
महादेव ऑनलाइन बुक केस: 91.82 करोड़ की कुर्की, डिजिटल सट्टेबाजी और सिस्टम पर उठते गंभीर सवाल
महादेव ऑनलाइन बुक केस में प्रवर्तन निदेशालय की बड़ी कार्रवाई सामने आई है। ED ने PMLA के तहत 91.82 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियां कुर्क की हैं। जांच में डिजिटल सट्टेबाजी, मनी लॉन्ड्रिंग, फर्जी FPI निवेश और हवाला नेटवर्क का खुलासा हुआ है। अब तक 13 गिरफ्तारियां और 2600 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां जब्त की जा चुकी हैं। यह मामला देश के सबसे बड़े ऑनलाइन सट्टा घोटालों में से एक माना जा रहा है।
महादेव ऑनलाइन बुक केस: 91.82 करोड़ की कुर्की, डिजिटल सट्टेबाजी और सिस्टम पर उठते गंभीर सवाल
प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा महादेव ऑनलाइन बुक (Mahadev Online Book – MOB) और Skyexchange.com से जुड़े अवैध सट्टेबाजी नेटवर्क के खिलाफ की गई ताजा कार्रवाई ने देशभर में हलचल मचा दी है। रायपुर जोनल कार्यालय द्वारा PMLA, 2002 के तहत जारी प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर (PAO) में लगभग 91.82 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों को कुर्क किया गया है। यह कार्रवाई न सिर्फ एक बड़े आर्थिक अपराध को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि कैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के ज़रिए अवैध गतिविधियां एक संगठित उद्योग का रूप ले चुकी हैं।
डिजिटल सट्टेबाजी: अपराध का नया चेहरा
महादेव ऑनलाइन बुक कोई साधारण बेटिंग ऐप नहीं था, बल्कि यह एक अंतरराष्ट्रीय डिजिटल सट्टेबाजी सिंडिकेट के रूप में काम कर रहा था। इस नेटवर्क के ज़रिए क्रिकेट, फुटबॉल, टेनिस समेत कई खेलों पर ऑनलाइन सट्टा खिलाया जाता था। ED की जांच में सामने आया है कि यह प्लेटफॉर्म व्हाइट-लेबल मॉडल पर काम करता था, यानी एक ही बैकएंड से सैकड़ों वेबसाइट्स और ऐप्स संचालित किए जा रहे थे, जिनके नाम और इंटरफेस अलग-अलग होते थे।
यह मॉडल इसलिए खतरनाक है क्योंकि इससे:
- कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है
- स्थानीय एजेंट्स को लॉग-इन पैनल देकर पूरे देश में नेटवर्क फैलाया जाता है
- हर लेवल पर कमीशन और फिक्स्ड प्रॉफिट सिस्टम लागू होता है
91.82 करोड़ की कुर्की: पैसा कहां से आया, कहां गया?
ED की प्रेस रिलीज़ के अनुसार, कुर्क की गई संपत्तियों में:
- ₹74.28 करोड़ से अधिक की बैंक बैलेंस
- ₹17.5 करोड़ की हाई-वैल्यू अचल संपत्तियां शामिल हैं
इन संपत्तियों का संबंध:
- Perfect Plan Investment LLC
- Exim General Trading – GZCO
- और उनसे जुड़े व्यक्तियों सौरभ चंद्राकर, रवि उप्पल और गगन गुप्ता से बताया गया है।
जांच में यह भी सामने आया कि:
- संपत्तियां परिजनों और सहयोगियों के नाम पर खरीदी गईं
- बेनामी खातों और फर्जी कंपनियों का इस्तेमाल हुआ
- अवैध कमाई को वैध दिखाने के लिए रियल एस्टेट और निवेश का सहारा लिया गया
मनी लॉन्ड्रिंग का पूरा तंत्र
महादेव केस सिर्फ सट्टेबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक संगठित मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का उदाहरण है। ED के मुताबिक:
- अवैध सट्टे से कमाया गया पैसा
- पहले फर्जी बैंक अकाउंट्स में डाला गया
