
सुंदरबन: दुनिया का सबसे बड़ा मैंग्रोव वन, जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण की मजबूत ढाल
बंगाल की खाड़ी में स्थित सुंदरबन विश्व का सबसे बड़ा मैंग्रोव वन है। रॉयल बंगाल टाइगर, 260+ पक्षी प्रजातियाँ और 78 मैंग्रोव प्रजातियों वाला यह क्षेत्र पृथ्वी के पारिस्थितिक संतुलन की मजबूत ढाल है।
सुंदरबन: पृथ्वी का प्राकृतिक कवच, जैव विविधता और जीवन का अनमोल संसार
कोलकाता।बंगाल की खाड़ी के किनारे फैला सुंदरबन केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए प्रकृति का एक अनमोल उपहार है। गंगा, ब्रह्मपुत्र और मेघना नदियों द्वारा निर्मित विशाल डेल्टा पर पसरा सुंदरबन विश्व का सबसे बड़ा मैंग्रोव वन माना जाता है। यह क्षेत्र अपनी अद्वितीय भौगोलिक संरचना, समृद्ध जैव विविधता और पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने में अहम भूमिका के कारण वैश्विक स्तर पर विशेष महत्व रखता है।
सुंदरबन का नाम ही अपने आप में इसकी पहचान बताता है — ‘सुंदर’ यानी सुंदर वृक्ष। यह इलाका ज्वार-भाटे से आकार लेने वाले जटिल जलमार्गों, कीचड़ भरे मैदानों और खारे पानी में पनपने वाले मैंग्रोव द्वीपों से मिलकर बना है। यही कारण है कि सुंदरबन न केवल देखने में अद्भुत है, बल्कि एक जीवंत और सतत पारिस्थितिकी तंत्र का उत्कृष्ट उदाहरण भी है।
यूनेस्को विश्व धरोहर में शामिल सुंदरबन
भारत का सुंदरबन क्षेत्र वर्ष 1987 से यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है। यह दर्जा इस बात का प्रमाण है कि सुंदरबन का संरक्षण केवल राष्ट्रीय दायित्व नहीं, बल्कि वैश्विक जिम्मेदारी भी है। यहाँ मौजूद मैंग्रोव वन न केवल जैव विविधता को संरक्षण देते हैं, बल्कि समुद्री तूफानों, चक्रवातों और तटीय कटाव से लाखों लोगों की रक्षा करने में भी अहम भूमिका निभाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सुंदरबन जैसे मैंग्रोव वनों का अस्तित्व न हो, तो बंगाल की खाड़ी से उठने वाले शक्तिशाली चक्रवात सीधे तटीय इलाकों में तबाही मचा सकते हैं। ऐसे में सुंदरबन को “प्रकृति की ढाल” कहा जाए तो गलत नहीं होगा।
जैव विविधता का अद्भुत खजाना
सुंदरबन जैव विविधता के मामले में विश्व के सबसे समृद्ध क्षेत्रों में से एक है। यहाँ 260 से अधिक पक्षी प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिनमें प्रवासी और स्थानीय दोनों प्रकार के पक्षी शामिल हैं। सर्दियों के मौसम में हजारों किलोमीटर दूर से आने वाले प्रवासी पक्षी सुंदरबन की आर्द्रभूमियों को अपना अस्थायी घर बनाते हैं।
सुंदरबन की पहचान माने जाने वाले रॉयल बंगाल टाइगर यहाँ पूरे शान से विचरते हैं। यह दुनिया के उन गिने-चुने इलाकों में से एक है, जहाँ बाघ खारे पानी वाले मैंग्रोव वनों में रहने के लिए अनुकूलित हो चुके हैं। इसके अलावा खारे पानी के मगरमच्छ, भारतीय अजगर, चीतल, जंगली सूअर और कई दुर्लभ सरीसृप प्रजातियाँ भी यहाँ पाई जाती हैं।
मैंग्रोव वन: जीवन का आधार
सुंदरबन में मैंग्रोव की लगभग 78 प्रजातियाँ पाई जाती हैं। ये मैंग्रोव न केवल मछलियों और जलीय जीवों के लिए प्रजनन स्थल प्रदान करते हैं, बल्कि कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने में भी मदद करते हैं।
मैंग्रोव की जड़ें मिट्टी को मजबूती से थामे रखती हैं, जिससे तटीय कटाव कम होता है। यही वजह है कि सुंदरबन जैसे मैंग्रोव वन को “ब्लू कार्बन इकोसिस्टम” भी कहा जाता है, जो पृथ्वी के पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
स्थानीय समुदाय और सुंदरबन
सुंदरबन केवल वन्यजीवों का ही घर नहीं है, बल्कि लाखों लोगों की आजीविका भी इससे जुड़ी हुई है। मछली पकड़ना, शहद संग्रह, केकड़ा पालन और छोटी-मोटी कृषि गतिविधियाँ यहाँ के लोगों की जीवनरेखा हैं। हालांकि, मानव-वन्यजीव संघर्ष, खासकर बाघों के साथ टकराव, यहाँ एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
सरकार और विभिन्न स्वयंसेवी संगठन स्थानीय समुदायों को सुरक्षित आजीविका के विकल्प उपलब्ध कराने और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।
जलवायु परिवर्तन और बढ़ती चुनौतियाँ
जलवायु परिवर्तन सुंदरबन के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बनकर उभरा है। समुद्र जल स्तर में वृद्धि, तटीय कटाव और बार-बार आने वाले चक्रवात इस नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित कर रहे हैं। कई द्वीप धीरे-धीरे समुद्र में समा रहे हैं, जिससे न केवल जैव विविधता, बल्कि मानव बस्तियाँ भी खतरे में हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो सुंदरबन का बड़ा हिस्सा भविष्य में अस्तित्व संकट से जूझ सकता है।
संरक्षण के लिए सरकारी प्रयास
भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग (DoWR, RD&GR) सहित कई संस्थान सुंदरबन के संरक्षण और सतत विकास के लिए कार्य कर रहे हैं। मैंग्रोव पुनर्स्थापन, तटीय संरक्षण परियोजनाएँ और समुदाय आधारित संरक्षण कार्यक्रम इस दिशा में अहम कदम हैं।
इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से भी सुंदरबन की जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।
सुंदरबन: भविष्य की उम्मीद
सुंदरबन केवल वर्तमान की विरासत नहीं, बल्कि भविष्य की सुरक्षा भी है। यह क्षेत्र हमें सिखाता है कि प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर चलना ही मानव सभ्यता के लिए सबसे सुरक्षित रास्ता है। मैंग्रोव वनों का संरक्षण न केवल वन्यजीवों के लिए, बल्कि तटीय इलाकों में रहने वाले करोड़ों लोगों के जीवन और आजीविका के लिए भी अनिवार्य है।
आज जरूरत है कि सरकार, वैज्ञानिक, स्थानीय समुदाय और आम नागरिक मिलकर सुंदरबन की रक्षा के लिए आगे आएँ, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी इस प्राकृतिक चमत्कार को उसी शान के साथ देख सकें।











