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नदी-नाले पार कर बचाया गया भविष्य: ‘बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़’ अभियान को मिल रही जमीनी मजबूती

नदी-नाले पार कर बचाया गया भविष्य

‘बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़’ अभियान को मिल रही जमीनी मजबूती

रायपुर, 06 जनवरी 2026। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा संचालित “बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़” अभियान जमीनी स्तर पर प्रभावी रूप से साकार होता नजर आ रहा है। महिला एवं बाल विकास विभाग तथा जिला प्रशासन की सतर्कता और संवेदनशीलता के चलते दुर्गम एवं पहुँचविहीन क्षेत्र में नदी-नाले पार कर 12 वर्षीय बालिका का बाल विवाह समय रहते रोका गया। इस त्वरित कार्रवाई से न केवल एक मासूम का भविष्य सुरक्षित हुआ, बल्कि समाज में बाल विवाह जैसी कुप्रथा के विरुद्ध एक सशक्त संदेश भी गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार 02 जनवरी 2026 को प्रशासन को सूचना मिली कि सुकमा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत रामाराम के सुदूर गांव नाड़ीगुफा में एक नाबालिग बालिका का विवाह किया जा रहा है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर के मार्गदर्शन में तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

इसके पश्चात जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी के नेतृत्व में जिला बाल संरक्षण इकाई, चाइल्ड लाइन और विभागीय अमले की संयुक्त टीम गठित की गई। टीम ने उफनते नदी-नालों और अत्यंत दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद पैदल यात्रा कर गांव तक पहुँच बनाई और समय रहते विवाह प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया।

मौके पर पाया गया कि पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह की सभी तैयारियाँ पूरी हो चुकी थीं। अधिकारियों ने संवेदनशीलता के साथ परिजनों एवं ग्रामीणों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के प्रावधानों, कानूनी दायित्वों तथा इसके गंभीर सामाजिक दुष्परिणामों की जानकारी दी। प्रशासन की समझाइश का सकारात्मक असर हुआ और परिजनों ने स्वेच्छा से बाल विवाह रोकने का निर्णय लिया। ग्रामीणों की उपस्थिति में विधिवत पंचनामा तैयार कर कार्रवाई को औपचारिक रूप दिया गया।

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कार्रवाई के दौरान बालिका को पुनः शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने तथा उसके सुरक्षित और सम्मानजनक भविष्य के लिए परिजनों को प्रेरित किया गया। साथ ही शासन की विभिन्न बाल संरक्षण एवं शिक्षा से जुड़ी योजनाओं की जानकारी भी उपलब्ध कराई गई।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा 10 मार्च 2024 को “बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़” अभियान का शुभारंभ किया गया था।
बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 की धारा 16 के अंतर्गत राज्य शासन द्वारा 13,823 बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों को अधिसूचित किया गया है।

अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के परिणामस्वरूप नवंबर 2025 तक प्रदेश में 189 बाल विवाह रोके जा चुके हैं। राज्य सरकार के सतत प्रयासों और जनसहभागिता के चलते बालोद जिला पूर्णतः बाल विवाह मुक्त जिला घोषित किया जा चुका है, जो पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणास्रोत है।

वर्ष 2025-26 के लिए राज्य शासन ने

  • 31 मार्च 2026 तक राज्य की 50 प्रतिशत ग्राम पंचायतों एवं नगरीय निकायों को बाल विवाह मुक्त घोषित करने
  • तथा 31 मार्च 2029 तक छत्तीसगढ़ को पूर्णतः बाल विवाह मुक्त राज्य बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने स्पष्ट किया है कि बच्चों का सुरक्षित, शिक्षित और गरिमामय भविष्य सुनिश्चित करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथाओं के उन्मूलन हेतु प्रशासनिक सतर्कता, जनजागरूकता और त्वरित कार्रवाई आगे भी निरंतर जारी रहेगी।

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