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ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने के लिए दुनिया में होड़, 450 मिलियन डॉलर की डील अंतिम चरण में

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत की ब्रह्मोस मिसाइल की वैश्विक मांग तेज हो गई है। नौसेना और वायुसेना में इसकी नई खेप को मंजूरी मिली है। भारत अब 450 मिलियन डॉलर की ब्रह्मोस निर्यात डील को अंतिम रूप देने के करीब है। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

ब्रह्मोस मिसाइल की वैश्विक धमक: 450 मिलियन डॉलर की डील अंतिम चरण में, ऑपरेशन सिंदूर ने बदल दी दुनिया की सोच

भारत अपनी सेना को आधुनिक और शक्तिशाली बनाने की दिशा में लगातार तेज कदम बढ़ा रहा है। सीमा पर बढ़ते तनाव और बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच केंद्र सरकार ने हाल ही में भारतीय नौसेना और वायुसेना के लिए ब्रह्मोस मिसाइल की एक और खेप को मंजूरी दे दी है। इस फैसले से भारत की सैन्य शक्ति न सिर्फ़ कई गुना मजबूत होगी, बल्कि रणनीतिक मोर्चे पर भी भारत की पकड़ पहले से अधिक सुदृढ़ होगी।

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नौसेना और वायुसेना में ब्रह्मोस की बढ़ती तैनाती

भारतीय नौसेना अपने वीर-क्लास युद्धपोतों पर ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल की तैनाती को तेजी से विस्तार दे रही है। इससे समुद्री सीमाओं की चौकसी और दुश्मन पर जवाबी कार्रवाई की क्षमता अत्यधिक प्रभावी होगी। वहीं भारतीय वायुसेना भी Su-30MKI लड़ाकू विमानों पर ब्रह्मोस के एकीकरण को अंतिम चरण में पहुंचा चुकी है। यह संयोजन भारत को हवा से समुद्र और हवा से जमीन—दोनों दिशाओं में अत्यधिक सटीक प्रहार की क्षमता देता है।

ऑपरेशन सिंदूर ने बदल दी दुनिया की सोच

मई 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर ने ब्रह्मोस मिसाइल की प्रतिष्ठा को एक नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया। यह अभियान पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू किया गया था। पहली बार युद्ध क्षेत्र में ब्रह्मोस का इस्तेमाल किया गया और भारतीय सैन्य बलों ने बेहद सटीक और तेज़ कार्रवाई की। कई पाकिस्तानी ठिकाने हमलों के बाद दिनों तक निष्क्रिय रहे।
इस अभियान ने साबित किया कि ब्रह्मोस सिर्फ़ तेज़ नहीं है, बल्कि रणनीतिक रूप से बेहद प्रभावी मिसाइल है, जो राजनीतिक और सैन्य परिणाम दोनों देती है।

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अंतरराष्ट्रीय मंच पर बढ़ी डिमांड

दुबई एयर शो में ब्रह्मोस की प्रदर्शनी ने दुनिया के कई देशों का ध्यान आकर्षित किया। जो देश पहले सिर्फ तकनीकी जानकारी ले रहे थे, अब वे वास्तविक खरीद प्रक्रिया में आगे बढ़ चुके हैं।
भारत ब्रह्मोस मिसाइल के करीब 450 मिलियन डॉलर के निर्यात सौदे को अंतिम रूप देने के बेहद करीब है। यह सौदा भारत के रक्षा उद्योग को नए वैश्विक आयाम देगा।

क्यों पूरी दुनिया ब्रह्मोस खरीदना चाहती है?

✔ दुनिया की सबसे तेज़ सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल
✔ भारत-रूस की संयुक्त तकनीक
✔ 300–500 किमी तक की सटीक मारक क्षमता
✔ किसी भी मौसम, किसी भी भू-भाग में प्रहार की क्षमता
✔ दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में सक्षम

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के एयर डिफेंस सिस्टम ब्रह्मोस के सामने फुस्स साबित हुए। यही वजह है कि अब कई देश भारत से संपर्क कर ब्रह्मोस खरीदने की इच्छा जता रहे हैं। मिसाइल की विश्वसनीयता, गति और मारक क्षमता ने इसे ग्लोबल मार्केट में एक “गेम चेंजर” हथियार के रूप में स्थापित कर दिया है।

भारत की रक्षा शक्ति को मिला नया आयाम

450 मिलियन डॉलर की ब्रह्मोस डील सिर्फ़ आर्थिक लाभ ही नहीं लाएगी, बल्कि यह भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता का भी बड़ा प्रमाण है। भारत अब सिर्फ़ हथियार खरीदने वाला नहीं, बल्कि दुनिया को हथियार बेचने वाला प्रमुख राष्ट्र बन चुका है।

 

Ashish Sinha

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