LPG किल्लत ने देश को झकझोरा: मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में विपक्ष का मोदी सरकार के खिलाफ हल्ला बोल | प्रदेश खबर






LPG किल्लत और विपक्षी विरोध: विशेष रिपोर्ट – प्रदेश खबर

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राष्ट्रीय अपडेट | संसद विशेष

LPG संकट की आग में झुलसा देश: खड़गे के नेतृत्व में विपक्ष का ‘चूल्हा बंद’ विरोध, मोदी सरकार की विदेश नीति पर उठाए सवाल

संपादक: आशीष सिन्हा | 25 मार्च, 2026 | स्थान: नई दिल्ली (संसद परिसर)

देशभर में रसोई गैस (LPG) की भारी किल्लत ने आम जनता का जीना मुहाल कर दिया है। गैस सिलेंडर के लिए घंटों लंबी कतारों और घरों में जलते ठंडे चूल्हों के बीच, आज विपक्ष ने संसद परिसर में एकजुट होकर मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

नई दिल्ली: भारत में वर्तमान समय में गहराते ऊर्जा संकट, विशेष रूप से तरल पेट्रोलियम गैस (LPG) की भारी किल्लत ने देश की आर्थिक और सामाजिक स्थिति को हिलाकर रख दिया है। आज राजधानी दिल्ली में संसद परिसर के बाहर विपक्षी सांसदों ने कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में सरकार के खिलाफ जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया। विपक्ष का सीधा आरोप है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की “कायराना विदेश नीति” के चलते आज देश की ऊर्जा सुरक्षा खतरे में पड़ गई है।

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“एलपीजी की किल्लत ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। घरों में चूल्हे नहीं जल रहे, दुकानें बंद हैं और कामगार सब कुछ छोड़कर गांवों की ओर लौटने को मजबूर हैं। यह नरेंद्र मोदी की विफल विदेश नीति का कड़वा नतीजा है जिसका भुगतान गरीब जनता कर रही है।”

— मल्लिकार्जुन खड़गे, कांग्रेस अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष

विदेश नीति की विफलता और ऊर्जा संकट का अंतर्संबंध

विपक्षी सांसदों ने हाथों में खाली सिलेंडर और तख्तियां लेकर सरकार विरोधी नारे लगाए। प्रदर्शन के दौरान सांसदों ने तर्क दिया कि सरकार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करने में विफल रही है। विपक्ष के अनुसार, भारत की बदलती कूटनीति और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) प्रबंधन में आई खामियों ने घरेलू बाजार में गैस की किल्लत पैदा कर दी है।

खड़गे ने जोर देकर कहा कि आज लोग एलपीजी के लिए घंटों लाइनों में लगे हैं, लेकिन सरकार के पास कोई ठोस समाधान नहीं है। यह संकट केवल शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण अंचलों में भी इसने हाहाकार मचा दिया है। छोटे उद्योगों और रेस्तरां चलाने वाले कामगारों का रोजगार छिन रहा है, जिससे बड़े पैमाने पर पलायन की स्थिति पैदा हो गई है।

LPG संकट के 3 प्रमुख प्रभाव:

  • घरेलू संकट: मध्यम और निम्न आय वर्ग के घरों में भोजन पकाने की व्यवस्था ठप हो गई है।
  • आर्थिक पलायन: गैस पर निर्भर छोटे व्यवसायों के बंद होने से कामगार वापस अपने गांव लौट रहे हैं।
  • महंगाई की मार: आपूर्ति कम होने से कालेबाजारी बढ़ रही है और गैस की कीमतें आसमान छू रही हैं।

विपक्ष की मांग: तुरंत बहाल हो आपूर्ति

प्रदर्शन में कांग्रेस के साथ-साथ अन्य विपक्षी दलों के सांसदों ने भी हिस्सा लिया। उन्होंने मांग की कि सरकार अपनी विदेश नीति की गलतियों को स्वीकार करे और उन देशों के साथ बातचीत तेज करे जिनसे भारत को गैस की आपूर्ति होती है। विपक्ष का कहना है कि सरकार को अपनी “इमेज बिल्डिंग” (Image Building) के बजाय जनता की बुनियादी जरूरतों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

निष्कर्ष: क्या जागेगी सरकार?

संसद में आज का विरोध प्रदर्शन केवल प्रतीकात्मक नहीं था, बल्कि यह देश के हर उस नागरिक की आवाज थी जो वर्तमान में ईंधन संकट से जूझ रहा है। अब देखना यह है कि संसद परिसर में गूंजी विपक्ष की यह आवाज क्या मोदी सरकार को कोई सख्त कदम उठाने पर मजबूर कर पाती है या फिर जनता को अभी और लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ेगा।