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‘छत्तीसगढ़ हर्बल’ ब्रांड को नया बल, जामगांव एम की यूनिट ने 44 लाख के उत्पाद तैयार किए

रायपुर, 24 नवंबर 2025। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा वन क्षेत्रों में निवास कर रहे ग्रामीणों, संग्राहकों और महिला स्व-सहायता समूहों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से वनोपज आधारित उद्योगों के विस्तार को गति दी जा रही है। इसी कड़ी में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) के तहत राज्य लघु वनोपज (व्यापार एवं विकास) सहकारी संघ मर्यादित और स्फेयर बायोटेक के संयुक्त प्रयास से जामगांव एम, पाटन में आधुनिक हर्बल एक्सट्रैक्शन यूनिट की स्थापना की गई है।
इस यूनिट का लोकार्पण वर्ष 2025 में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और वन मंत्री केदार कश्यप ने किया था।

वनोपज का पूरा क्रय, ग्रामीणों को नियमित आय

स्फेयर बायोटेक द्वारा वन क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीण संग्राहकों से वनोपज और औषधीय उपज का पूर्ण क्रय किया जा रहा है। इससे उन्हें न केवल नियमित आय मिल रही है बल्कि उपज का सही मूल्य भी सुनिश्चित हो रहा है।
कंपनी की यह पहल वनोपज के मूल्यवर्धन के साथ-साथ ग्रामीणों, महिलाओं और संग्राहकों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर खोल रही है।

6 एकड़ में स्थापित आधुनिक हर्बल एक्सट्रैक्शन यूनिट

जामगांव एम में स्थापित यूनिट 6 एकड़ क्षेत्र में फैली है, जहां गिलोय, कालमेघ, बहेड़ा, सफेद मुसली, जंगली हल्दी, गुड़मार, अश्वगंधा और शतावरी जैसी वनोपज से अर्क निकाला जाता है।
उत्पादित अर्क का उपयोग आयुर्वेदिक औषधियों, सप्लीमेंट, वेलनेस उत्पादों और हर्बल उद्योग में किया जा रहा है, जिससे ‘छत्तीसगढ़ हर्बल’ ब्रांड को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती मिल रही है।

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20 हजार MT क्षमता के चार बड़े गोदाम

इकाई क्रमांक-02 में चार विशाल गोदाम बनाए गए हैं, जिनकी संयुक्त क्षमता 20 हजार मीट्रिक टन है।
यहां राज्य के विभिन्न जिलों से प्राप्त कोदो, कुटकी, रागी, हर्रा कचरिया, कालमेघ, पलास फूल, साल बीज आदि वनोपज का वैज्ञानिक तरीके से भंडारण किया गया है।
अब तक यहां 15,138 क्विंटल से अधिक वनोपज सुरक्षित रखी जा चुकी है। इनका विक्रय संघ मुख्यालय रायपुर द्वारा निविदा प्रक्रिया के माध्यम से किया जा रहा है।

महिलाओं के लिए बड़ा अवसर: 44 लाख के उत्पाद तैयार

111 एकड़ में विकसित केंद्रीय प्रसंस्करण इकाई के क्रमांक-01 में स्थानीय महिला स्व-सहायता समूहों को रोजगार मिला है।
यहां आंवला, बेल और जामुन से आंवला जूस, लच्छा, बेल शरबत, बेल मुरब्बा, जामुन पल्प, जूस और RTS पेय जैसे उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं।
सिर्फ एक वर्ष में इस इकाई ने 44 लाख रुपये मूल्य के उत्पादों का निर्माण और विक्रय किया है। इससे ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है।

5,200 मानव दिवस का रोजगार सृजन

दोनों इकाइयों के संचालन से अब तक 5,200 से अधिक मानव दिवस का रोजगार उत्पन्न हुआ है, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण, महिलाएं और संग्राहक शामिल हैं।

‘छत्तीसगढ़ हर्बल’ ब्रांड को राष्ट्रीय पहचान

सरकार के अनुसार इन वनोपजों से तैयार हर्बल उत्पाद ‘छत्तीसगढ़ हर्बल’ ब्रांड के नाम से बेचे जा रहे हैं, जिनका उपयोग स्वास्थ्य लाभ और वेलनेस उत्पादों में किया जा रहा है।
हर्बल उद्योग के विस्तार से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिल रही है।

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