
नक्सल-मुक्त बस्तर की दिशा में बड़ी सफलता, 15 माओवादियों का आत्मसमर्पण – सीएम विष्णुदेव साय
महासमुंद जिले के सीमावर्ती क्षेत्र में सक्रिय 15 सशस्त्र माओवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण किया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसे नक्सल-मुक्त बस्तर की दिशा में बड़ी उपलब्धि बताया।
नक्सल-मुक्त बस्तर का सपना हो रहा साकार, विकसित-सुरक्षित छत्तीसगढ़ ले रहा आकार
रायपुर / महासमुंद, 01 मार्च 2026। छत्तीसगढ़ को नक्सल-मुक्त बनाने की दिशा में एक बड़ी सफलता मिली है। महासमुंद जिले के सीमावर्ती क्षेत्र में सक्रिय 15 सशस्त्र माओवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है। लोकतंत्र पर विश्वास जताते हुए इन माओवादियों ने सुरक्षा, विकास और शांतिपूर्ण जीवन की राह चुनी।
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में 9 महिलाएं और 6 पुरुष शामिल हैं, जिन पर कुल 73 लाख रुपये का इनाम घोषित था। अत्याधुनिक हथियारों के साथ हुआ यह आत्मसमर्पण इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि भटके हुए युवाओं का विश्वास अब शासन, सुरक्षा और विकास की नीति पर लौट रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि को लेकर कहा कि यह नक्सल-मुक्त बस्तर के संकल्प की दिशा में निर्णायक कदम है। उन्होंने कहा कि भयमुक्त और विकसित छत्तीसगढ़ बनाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री ने इस सफलता का श्रेय नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन को देते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से नक्सलवाद के पूर्ण खात्मे की दिशा में तेज़ी से प्रगति हो रही है।
आत्मसमर्पण की प्रमुख बातें
कुल आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली: 15
महिलाएं: 9, पुरुष: 6
कुल इनामी राशि: 73 लाख रुपये
अत्याधुनिक हथियारों के साथ किया आत्मसमर्पण
महासमुंद सीमावर्ती क्षेत्र में सक्रिय थे
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि सरकार की नई आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के चलते नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सकारात्मक माहौल बना है। विकास कार्य, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सुरक्षा के बेहतर इंतजाम से ग्रामीण क्षेत्रों में विश्वास बहाल हुआ है।
उन्होंने दोहराया कि नक्सल-मुक्त बस्तर और विकसित-सुरक्षित छत्तीसगढ़ बनाना ही सरकार का अटल संकल्प है।











