अयोध्या। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र, अयोध्या धाम में विराजमान ब्रह्मांड नायक प्रभु श्री रामलला का प्रतिदिन भव्य और दिव्य श्रृंगार किया जाता है। इसी कड़ी में पौष माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि, विक्रम संवत 2082 (शनिवार, 3 जनवरी) को रामलला का शुभ अलौकिक श्रृंगार संपन्न हुआ।
रामलला को प्रतिदिन चार समय भोग अर्पित किया जाता है। भोग राम मंदिर की पवित्र रसोई में तैयार किए जाते हैं, जहां शुद्धता और परंपरा का विशेष ध्यान रखा जाता है। दिन की शुरुआत बाल भोग से होती है, इसके बाद समय और ऋतु के अनुसार अलग-अलग व्यंजन भगवान को समर्पित किए जाते हैं।
मंदिर प्रशासन के अनुसार, रामलला को हर दिन और हर मौसम के अनुरूप वस्त्र धारण कराए जाते हैं। गर्मियों में उन्हें हल्के सूती वस्त्र पहनाए जाते हैं, जबकि शीत ऋतु में ऊनी वस्त्र और स्वेटर धारण कराए जाते हैं। श्रृंगार में प्रयुक्त पुष्पमालाएं भी विशेष रूप से दिल्ली से मंगाई जाती हैं, जो उनकी दिव्यता को और बढ़ाती हैं।
रामलला की दैनिक आरती व दर्शन समय-सारणी
- प्रथम आरती (मंगला आरती): सुबह 6:30 बजे
- दोपहर भोग आरती: दोपहर 12:00 बजे
- संध्या आरती: शाम 7:30 बजे
- शयन आरती एवं शयन: रात 8:30 बजे
श्रद्धालु सुबह 6:30 बजे से शाम 7:30 बजे तक प्रभु श्री रामलला के दर्शन कर सकते हैं। शयन आरती के बाद मंदिर के पट बंद कर दिए जाते हैं।
रामलला का यह नित्य श्रृंगार और भोग व्यवस्था सनातन परंपरा का अनुपम उदाहरण है, जिसमें प्रभु अपने भक्तों को प्रतिदिन अलग-अलग दिव्य स्वरूप में दर्शन देकर कृपा बरसाते हैं।










