सांसदों को मिले 20 करोड़! राज्यसभा में प्रमोद तिवारी ने उठाई MPLAD फंड बढ़ाने और GST हटाने की मांग | प्रदेश खबर






MPLAD फंड में बढ़ोतरी की मांग: विशेष रिपोर्ट

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संसद समाचार | राज्यसभा विशेष

विकास के लिए 5 करोड़ नाकाफी: प्रमोद तिवारी ने की MPLAD फंड बढ़ाकर 20 करोड़ करने की मांग

संपादक: आशीष सिन्हा | 25 मार्च, 2026 | स्थान: नई दिल्ली

राज्यसभा में कांग्रेस के उपनेता प्रमोद तिवारी ने ‘संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना’ (MPLAD) के तहत मिलने वाली राशि को 5 करोड़ से बढ़ाकर 20 करोड़ रुपए करने की पुरजोर मांग उठाई है। उन्होंने विकास कार्यों पर लगने वाले GST को लेकर भी सरकार को घेरा।

नई दिल्ली: देश के विभिन्न संसदीय क्षेत्रों में विकास की गति को तेज करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाने वाली ‘संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना’ (MPLAD) को लेकर राज्यसभा में एक बड़ी चर्चा शुरू हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा में उपनेता प्रमोद तिवारी ने सदन में इस फंड की वर्तमान स्थिति पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों की बढ़ती लागत और संसदीय क्षेत्रों की बढ़ती आबादी को देखते हुए वर्तमान वार्षिक आवंटन पूरी तरह अपर्याप्त है।

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“संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना विकास के सबसे असरदार साधनों में से एक है। वर्तमान में सांसदों को सालाना 5 करोड़ रुपए आवंटित किए जाते हैं, जिसमें पिछले कई सालों से कोई वृद्धि नहीं हुई है। मेरी मांग है कि इस राशि को बढ़ाकर 20 करोड़ रुपए किया जाए और इसे GST से मुक्त किया जाए।”

— प्रमोद तिवारी, उपनेता कांग्रेस (राज्यसभा)

MPLAD फंड और GST का गणित

प्रमोद तिवारी ने सदन के सामने एक चौंकाने वाला आंकड़ा रखा। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत होने वाले काम GST के दायरे में आते हैं। 5 करोड़ रुपए के वार्षिक आवंटन में से GST कटने के बाद केवल **4 करोड़ 10 लाख रुपए** ही धरातल पर विकास कार्यों के लिए बच पाते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि जब विकास कार्यों की लागत कई गुना बढ़ गई है, तो इतने कम बजट में बड़े संसदीय क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा करना संभव नहीं है।

MPLAD फंड की वर्तमान स्थिति: एक नज़र में

  • सालाना आवंटन: 5 करोड़ रुपए
  • GST कटौती के बाद शेष: लगभग 4 करोड़ 10 लाख रुपए
  • प्रस्तावित मांग: 20 करोड़ रुपए प्रति वर्ष
  • मुख्य लक्ष्य: ग्रामीण सड़क, पेयजल, स्कूल और सामुदायिक भवन का विकास

क्षेत्रीय विकास पर बढ़ता दबाव

प्रमोद तिवारी ने कहा कि सांसद अपने निर्वाचन क्षेत्र की जमीनी जरूरतों को सीधे तौर पर पूरा करते हैं। निर्वाचन क्षेत्रों की आबादी अब कई गुना बढ़ चुकी है, जिससे बुनियादी ढांचे की मांग भी बढ़ी है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि विकास की सुस्त पड़ती रफ्तार को गति देने के लिए फंड की राशि में तत्काल वृद्धि की जाए और इसे कर-मुक्त (GST Free) श्रेणी में रखा जाए ताकि जनता के पैसे का पूरा उपयोग जनता के लिए ही हो सके।

क्या सरकार बढ़ाएगी सांसदों का बजट?

प्रमोद तिवारी के इस प्रस्ताव का कई अन्य विपक्षी सांसदों ने भी समर्थन किया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि केंद्र सरकार विकास के इस ‘असरदार साधन’ को मजबूती देने के लिए क्या बजट में कोई बदलाव करती है या नहीं। यह मुद्दा सीधे तौर पर देश के हर संसदीय क्षेत्र के स्थानीय विकास से जुड़ा हुआ है।