हिरासत में मौत पर भड़का सुप्रीम कोर्ट: तीन हफ्ते में रिपोर्ट नहीं तो गृह सचिव होंगे तलब

‘अब देश इसे बर्दाश्त नहीं करेगा, यह व्यवस्था पर एक धब्बा है’

हिरासत में हिंसा और मौत के मुद्दे पर भड़का सुप्रीम कोर्ट, सभी राज्यों को तीन हफ्ते में रिपोर्ट देने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस हिरासत में बढ़ते हिंसा और मौत के मामलों पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा है कि हिरासत में मृत्यु किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है और यह देश की न्याय व्यवस्था पर एक “धब्बा” है।

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न्यायमूर्ति विक्रमनाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि कई राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों ने अभी तक पुलिस थानों और जांच एजेंसियों के दफ्तरों में सीसीटीवी कैमरे लगाने संबंधी कोर्ट के पुराने आदेशों का पालन तक नहीं किया है।


जिन राज्यों ने रिपोर्ट नहीं दी, उनके गृह सचिव को अदालत में बुलाया जाएगा

कोर्ट ने साफ कहा कि जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अभी तक अपनी रिपोर्ट दाखिल नहीं की है, उन्हें तीन सप्ताह में हर हाल में रिपोर्ट जमा करनी होगी।
यदि रिपोर्ट नहीं दी गई तो संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के गृह विभाग के प्रमुख सचिव को कोर्ट में पेश होना पड़ेगा।

केंद्र सरकार को भी चेतावनी देते हुए कोर्ट ने कहा कि यदि केंद्रीय एजेंसियों—CBI, ED, NIA—ने आदेश का पालन नहीं किया, तो उनके निदेशक को अदालत बुलाया जाएगा।


हिरासत में मौत पर कोर्ट की तीखी टिप्पणी

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुनवाई के दौरान कहा कि हिरासत में होने वाली किसी भी मौत को न तो सही ठहराया जा सकता है और न ही उसका बचाव किया जा सकता है।

इस पर कोर्ट ने कहा—
“अब देश इसे बर्दाश्त नहीं करेगा। यह व्यवस्था पर एक धब्बा है। आप हिरासत में मौत नहीं होने दे सकते।”

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राजस्थान का मामला: 8 महीनों में 11 हिरासत में मौतें

शीर्ष अदालत ने सितंबर में एक मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लिया था जिसमें बताया गया था कि 2025 के पहले आठ महीनों में राजस्थान में पुलिस हिरासत में 11 मौतें हुईं, जिनमें से 7 मामले उदयपुर संभाग से जुड़े हैं।


सीसीटीवी लगाने के कोर्ट के पुराने आदेशों का पालन नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने 2018 और 2020 में आदेश दिया था कि:

  • सभी पुलिस थानों में
  • CBI, ED, NIA जैसे केंद्रीय एजेंसियों के दफ्तरों में
  • फुल कवरेज वाले सीसीटीवी कैमरे और रिकॉर्डिंग सिस्टम लगाए जाएँ

लेकिन कोर्ट को बताया गया कि:

  • केवल 11 राज्यों ने ही अब तक अपनी रिपोर्ट दाखिल की है
  • कई राज्यों और केंद्रीय विभागों ने कोई जानकारी ही नहीं दी
  • केवल 3 केंद्रीय एजेंसियों में सीसीटीवी पूरी तरह लगाए गए हैं

अमेरिका मॉडल और प्राइवेट जेल का जिक्र

सुनवाई के दौरान अमेरिका के मॉडल का उल्लेख हुआ, जहाँ:

  • सीसीटीवी की लाइव स्ट्रीमिंग होती है
  • कुछ निजी जेलों का संचालन भी होता है

सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि एक सुझाव आया था कि CSR फंड से प्राइवेट जेल बनाई जाएं, जिस पर कोर्ट ने कहा कि वह पहले से ही ओपन एयर प्रिजन मॉडल पर लंबित मामले की सुनवाई कर रहा है।


मध्यप्रदेश की तारीफ

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मध्यप्रदेश ने बहुत अच्छा काम किया है, वहाँ:

  • हर पुलिस स्टेशन
  • हर चौकी
  • जिला कंट्रोल रूम से लाइव जुड़ी हुई है

बेंच ने इसे “काबिल-ए-तारीफ” बताया।


अगली सुनवाई 16 दिसंबर को

कोर्ट ने मामले को 16 दिसंबर 2025 के लिए सूचीबद्ध किया है।
तब तक सभी राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों और केंद्र को अपनी रिपोर्ट हर हाल में जमा करनी होगी।