लोकसभा में उठा तेलंगाना के विश्वविद्यालयों का मुद्दा, कांग्रेस ने पूछा ग्लोबल एजुकेशन हब पर सवाल

लोकसभा में उठा तेलंगाना के विश्वविद्यालयों का मुद्दा, कांग्रेस ने पूछा ग्लोबल एजुकेशन हब पर सवाल

नई दिल्ली | विशेष रिपोर्ट

WhatsApp Image 2026-03-12 at 6.47.26 PM (1)
file_000000009a407207b6d77d3c5cd41ab0
WhatsApp Image 2026-06-26 at 00.16.05 (1)

लोकसभा में शिक्षा से जुड़ा एक अहम मुद्दा उठाया गया, जब कांग्रेस पार्टी की ओर से तेलंगाना के विश्वविद्यालयों को लेकर केंद्र सरकार से सवाल पूछा गया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद डॉ. मल्लू रवि ने शिक्षा मंत्री से यह जानना चाहा कि क्या तेलंगाना राज्य के किसी विश्वविद्यालय को ग्लोबल एजुकेशन हब के रूप में मान्यता देने के लिए चुना गया है या विचाराधीन है।

यह प्रश्न ऐसे समय में उठाया गया है जब भारत सरकार देश को वैश्विक शिक्षा केंद्र बनाने की दिशा में काम कर रही है और विभिन्न राज्यों के विश्वविद्यालयों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की योजनाएं तैयार की जा रही हैं।

लोकसभा में उठाया गया सवाल

लोकसभा में पूछे गए इस प्रश्न में विशेष रूप से तेलंगाना राज्य का उल्लेख किया गया। डॉ. मल्लू रवि ने सरकार से स्पष्ट जानकारी मांगी कि क्या राज्य के किसी विश्वविद्यालय को वैश्विक शिक्षा हब के रूप में विकसित करने की योजना के तहत शामिल किया गया है।

उन्होंने यह भी जानना चाहा कि यदि कोई विश्वविद्यालय इस प्रक्रिया में शामिल है, तो उसके चयन के लिए क्या मानदंड तय किए गए हैं और किस आधार पर उसे चुना गया है।

ग्लोबल एजुकेशन हब की अवधारणा

ग्लोबल एजुकेशन हब का मतलब ऐसे संस्थानों से है जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उच्च गुणवत्ता की शिक्षा प्रदान करते हैं और दुनिया भर के छात्रों को आकर्षित करने में सक्षम होते हैं।

भारत सरकार की नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत देश के कुछ चुनिंदा विश्वविद्यालयों को इस दिशा में विकसित करने की योजना है, ताकि भारत वैश्विक शिक्षा मानचित्र पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा सके।

तेलंगाना के विश्वविद्यालयों की स्थिति

तेलंगाना राज्य में कई प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय हैं, जो तकनीकी, प्रबंधन और शोध के क्षेत्र में अपनी पहचान बना चुके हैं। इनमें से कुछ संस्थान राष्ट्रीय स्तर पर पहले से ही उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं।

हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इन विश्वविद्यालयों में से किसी को ग्लोबल एजुकेशन हब के रूप में मान्यता देने के लिए चुना गया है या नहीं।

66071dc5-2d9e-4236-bea3-b3073018714b
hotal trinetra
gaytri hospital
WhatsApp Image 2026-05-10 at 2.46.41 PM (1)

कांग्रेस का रुख

कांग्रेस पार्टी का मानना है कि देश के सभी राज्यों को शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर मिलने चाहिए। पार्टी ने यह सवाल उठाकर यह जानने की कोशिश की है कि क्या तेलंगाना जैसे राज्यों को भी केंद्र सरकार की योजनाओं में उचित प्रतिनिधित्व मिल रहा है।

डॉ. मल्लू रवि ने कहा कि यदि राज्य के विश्वविद्यालयों को वैश्विक स्तर पर विकसित किया जाता है, तो इससे न केवल शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ेगी बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

सरकार की संभावित प्रतिक्रिया

हालांकि इस सवाल पर सरकार की ओर से विस्तृत जवाब का इंतजार है, लेकिन माना जा रहा है कि सरकार इस मुद्दे पर स्पष्ट नीति के साथ सामने आएगी।

सरकार पहले ही कई पहल कर चुकी है, जिनका उद्देश्य भारतीय विश्वविद्यालयों को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है।

नई शिक्षा नीति और अंतरराष्ट्रीय लक्ष्य

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत भारत को वैश्विक शिक्षा केंद्र बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके तहत विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में कैंपस खोलने की अनुमति देने और भारतीय संस्थानों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

इस नीति के तहत शोध, नवाचार और गुणवत्ता सुधार पर विशेष जोर दिया गया है।

छात्रों के लिए क्या होगा असर?

यदि तेलंगाना के किसी विश्वविद्यालय को ग्लोबल एजुकेशन हब के रूप में चुना जाता है, तो इसका सीधा लाभ छात्रों को मिलेगा। उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा अपने ही राज्य में उपलब्ध हो सकेगी।

इसके अलावा, विदेशी छात्रों के आने से सांस्कृतिक आदान-प्रदान भी बढ़ेगा और शिक्षा का स्तर और ऊंचा होगा।

लोकसभा में उठाया गया यह सवाल शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता और समान अवसरों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब सभी की नजरें सरकार के जवाब पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि तेलंगाना के विश्वविद्यालयों को इस महत्वाकांक्षी योजना में कितना स्थान मिलता है।

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत कैसे अपने शिक्षा क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाता है और विभिन्न राज्यों को इसमें किस प्रकार शामिल करता है।