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मोहन भागवत का बयान: सनातन धर्म के उत्थान से भारत का विकास

सनातन धर्म के उत्थान पर बोले मोहन भागवत, कहा- “भारत का उत्थान ईश्वरीय इच्छा”

नागपुर, महाराष्ट्र। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने सनातन धर्म और वैश्विक परिस्थितियों को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत का उत्थान एक ईश्वरीय इच्छा का परिणाम है और यह प्रक्रिया लगातार जारी है।

भागवत ने अपने संबोधन में योगी अरविंद के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने करीब 150 साल पहले ही यह भविष्यवाणी की थी कि सनातन धर्म का उत्थान होगा और इसके साथ ही भारत का भी उत्थान होगा।

“विश्व लडखड़ा रहा है”

RSS प्रमुख ने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया अस्थिरता के दौर से गुजर रही है। “विश्व अभी लडखड़ा रहा है। हम देखते हैं, बहुत ज्यादा बोलने की आवश्यकता नहीं है, सारी परिस्थिति हमारे सामने है,” उन्होंने कहा।

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युद्धों के पीछे स्वार्थ

उन्होंने वैश्विक स्तर पर हो रहे संघर्षों और युद्धों पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि इनका मुख्य कारण स्वार्थ है। “युद्ध होते हैं, युद्ध क्यों हो रहे हैं, तो ये स्वार्थ है और कुछ नहीं,” भागवत ने कहा।

सनातन धर्म के उत्थान पर जोर

भागवत ने कहा कि सनातन धर्म का उत्थान केवल धार्मिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का भी संकेत है। उनके अनुसार, यह प्रक्रिया भारत को वैश्विक स्तर पर एक नई दिशा देने में सक्षम है।

वैचारिक संदेश

उनके इस बयान को एक व्यापक वैचारिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें भारत की भूमिका, वैश्विक परिस्थितियां और सांस्कृतिक मूल्यों पर जोर दिया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे वक्तव्यों का प्रभाव सामाजिक और राजनीतिक विमर्श पर भी पड़ता है, खासकर तब जब वैश्विक स्तर पर अस्थिरता और संघर्ष की स्थिति बनी हुई हो।

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