्ट्रिब्यूशन में देरी पर अब सिर्फ 1% प्रतिमाह पेनल्टी लगेगी।
- इससे पुराने लंबित केस खत्म होंगे।
EPS-95 पेंशनधारकों को राहत:
- अब डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र घर बैठे दिया जा सकेगा।
- EPFO इसके लिए ₹50 फीस खुद भरेगा।
नियोक्ताओं के लिए राहत:
- सितंबर वेतन माह के EPF रिटर्न की डेडलाइन 22 अक्टूबर 2025 तक बढ़ाई गई है।
- नई ECR प्रणाली अपनाने के लिए समय मिलेगा।
क्या आपके लिए अच्छा है ये बदलाव?
अगर आप जल्दी PF निकालने की सोच रहे थे, तो रणनीति बदलनी होगी।
लेकिन अगर आप रिटायरमेंट तक निवेश बनाए रखना चाहते हैं, तो ये बदलाव लॉन्ग टर्म सेविंग के लिहाज से फायदेमंद हैं। सरकार की मंशा अब स्पष्ट है — फंड को सुरक्षित रखना और कर्मचारियों को रिटायरमेंट तक वित्तीय सुरक्षा देना।