- फिर क्रिप्टो एसेट्स, हवाला चैनल्स और विदेशी कंपनियों के ज़रिए विदेश भेजा गया
सबसे गंभीर बात यह है कि:
- कई ट्रांजैक्शन न तो बैंकों में दर्ज हुए
- न ही उन पर टैक्स चुकाया गया
इससे न केवल सरकारी राजस्व को भारी नुकसान हुआ, बल्कि देश की वित्तीय प्रणाली की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हुए।
विदेशी निवेश के नाम पर खेल
ED ने अपनी जांच में तथाकथित फर्जी FPI (Foreign Portfolio Investment) मॉडल का भी खुलासा किया है। इसके तहत:
- सट्टेबाजी से आए पैसे को विदेशी निवेश के रूप में भारत में वापस लाया गया
- सूचीबद्ध भारतीय कंपनियों में निवेश दिखाया गया
- बदले में 30–40% तक नकद “कैशबैक” दिया गया
इसमें कुछ कंपनियों और लॉजिस्टिक्स फर्मों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। यह पहलू बेहद गंभीर है क्योंकि इससे:
- शेयर बाजार की विश्वसनीयता पर असर पड़ता है
- ईमानदार निवेशकों का भरोसा कमजोर होता है
छत्तीसगढ़ कनेक्शन और राजनीतिक बहस
महादेव ऑनलाइन बुक केस में छत्तीसगढ़ का नाम बार-बार सामने आना इस मामले को और संवेदनशील बनाता है। रायपुर से जांच संचालित होना इस बात का संकेत है कि:
- नेटवर्क की जड़ें राज्य में गहरी थीं
- स्थानीय एजेंट्स और प्रभावशाली लोगों की भूमिका की जांच जरूरी है
हालांकि ED की आधिकारिक विज्ञप्ति में किसी राजनीतिक व्यक्ति का नाम नहीं लिया गया है, लेकिन:
- विपक्ष लगातार राजनीतिक संरक्षण के आरोप लगा रहा है
- यह मामला राज्य की कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर भी सवाल खड़े करता है
अब तक की कार्रवाई: आंकड़े क्या कहते हैं?
ED की अब तक की कार्रवाई में:
- 13 लोगों की गिरफ्तारी
- 74 संस्थाओं को आरोपी बनाया जाना
- 5 अभियोजन शिकायतें (Prosecution Complaints) दर्ज
इसके अलावा:
- देशभर में 175 से अधिक ठिकानों पर छापे
- ₹2,600 करोड़ से अधिक की संपत्तियां जब्त/फ्रीज़/कुर्क
यह दर्शाता है कि महादेव केस कोई छोटा मामला नहीं, बल्कि देश की सबसे बड़ी डिजिटल अपराध जांचों में से एक है।
सामाजिक प्रभाव: युवा, जुआ और डिजिटल लत
ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म्स का सबसे बड़ा असर युवाओं पर पड़ा है। आसान पैसे का लालच:
- युवाओं को जुए की लत की ओर धकेलता है
- आर्थिक बर्बादी और अपराध की ओर ले जाता है
- परिवार और समाज पर नकारात्मक प्रभाव डालता है
महादेव केस यह सवाल भी खड़ा करता है कि:
- डिजिटल इंडिया के दौर में रेगुलेशन कितना मजबूत है?
- पेमेंट गेटवे और ऐप स्टोर्स की जिम्मेदारी क्या है?
महादेव ऑनलाइन बुक मामले में 91.82 करोड़ की कुर्की सिर्फ एक कानूनी कार्रवाई नहीं, बल्कि यह पूरे सिस्टम के लिए एक चेतावनी है। यह केस बताता है कि:
- डिजिटल अपराध अब सीमित नहीं रहे
- तकनीक के दुरुपयोग से अपराध का स्वरूप बदल चुका है
अगर जांच को तार्किक और निष्पक्ष अंजाम तक पहुंचाया गया, तो यह मामला:
- ऑनलाइन सट्टेबाजी पर लगाम
- मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क पर कड़ा प्रहार
- और कानून के डर की पुनर्स्थापना का उदाहरण बन सकता है
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि महादेव ऑनलाइन बुक केस ने देश के आर्थिक, डिजिटल और प्रशासनिक ढांचे को आईना दिखा दिया है—अब देखना यह है कि यह जांच न्याय के अंतिम मुकाम तक कितनी मजबूती से पहुंचती है।









