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पूर्वोत्तर हैंडलूम-हैंडिक्राफ्ट पर बड़ा प्लान: CM नेफियू रियो संग बैठक में सिंधिया ने रखी विकास रूपरेखा

पूर्वोत्तर में हथकरघा और हस्तशिल्प को नई ताकत: मुख्यमंत्री नेफियू रियो की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक, ज्योतिरादित्य सिंधिया ने रखी समग्र विकास की रूपरेखा

नई दिल्ली/ कोहिमा।पूर्वोत्तर भारत में हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्र को सशक्त बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफियू रियो की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्चस्तरीय टास्क फोर्स बैठक में भाग लिया, जहां इस पारंपरिक लेकिन संभावनाओं से भरे क्षेत्र के लिए एक स्पष्ट और केंद्रित रोडमैप तैयार करने पर विस्तार से चर्चा की गई।

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस बैठक की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर साझा करते हुए बताया कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘Fashion for Environment and Empowerment’ के विज़न के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ कारीगरों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।


पूर्वोत्तर की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा है यह क्षेत्र

पूर्वोत्तर भारत का हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्र केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि यहां की सांस्कृतिक विरासत, परंपरा और पहचान का प्रतीक है। असम की रेशमी साड़ियां, नागालैंड और मिजोरम के पारंपरिक वस्त्र, मणिपुर की बुनाई कला और अरुणाचल प्रदेश की हस्तनिर्मित कलाकृतियां देश-विदेश में अपनी विशिष्ट पहचान रखती हैं।

हालांकि, आधुनिक बाजार, सीमित पहुंच और तकनीकी संसाधनों की कमी के कारण यह क्षेत्र लंबे समय से चुनौतियों का सामना कर रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर अब इसे संगठित और टिकाऊ विकास मॉडल की ओर ले जाने की कोशिश कर रही हैं।


मुख्यमंत्री नेफियू रियो की अध्यक्षता में हुई अहम बैठक

इस उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफियू रियो ने की। बैठक में विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि, विशेषज्ञ, नीति-निर्माता और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य था—पूर्वोत्तर में हथकरघा और हस्तशिल्प को स्थानीय से वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की ठोस रणनीति बनाना।

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बैठक के दौरान कहा कि यह क्षेत्र रोजगार सृजन, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की अपार क्षमता रखता है, बशर्ते इसे सही दिशा और आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं।


कौशल उन्नयन पर विशेष जोर

बैठक में कारीगरों के कौशल उन्नयन (Skill Upgradation) को प्राथमिकता का विषय बनाया गया। सिंधिया ने कहा कि पारंपरिक कौशल को आधुनिक डिजाइन, ट्रेंड और बाजार की मांग से जोड़ना समय की आवश्यकता है।

इसके लिए—

  • डिजाइन प्रशिक्षण
  • आधुनिक तकनीकों का समावेश
  • युवा पीढ़ी को हथकरघा और हस्तशिल्प से जोड़ना

जैसे बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा हुई। इससे कारीगरों की आय बढ़ेगी और उनकी कला को नया आयाम मिलेगा।

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गुणवत्ता प्रमाणन से बढ़ेगा भरोसा

हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों की गुणवत्ता प्रमाणन (Quality Certification) पर भी बैठक में खास फोकस किया गया। सिंधिया ने कहा कि जब तक उत्पादों को प्रमाणित पहचान नहीं मिलेगी, तब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा कठिन होगी।

गुणवत्ता प्रमाणन से—

  • नकली उत्पादों पर रोक लगेगी
  • उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ेगा
  • कारीगरों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिलेगा

सस्टेनेबल फाइबर और प्राकृतिक रंगों पर चर्चा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘Fashion for Environment and Empowerment’ विज़न के अनुरूप बैठक में सस्टेनेबल फाइबर और प्राकृतिक रंगों (Sustainable Fibres & Dyes) के उपयोग पर भी चर्चा की गई।

इसका उद्देश्य—

  • पर्यावरण संरक्षण
  • रसायन मुक्त उत्पादन
  • पारंपरिक और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण

सिंधिया ने कहा कि पूर्वोत्तर के पास प्राकृतिक संसाधनों की भरपूर उपलब्धता है, जिसका सही उपयोग कर यह क्षेत्र ग्रीन फैशन हब बन सकता है।


ई-कॉमर्स से बाजार तक सीधी पहुंच

बैठक में ई-कॉमर्स आधारित बाजार पहुंच को बेहद अहम बताया गया। सिंधिया ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से कारीगरों को बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और वे सीधे देश-विदेश के ग्राहकों तक अपने उत्पाद पहुंचा सकेंगे।

इसके लिए—

  • डिजिटल प्रशिक्षण
  • ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ना
  • ब्रांडिंग और पैकेजिंग

जैसे विषयों पर रणनीति बनाई गई।


क्लस्टर आधारित विकास मॉडल

हस्तशिल्प और हथकरघा क्षेत्र को मजबूत करने के लिए क्लस्टर आधारित विकास (Cluster-Based Development) को भी प्रमुख समाधान माना गया। इसके तहत एक ही क्षेत्र के कारीगरों को एक प्लेटफॉर्म पर लाकर—

  • उत्पादन बढ़ाया जाएगा
  • लागत कम होगी
  • सामूहिक ब्रांडिंग को बढ़ावा मिलेगा

समग्र और टिकाऊ विकास का लक्ष्य

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि समग्र और टिकाऊ विकास (Holistic & Sustainable Growth) सुनिश्चित करना है। इससे कारीगरों की आय, जीवन स्तर और सामाजिक सुरक्षा में सुधार होगा।


पूर्वोत्तर के लिए बड़ी आर्थिक संभावना

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह रोडमैप प्रभावी ढंग से लागू होता है, तो पूर्वोत्तर भारत का हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्र आने वाले वर्षों में—

  • रोजगार का बड़ा स्रोत
  • निर्यात में वृद्धि
  • सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा

दे सकता है।

ज्योतिरादित्य सिंधिया की यह पहल पूर्वोत्तर भारत के लिए एक नई आर्थिक और सांस्कृतिक दिशा तय करने वाली साबित हो सकती है। केंद्र और राज्य सरकारों के समन्वय से यदि योजनाएं ज़मीनी स्तर पर उतरती हैं, तो यह क्षेत्र न केवल कारीगरों की जिंदगी बदलेगा, बल्कि भारत की वैश्विक पहचान को भी मजबूत करेगा।


 

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