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INX Media Case Update 2026: ED ने विशेष न्यायालय में पेश किया अभियोजन आदेश

INX मीडिया केस में ED की बड़ी कार्रवाई, पी. चिदंबरम के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति पेश

PMLA केस में नया मोड़: ED ने पी. चिदंबरम के खिलाफ कोर्ट में दाखिल की स्वीकृति

65.88 करोड़ मनी लॉन्ड्रिंग केस: चिदंबरम पर ED की कार्रवाई तेज

INX Media Case Update 2026: ED ने विशेष न्यायालय में पेश किया अभियोजन आदे

FIPB मंजूरी मामला: चिदंबरम के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ी

आईएनएक्स मीडिया मनी लॉन्ड्रिंग केस: ED ने पी. चिदंबरम के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति विशेष न्यायालय में की पेश

नई दिल्ली, 26 फरवरी 2026।

आईएनएक्स मीडिया मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री P. Chidambaram के विरुद्ध अभियोजन स्वीकृति आदेश माननीय विशेष न्यायालय (PMLA), राउज एवेन्यू, नई दिल्ली के समक्ष प्रस्तुत कर दिया है। यह स्वीकृति आदेश सक्षम प्राधिकारी से 10 फरवरी 2026 को प्राप्त हुआ था।

कैसे शुरू हुई जांच?

प्रवर्तन निदेशालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत ईसीआईआर संख्या 07/2017 दर्ज कर जांच प्रारंभ की थी। यह कार्रवाई केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा 15 मई 2017 को दर्ज प्राथमिकी के आधार पर की गई थी। प्राथमिकी में आईएनएक्स मीडिया प्राइवेट लिमिटेड को विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (FIPB) से मिली स्वीकृति में कथित अनियमितताओं का उल्लेख किया गया था।

जांच के दौरान यह आरोप सामने आया कि तत्कालीन वित्त मंत्री के कार्यकाल में आईएनएक्स मीडिया को विदेशी निवेश की स्वीकृति प्रदान की गई, जिसके बदले कथित रूप से अवैध लाभ प्राप्त किया गया। ED के अनुसार, यह राशि शेल कंपनियों और परोक्ष लेन-देन के माध्यम से प्रवाहित की गई।

65.88 करोड़ रुपये की ‘अपराध आय’ का दावा

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ED की जांच में कथित अपराध से प्राप्त कुल आय लगभग ₹65.88 करोड़ आंकी गई है।

₹53.93 करोड़ की संपत्ति 10 अक्टूबर 2018 को अस्थायी रूप से कुर्क की गई थी।

₹11.04 करोड़ की अतिरिक्त संपत्ति 31 मार्च 2023 को कुर्क की गई।

दोनों कुर्की आदेशों की पुष्टि निर्णायक प्राधिकारी द्वारा की जा चुकी है।

न्यायिक कार्यवाही की स्थिति

धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 की धारा 44 एवं 45 के तहत 1 जून 2020 को विशेष न्यायालय (PMLA), राउज एवेन्यू, नई दिल्ली में अभियोजन शिकायत दायर की गई थी। 24 मार्च 2021 को न्यायालय ने मामले में संज्ञान लिया था।

इस बीच, 6 नवंबर 2024 को माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने अपने एक आदेश में स्पष्ट किया कि PMLA की धारा 44(1)(ख) के अंतर्गत अभियोजन स्वीकृति आवश्यक है। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश के अनुपालन में ED ने सक्षम प्राधिकारी से स्वीकृति प्राप्त करने की प्रक्रिया पूरी की।

10 फरवरी 2026 को अभियोजन स्वीकृति मिलने के बाद अब ED ने इसे विशेष न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर दिया है, ताकि मामले की सुनवाई को आगे बढ़ाया जा सके।

किन धाराओं में मामला?

यह मामला भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) और 420 (धोखाधड़ी) के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 तथा धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 की संबंधित धाराओं के अंतर्गत दर्ज किया गया है।

आगे क्या?

अब विशेष न्यायालय में अभियोजन स्वीकृति आदेश दाखिल होने के बाद मामले की सुनवाई में तेजी आने की संभावना है। अदालत में आरोप तय होने और साक्ष्यों के परीक्षण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

गौरतलब है कि इस मामले में अन्य सह-आरोपियों के खिलाफ भी कार्यवाही जारी है। हालांकि अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही किया जाएगा।

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