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अम्बिकापुर: वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए देयक प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि निर्धारित

अम्बिकापुर: वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए देयक प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि निर्धारित, अधिकारियों को दिए गए निर्देश

अम्बिकापुर, 23 मार्च 2026: छत्तीसगढ़ शासन, वित्त विभाग मंत्रालय महानदी भवन, नवा रायपुर द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 के समापन को ध्यान में रखते हुए कोषालय एवं उप कोषालय में देयक प्रस्तुत करने की अंतिम तिथियां निर्धारित कर दी गई हैं। इस संबंध में जिले के वरिष्ठ कोषालय अधिकारी द्वारा सभी आहरण एवं संवितरण अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

देयक प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि तय

जारी निर्देशों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतर्गत बजटीय देयकों को कोषालय/उप कोषालय में प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 25 मार्च 2026 निर्धारित की गई है। वहीं, SNA SPARSH प्रणाली से संबंधित समस्त भुगतान के लिए देयक प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 26 मार्च 2026 तय की गई है।

अधिकारियों को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया गया है कि निर्धारित समयसीमा के भीतर सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ देयक प्रस्तुत करना सुनिश्चित करें, ताकि शासन द्वारा तय प्रक्रिया के अनुसार समय पर भुगतान किया जा सके।

निर्देशों के पालन पर विशेष जोर

वरिष्ठ कोषालय अधिकारी ने सभी आहरण एवं संवितरण अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा है कि वित्तीय वर्ष के अंत में कार्यों का दबाव बढ़ जाता है, ऐसे में समयसीमा का पालन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि केवल निर्धारित तिथियों तक प्राप्त होने वाले देयकों को ही स्वीकार किया जाएगा।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 25 मार्च 2026 तक केवल बजटीय देयक और 26 मार्च 2026 तक SNA SPARSH से संबंधित देयक ही कोषालय में स्वीकार किए जाएंगे। इसके बाद किसी भी प्रकार के देयक स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

कुछ देयकों पर नहीं होगा प्रतिबंध

शासन द्वारा जारी निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि कुछ विशेष श्रेणियों के देयकों पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा। इनमें भारत सरकार से प्राप्त राशि, राजभवन राज्यपाल से संबंधित देयक, विधानसभा सचिवालय एवं निवास कार्यालय के देयक, उच्च न्यायालय एवं अधीनस्थ न्यायालयों से संबंधित देयक तथा विधायकों के स्वत्वों से जुड़े देयक शामिल हैं।

इन श्रेणियों के देयकों को निर्धारित समयसीमा के अतिरिक्त भी स्वीकार किया जा सकेगा, जिससे संबंधित विभागों के कार्य प्रभावित न हों।

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वित्तीय अनुशासन बनाए रखने की पहल

विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की समयसीमा तय करने से वित्तीय अनुशासन बनाए रखने में मदद मिलती है। इससे न केवल समय पर भुगतान सुनिश्चित होता है, बल्कि सरकारी कार्यों में पारदर्शिता और दक्षता भी बढ़ती है।

वित्तीय वर्ष के अंतिम दिनों में अक्सर बड़ी संख्या में देयक प्रस्तुत किए जाते हैं, जिससे कार्यभार बढ़ जाता है। ऐसे में पहले से तय समयसीमा अधिकारियों को बेहतर योजना बनाने और कार्यों को व्यवस्थित ढंग से पूरा करने में सहायता करती है।

अधिकारियों को सतर्क रहने की सलाह

जिले के वरिष्ठ कोषालय अधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को सलाह दी है कि वे अंतिम तिथि का इंतजार न करें, बल्कि समय रहते अपने देयकों को तैयार कर प्रस्तुत करें। इससे किसी प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक समस्या से बचा जा सकेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि सभी विभाग यह सुनिश्चित करें कि उनके द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले देयक पूर्णतः सही और आवश्यक दस्तावेजों से युक्त हों, ताकि किसी भी प्रकार की त्रुटि के कारण भुगतान में देरी न हो।

SNA SPARSH प्रणाली का महत्व

SNA SPARSH प्रणाली के माध्यम से होने वाले भुगतान को भी इस बार अलग से प्राथमिकता दी गई है। इस प्रणाली के तहत होने वाले भुगतान के लिए 26 मार्च 2026 की अंतिम तिथि निर्धारित की गई है, जिससे संबंधित कार्यों को समय पर पूरा किया जा सके।

यह प्रणाली सरकारी वित्तीय प्रबंधन को अधिक पारदर्शी और डिजिटल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके माध्यम से भुगतान प्रक्रिया को सरल और तेज बनाया जा रहा है।

समयसीमा का पालन अनिवार्य

अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि शासन के निर्देशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करें। समयसीमा के बाद प्रस्तुत किए गए देयकों पर कोई विचार नहीं किया जाएगा, जिससे संबंधित विभागों को नुकसान हो सकता है।

इसलिए सभी विभागों को निर्देशित किया गया है कि वे निर्धारित तिथियों के भीतर अपने सभी वित्तीय कार्यों को पूर्ण कर लें और किसी भी प्रकार की लापरवाही से बचें।

छत्तीसगढ़ शासन द्वारा निर्धारित यह समयसीमा वित्तीय वर्ष 2025-26 के समापन को सुव्यवस्थित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल वित्तीय अनुशासन कायम रहेगा, बल्कि सरकारी कार्यों की गति और पारदर्शिता भी बढ़ेगी।

सभी संबंधित अधिकारियों और विभागों के लिए यह आवश्यक है कि वे इन निर्देशों का समय पर पालन करें और अपने कार्यों को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूर्ण करें।

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