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77वां गणतंत्र दिवस 2026: प्रधानमंत्री–मुख्यमंत्री के संदेश के साथ संविधान और विकसित भारत का संकल्प

संविधान से संकल्प तक: प्रधानमंत्री–मुख्यमंत्री के संदेश के साथ लोकतंत्र की ताकत और विकसित भारत की ओर बढ़ता राष्ट्र

नई दिल्ली/ 26 जनवरी 2026 |पूरा देश आज 77वां गणतंत्र दिवस राष्ट्रीय गौरव, उत्साह और लोकतांत्रिक चेतना के साथ मना रहा है। बर्फीले पहाड़ों से लेकर समुद्र तटों तक, महानगरों से लेकर दूरस्थ गांवों तक हर ओर तिरंगा शान से लहराता दिखाई दिया। 26 जनवरी केवल एक राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि यह भारतीय संविधान, लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की सामूहिक अभिव्यक्ति है।

यह वही ऐतिहासिक दिन है जब 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ और देश एक संप्रभु, लोकतांत्रिक गणराज्य बना। आज के दिन देश ने न केवल अपने अतीत को याद किया, बल्कि भविष्य के लिए नए संकल्प भी लिए।


प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम संदेश

गणतंत्र दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि—

“गणतंत्र दिवस भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों, संविधान की शक्ति और जनभागीदारी का उत्सव है। यह दिन हमें हमारे कर्तव्यों की याद दिलाता है और ‘विकसित भारत’ के संकल्प को नई ऊर्जा प्रदान करता है।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज का भारत आत्मनिर्भरता, नवाचार और समावेशी विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे संविधान के मूल्यों को आत्मसात करते हुए राष्ट्र निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाएं।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि संविधान निर्माताओं की दूरदृष्टि के कारण ही भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा और सशक्त लोकतंत्र है।


इतिहास की पृष्ठभूमि: आज़ादी से गणतंत्र तक

15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी—एक ऐसा संविधान तैयार करना, जो विविधताओं से भरे भारत को एक सूत्र में बांध सके। संविधान सभा ने इस ऐतिहासिक जिम्मेदारी को पूरी गंभीरता से निभाया।

डॉ. भीमराव अंबेडकर के नेतृत्व में प्रारूप समिति ने सामाजिक न्याय, समानता और स्वतंत्रता को संविधान की आत्मा बनाया। लगभग 2 वर्ष 11 माह 18 दिन की अथक मेहनत के बाद भारत का संविधान तैयार हुआ, जो आज भी देश को दिशा दिखा रहा है।


मुख्यमंत्री का संदेश: छत्तीसगढ़ से राष्ट्र को शुभकामनाएं

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों और देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि—

“गणतंत्र दिवस हमें संविधान के प्रति निष्ठा और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने का अवसर देता है। यह दिन नई ऊर्जा, नया उत्साह और विकसित भारत के संकल्प को और अधिक सुदृढ़ करता है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार संविधान में निहित सामाजिक न्याय, जनकल्याण और समावेशी विकास के सिद्धांतों पर चलते हुए अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

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उन्होंने युवाओं, किसानों, महिलाओं और श्रमिकों से लोकतंत्र को मजबूत करने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।


नई दिल्ली से गांव तक: तिरंगे की शान

राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में कर्तव्य पथ पर आयोजित मुख्य समारोह में प्रधानमंत्री द्वारा ध्वजारोहण। परेड और झांकियों के माध्यम से भारत की सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक विविधता और विकास यात्रा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत ।

वहीं—

  • सभी राज्य राजधानियों में राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री ने ध्वजारोहण किया
  • जिला मुख्यालयों, नगर निगमों, तहसीलों और ग्राम पंचायतों में समारोह आयोजित हुए
  • स्कूलों और कॉलेजों में बच्चों ने देशभक्ति कार्यक्रम प्रस्तुत किए

छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और जनप्रतिनिधियों द्वारा ध्वजारोहण कर संविधान के प्रति आस्था व्यक्त की गई।


स्वतंत्रता सेनानियों और संविधान निर्माताओं को नमन

गणतंत्र दिवस के अवसर पर देश ने स्वतंत्रता सेनानियों के अमर बलिदान को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया। महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद सहित असंख्य वीरों के त्याग के कारण ही आज भारत स्वतंत्र और सशक्त है।

साथ ही संविधान निर्माताओं की दूरदृष्टि और समर्पण को नमन किया गया, जिनकी बदौलत भारत को एक मजबूत लोकतांत्रिक ढांचा मिला।


लोकतंत्र की आत्मा: अधिकार और कर्तव्य

संविधान ने नागरिकों को मौलिक अधिकार प्रदान किए, लेकिन साथ ही मौलिक कर्तव्यों का भी उल्लेख किया। गणतंत्र दिवस यह याद दिलाता है कि—

  • अधिकार और कर्तव्य एक-दूसरे के पूरक हैं
  • लोकतंत्र तभी मजबूत होता है जब नागरिक जागरूक हों
  • संविधान का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है

विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ता देश

प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री दोनों के संदेशों में ‘विकसित भारत’ का संकल्प प्रमुख रूप से उभरकर सामने आया। आज का भारत—

  • आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है
  • डिजिटल और तकनीकी नवाचार को अपना रहा है
  • समाज के हर वर्ग के उत्थान को प्राथमिकता दे रहा है

गणतंत्र दिवस इस राष्ट्रीय लक्ष्य को और अधिक मजबूती प्रदान करता है।


वैश्विक मंच पर भारत की पहचान

आज भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसकी भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। शांति, सहयोग और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता विश्व समुदाय के लिए प्रेरणास्रोत है।


संकल्प, संविधान और सशक्त भारत

77वां गणतंत्र दिवस देशवासियों के लिए आत्ममंथन और संकल्प का दिन है। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के संदेशों ने यह स्पष्ट किया कि संविधान ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है और लोकतंत्र ही हमारे भविष्य की राह।

संकल्प यही है—
संविधान का सम्मान,
लोकतंत्र की मजबूती,
और भारत को निरंतर विकसित भारत की दिशा में आगे ले जाना।

 

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