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RSS प्रमुख मोहन भागवत बोले— संघ का सबसे अधिक विरोध हुआ, हमले और हत्याएं भी हुईं, फिर भी नहीं आई कटुता

नई दिल्ली।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने संघ के संघर्षपूर्ण इतिहास और स्वयंसेवकों के धैर्य पर बड़ा बयान दिया है।

डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि दुनिया के किसी भी स्वयंसेवी संगठन का इतना विरोध नहीं हुआ, जितना राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का हुआ है। उन्होंने कहा कि संघ के खिलाफ केवल वैचारिक विरोध ही नहीं, बल्कि हमले हुए और स्वयंसेवकों की हत्याएं तक की गईं, लेकिन इसके बावजूद संघ के स्वयंसेवक निरंतर आगे बढ़ते रहे।

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कटुता नहीं, सेवा भाव बना रहा आधार

RSS प्रमुख ने स्पष्ट किया कि इतने लंबे संघर्ष और विरोध के बाद भी एक भी स्वयंसेवक के मन में कटुता का भाव नहीं है। उन्होंने कहा कि संघ का मूल मंत्र सेवा, समर्पण और राष्ट्र निर्माण रहा है, और यही विचारधारा स्वयंसेवकों को मजबूती देती रही है।

RSS के 100 वर्ष: संघर्ष से विस्तार तक

संघ के 100 वर्षों की यात्रा को स्मरण करते हुए भागवत ने कहा कि विरोध, प्रतिबंध और आलोचनाओं के बावजूद RSS ने समाज में सेवा, संस्कृति और राष्ट्रभाव के माध्यम से अपनी भूमिका को निरंतर विस्तार दिया है।

उन्होंने कहा कि संघ का उद्देश्य कभी टकराव नहीं, बल्कि समाज को जोड़ना और राष्ट्रहित में कार्य करना रहा है।


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