दुर्ग के उतई थाना क्षेत्र के बंजारीपारा में 4 साल 5 महीने की मासूम बच्ची से दरिंदगी के मामले में अदालत ने आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। 40 वर्षीय धनेश्वर साहू उर्फ जनता ने बच्ची को बहला-फुसलाकर अपने घर की छत पर ले जाकर उसके साथ दरिंदगी की थी। बच्ची के चिल्लाने पर आरोपी ने उसका मुंह कपड़े से दबाया और गला घोंटकर उसे मारने की कोशिश की। बच्ची के बेहोश होने के बाद आरोपी ने उसे मरा हुआ समझ लिया।
इसके बाद उसने बच्ची को तकिया कवर और जूट के बोरे में बंद किया और घर के पीछे बने खाली खंडहर में फेंक दिया। हालांकि बच्ची की सांसें चल रही थीं। खंडहर में बोरे से पैर बाहर निकले देखकर मोहल्ले के दो युवकों को शक हुआ। उन्होंने बोरा खोला तो मासूम लहूलुहान हालत में मिली। इसके बाद उसे अस्पताल पहुंचाया गया और पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
15 दिन में पुलिस ने किया था चालान पेश इस मामले में पुलिस ने 15 दिन के भीतर अदालत में चालान पेश कर दिया। घटना 10 अप्रैल 2026 की दोपहर करीब 11.30 बजे हुई थी। उसी दिन पुलिस ने मामला दर्ज किया। आरोपी को गिरफ्तार कर अगले दिन अदालत में पेश किया गया। जांच पूरी करने के बाद 25 अप्रैल को चालान पेश कर दिया गया। इसके बाद सुनवाई पूरी हुई और 25 सितंबर को यानी घटना के 153 दिन बाद अदालत ने फैसला सुना दिया। पुलिस के अनुसार आरोपी धनेंश्वर साहू उर्फ जनता के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 137(2), 87, 109, 238 और 65(2) के तहत कार्रवाई की गई। इसके साथ ही लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम की धारा 5(ड) के साथ धारा 6 और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(2)(v) भी लगाई गई थी।
दादी से 5 रुपए लेकर निकली थी बच्ची घटना वाले दिन मासूम अपनी दादी से 5 रुपए लेकर घर के पास की दुकान पर खाने की चीज लेने गई थी। इसी दौरान आरोपी ने उसे बहलाया और अपने घर की छत पर ले गया। दुकान के पास लगे सीसीटीवी कैमरे में आरोपी बच्ची को अपने साथ ले जाता दिखाई दिया। यही फुटेज बाद में मामले की जांच में अहम सबूत बना। विशेष न्यायालय (पॉक्सो), दुर्ग ने 25 सितंबर को आरोपी को दोषी ठहराया। इसके बाद 26 सितंबर को सजा का आदेश जारी किया गया। आरोपी को अलग-अलग धाराओं में आजीवन कारावास के साथ 7 साल, 10 साल और 7 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई। अलग-अलग धाराओं में कुल 13 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना नहीं देने पर अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा। बच्ची को मरा समझकर बोरे में डाला दरिंदगी के बाद आरोपी ने बच्ची का मुंह दबाया और गला घोंटकर उसे मारने की कोशिश की। बच्ची बेहोश हो गई तो आरोपी ने उसे मरा हुआ समझ लिया। उसने साक्ष्य छिपाने के लिए बच्ची को तकिया कवर और जूट के बोरे में बंद किया और खंडहर में फेंक दिया। काफी देर तक बच्ची घर नहीं पहुंची तो परिवार और मोहल्ले के लोगों ने उसकी तलाश शुरू की। इसी दौरान दो युवकों ने बोरे से उसके पैर बाहर निकले देखे और उसकी जान बच गई।
डीएनए मिलान से जुड़ी कड़ी और मजबूत हुई पुलिस को आरोपी के घर से बाल, तकिया कवर और जूट की बोरी सहित बच्ची के कपड़े और आरोपी के कपड़े मिले। इनका फोरेंसिक जांच और डीएनए मिलान कराया गया। जांच में मिले साक्ष्यों ने आरोपी को घटना से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई। बच्ची के शरीर, जांघ और गले पर खरोंच के निशान, अंदरूनी चोट और ज्यादा खून बहने की बात भी चिकित्सकीय जांच में सामने आई।
4 साल की बच्ची ने अदालत में आरोपी को पहचाना महज 4 साल की बच्ची ने अदालत में भी हिम्मत दिखाई। अदालत में पर्दे के पीछे खड़े आरोपी धनेश्वर साहू को बच्ची ने पहचान लिया और अपने साथ हुई घटना के बारे में बताया। सीसीटीवी, डीएनए, चिकित्सकीय जांच और बच्ची की गवाही समेत कई अहम सबूतों के आधार पर विशेष पॉक्सो अदालत ने आरोपी को दोषी माना। अपर सत्र न्यायाधीश की विशेष पॉक्सो अदालत ने आरोपी को मासूम से दुष्कर्म, हत्या की कोशिश और साक्ष्य छिपाने के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई है। –

















