
धान खरीदी सत्र 2025-26 ठप: टीएस सिंहदेव ने सरकार की व्यवस्थाओं पर उठाए सवाल
धान खरीदी सत्र 2025-26 की शुरुआत अव्यवस्था के बीच हुई। समिति प्रबंधकों और डाटा एंट्री ऑपरेटरों की हड़ताल से खरीदी ठप है। पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने मेंड्रा कृषि मंडी का निरीक्षण कर सरकार की नई व्यवस्था, FIR प्रावधान और बढ़ती लागत पर गंभीर सवाल उठाए।
धान खरीदी सत्र 2025-26 : व्यवस्थाएँ पूरी तरह ठप, समितियों की हड़ताल से खरीद प्रभावित — टी. एस. सिंहदेव

धान खरीदी सत्र 2025-26 की शुरुआत के पहले ही दिन व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए पूर्व उपमुख्यमंत्री टी. एस. सिंहदेव ने आज मेंड्रा स्थित कृषि मंडी का दौरा किया। इसके साथ ही जिले के अन्य धान खरीदी केंद्रों से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर उन्होंने कहा कि समितियों में धान खरीदी की व्यवस्था पूरी तरह शून्य है।
समिति प्रबंधकों और डेटा एंट्री ऑपरेटरों की हड़ताल—जो वेतन–भत्तों में वृद्धि तथा नए नियमों के विरोध में की जा रही है—के कारण पूरे जिले में धान खरीदी व्यवस्था प्रभावित हो गई है।
सरगुजा कलेक्टर को खुद खड़े होकर करानी पड़ी धान खरीदी
पूर्व उपमुख्यमंत्री ने कहा कि “धान खरीदी सत्र के पहले ही दिन सरगुजा कलेक्टर को स्वयं खड़े होकर धान खरीदी करवानी पड़ी। यह स्थिति प्रदेश सरकार की क्षमता और व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े करती है।”
नए नियमों में दोहरी नीति, प्रबंधकों पर FIR का प्रावधान चिंता का विषय
उन्होंने कहा कि धान की कमी पर समिति प्रबंधकों पर FIR का प्रावधान किया गया है, जबकि भंडारण केंद्रों के लिए सुखती का प्रावधान अलग है। यह दोहरी नीति ही समिति प्रबंधकों और ऑपरेटरों की हड़ताल का मुख्य कारण बनी है।
उन्होंने बताया कि प्रशासन द्वारा धान खरीदी के लिए जो नए लोग लगाए गए थे, वे भी इस अव्यवस्था के कारण पीछे हट गए, जिसके चलते सरकारी अधिकारी–कर्मचारियों को खरीदी में लगाया जा रहा है। इससे अन्य शासकीय कार्य भी प्रभावित होंगे।
नई व्यवस्था से लागत बढ़ेगी, राजकोष पर अतिरिक्त भार
श्री सिंहदेव ने कहा कि पहले की व्यवस्था में खरीदी केंद्रों से धान 72 घंटे के भीतर सीधे राइस मिलों को भेज दिया जाता था, लेकिन अब इसे पहले मार्कफेड भंडारण केंद्रों में और फिर मिलों को भेजा जाएगा।
इस दोहरी प्रक्रिया से मिलिंग लागत बढ़ेगी और इसका बोझ अंततः प्रदेश के राजकोष पर पड़ेगा।
शनिवार को सिर्फ 8 क्विंटल खरीदी—औपचारिकता मात्र
उन्होंने कहा कि सामान्यत: शनिवार–रविवार को धान खरीदी नहीं होती, फिर भी आज केवल 8 क्विंटल धान खरीदा गया है, जो सिर्फ औपचारिकता प्रतीत होती है। यदि शनिवार को खरीदी शुरू की गई है तो आगे भी इसे जारी रखना चाहिए।
ऑनलाइन एंट्री, टोकन और पंजीयन की प्रक्रिया बाधित
हड़ताल के कारण बरदानों की ऑनलाइन एंट्री नहीं हो पाई है, जिससे पोर्टल के माध्यम से टोकन जारी करने का कार्य बाधित हुआ है और धान खरीदी पर सीधा असर पड़ा है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस सत्र में लागू की गई एग्री–स्टेट पंजीयन प्रक्रिया में 100% किसानों का पंजीकरण नहीं हो पाया, जो चिंताजनक है।
नमी जांचने वाली मशीनों का प्रमाणिकरण लंबित
पूर्व उपमुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि खरीदी केंद्रों में नमी जांचने वाली मीटर का अभी तक प्रमाणिकरण नहीं हुआ है।











