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Budget 2026-27: बैटरी एनर्जी स्टोरेज को बड़ा बूस्ट, लिथियम-आयन BESS मैन्युफैक्चरिंग पर कस्टम ड्यूटी छूट

बजट 2026-27: बैटरी स्टोरेज मैन्युफैक्चरिंग को बड़ा प्रोत्साहन, लिथियम-आयन BESS पर कस्टम ड्यूटी छूट

नई दिल्ली। केंद्रीय बजट 2026-27 में भारत के ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) को गति देने के लिए बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) के विनिर्माण को बड़ा प्रोत्साहन दिया गया है। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) के अनुसार, सरकार ने लिथियम-आयन BESS सेल मैन्युफैक्चरिंग में उपयोग होने वाले कैपिटल गुड्स पर बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) छूट को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है।

मंत्रालय का कहना है कि इस कदम से उत्पादन लागत में कमी, घरेलू मूल्य संवर्धन (Domestic Value Addition) को बढ़ावा और देश में ऊर्जा भंडारण प्रणालियों की तैनाती में तेजी आएगी।

इन्फोग्राफिक में क्या बताया गया है?

MNRE द्वारा जारी इन्फोग्राफिक के अनुसार, बजट 2026-27 में लिए गए इस फैसले से—

  • लिथियम-आयन BESS सेल उत्पादन के लिए कैपिटल गुड्स पर BCD छूट
  • ऊर्जा भंडारण समाधानों की लागत में कमी
  • घरेलू मैन्युफैक्चरिंग और ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा
  • ऊर्जा स्टोरेज सिस्टम की त्वरित तैनाती
  • अधिक मजबूत और लचीले (Resilient) पावर सेक्टर की दिशा में अहम कदम

सुनिश्चित होगा।

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पावर सेक्टर के लिए क्यों अहम है यह फैसला

विशेषज्ञों के अनुसार, सौर और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों की हिस्सेदारी बढ़ने के साथ ऊर्जा भंडारण की आवश्यकता भी तेजी से बढ़ रही है। BESS तकनीक ग्रिड स्थिरता, पीक डिमांड मैनेजमेंट और बिजली आपूर्ति की निरंतरता के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

सरकार का यह कदम भारत को ऊर्जा भंडारण के वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

आत्मनिर्भर भारत और ऊर्जा सुरक्षा

MNRE ने कहा कि यह बजटीय निर्णय आत्मनिर्भर भारत और ऊर्जा सुरक्षा के लक्ष्यों के अनुरूप है। घरेलू स्तर पर बैटरी स्टोरेज मैन्युफैक्चरिंग बढ़ने से न केवल आयात पर निर्भरता घटेगी, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

विकसित भारत की ओर कदम

सरकार ने बजट 2026-27 को विकसित भारत की परिकल्पना से जोड़ते हुए कहा कि मजबूत ऊर्जा अवसंरचना और स्वच्छ ऊर्जा समाधान ही भविष्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ होंगे।

 

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