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मनरेगा संग्राम: टीएस सिंहदेव ने ज़िला कांग्रेस अध्यक्षों संग की समीक्षा, ग्रामीण रोज़गार पर ज़ोर

मनरेगा संग्राम: टीएस सिंहदेव ने ज़िला कांग्रेस अध्यक्षों संग की विस्तृत बैठक, ग्रामीण रोज़गार और मज़दूर अधिकारों पर फोकस

रायपुर।छत्तीसगढ़ की राजनीति में मनरेगा एक बार फिर केंद्र में आ गया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता टी.एस. सिंहदेव ने ‘मनरेगा संग्राम’ अभियान के तहत राज्य भर के ज़िला कांग्रेस अध्यक्षों के साथ विस्तृत बैठक कर ग्रामीण रोज़गार, मज़दूरों के अधिकार और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की मौजूदा स्थिति की समीक्षा की। बैठक में ज़मीनी स्तर पर मनरेगा के क्रियान्वयन, भुगतान में देरी, काम की उपलब्धता और केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर गहन चर्चा हुई।

टी.एस. सिंहदेव ने साफ शब्दों में कहा कि “मनरेगा कोई सामान्य योजना नहीं, बल्कि गरीबों और ग्रामीण भारत की जीवनरेखा है। इसकी रक्षा और मजबूती हमारी राजनीतिक और सामाजिक प्रतिबद्धता है।”

बैठक के दौरान ज़िला कांग्रेस अध्यक्षों ने अपने-अपने क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति से नेतृत्व को अवगत कराया। कई ज़िलों से यह बात सामने आई कि:

  • मज़दूरों को समय पर काम नहीं मिल पा रहा है
  • मज़दूरी भुगतान में लगातार देरी हो रही है
  • केंद्र से बजट आवंटन और भुगतान की प्रक्रिया बाधित है

नेताओं ने आरोप लगाया कि मनरेगा को जानबूझकर कमजोर किया जा रहा है, ताकि ग्रामीण मज़दूरों पर निर्भरता कम हो और सामाजिक सुरक्षा का यह मजबूत ढांचा धीरे-धीरे निष्क्रिय हो जाए।

टी.एस. सिंहदेव ने कहा कि छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में, जहां बड़ी आबादी कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर निर्भर है, मनरेगा की भूमिका बेहद अहम है।
उन्होंने कहा कि—

  • सूखे और बेरोज़गारी के समय मनरेगा ग्रामीण परिवारों का सहारा बनता है
  • महिलाओं, अनुसूचित जाति-जनजाति और वंचित वर्गों के लिए यह आय का स्थायी स्रोत है

यदि मनरेगा कमजोर हुआ, तो इसका सीधा असर ग्रामीण पलायन, गरीबी और सामाजिक असमानता पर पड़ेगा।

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बैठक में कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार पर मनरेगा विरोधी रवैया अपनाने का आरोप लगाया। टी.एस. सिंहदेव ने कहा कि बजट में कटौती, भुगतान में देरी और काम के दिनों को सीमित करने जैसे कदम मनरेगा की मूल भावना के खिलाफ हैं।

उन्होंने कहा,
“जब देश में बेरोज़गारी बढ़ रही है, तब रोज़गार गारंटी योजना को कमजोर करना आम आदमी के साथ अन्याय है।”

बैठक में यह भी तय किया गया कि मनरेगा संग्राम केवल एक राजनीतिक बयानबाज़ी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे ज़मीनी स्तर पर आंदोलन का रूप दिया जाएगा।
रणनीति के तहत:

  • ब्लॉक और पंचायत स्तर पर जनसंवाद
  • मज़दूरों के साथ बैठकें
  • भुगतान और काम से जुड़े मामलों का दस्तावेज़ीकरण
  • प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन

जैसे कदम उठाए जाएंगे।

टी.एस. सिंहदेव ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस मज़दूरों के अधिकारों से कोई समझौता नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि—

  • 100 दिन का रोज़गार हर पात्र परिवार को मिलना चाहिए
  • मज़दूरी का भुगतान समय पर होना चाहिए
  • तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनों को बहाना बनाकर काम रोका नहीं जाना चाहिए

उन्होंने ज़िला अध्यक्षों से कहा कि वे मज़दूरों की आवाज़ बनें और हर मंच पर उनके मुद्दे उठाएं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मनरेगा को लेकर कांग्रेस का आक्रामक रुख आने वाले समय में राज्य की राजनीति को नई दिशा दे सकता है। ग्रामीण वोट बैंक पर इसका सीधा असर पड़ता है और यही वजह है कि कांग्रेस इसे एक बड़े जन मुद्दे के रूप में सामने ला रही है।

बैठक के अंत में टी.एस. सिंहदेव ने कहा कि मनरेगा को लेकर यह लड़ाई लंबी है, लेकिन कांग्रेस हर स्तर पर इसे लड़ेगी। उन्होंने ज़िला अध्यक्षों से कहा कि वे गांव-गांव जाकर लोगों को यह बताएं कि मनरेगा केवल रोज़गार नहीं, बल्कि सम्मान और सुरक्षा की गारंटी है।

 

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