Advertisement

ग्रेट निकोबार के आदिवासियों का दर्द: राहुल गांधी से मिले द्वीप समूह के नेता, 800 परिवारों के विस्थापन और ‘अडानी-अंबानी’ के लाभ का मुद्दा गरमाया | प्रदेश खबर






ग्रेट निकोबार आदिवासी विस्थापन रिपोर्ट – प्रदेश खबर


PRADESH KHABAR NEWS NETWORK

राष्ट्रीय विशेष | आदिवासी अधिकार

‘हमारी जमीन और पहचान पर खतरा’: राहुल गांधी से मिले ग्रेट निकोबार के आदिवासी नेता, विकास के नाम पर विनाश का लगाया आरोप

ग्रेट निकोबार द्वीप समूह के आदिवासी नेताओं और ‘आदिवासी कांग्रेस’ के एक प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की। उन्होंने ‘ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट’ के कारण 800 से अधिक परिवारों के विस्थापन और पारिस्थितिकी तंत्र के विनाश पर गहरी चिंता व्यक्त की।

नई दिल्ली: भारत के सुदूर दक्षिण में स्थित रणनीतिक और पारिस्थितिक रूप से महत्वपूर्ण ‘ग्रेट निकोबार द्वीप समूह’ के आदिवासियों की आवाज आज देश की राजधानी में गूंजी। आदिवासी नेताओं के एक दल ने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोक सभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात कर उन्हें द्वीप पर चल रही परियोजनाओं के चलते पैदा हुए अस्तित्व के संकट से अवगत कराया। प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि ‘ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट’ के नाम पर स्थानीय समुदायों को उनके पुश्तैनी जल, जंगल और जमीन से बेदखल किया जा रहा है।

file_0000000093d882119d122d54d9d757b5

“आज हमें हाशिए पर धकेला जा रहा है, ताकि अडानी और अंबानी जैसे चुनिंदा अरबपति व्यापारियों को फायदा पहुँचाया जा सके। पीढ़ियों से प्रकृति के साथ सद्भाव में रहने वाले हमारे समुदायों की भूमि और पारिस्थितिकी तंत्र अब खतरे में है।”

— प्रतिनिधिमंडल का राहुल गांधी से संवाद

800 परिवारों के विस्थापन की तलवार

प्रतिनिधिमंडल ने राहुल गांधी को बताया कि इस विवादास्पद प्रोजेक्ट के कारण 800 से अधिक परिवारों की जमीन छीनी जा रही है। इसमें विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTGs) भी शामिल हैं, जो सदियों से इस नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षक रहे हैं। नेताओं ने कहा कि यह केवल जमीन का मुद्दा नहीं है, बल्कि उनकी संस्कृति और पहचान को मिटाने की कोशिश है।

आदिवासियों की प्रमुख चिंताएं:

  • अस्तित्व का संकट: 800 से अधिक परिवारों का अपनी पुश्तैनी जमीन से विस्थापन।
  • बुनियादी सुविधाओं का अभाव: सड़क, स्वच्छ पेयजल, शिक्षा और रोजगार के अवसरों की भारी कमी।
  • पर्यावरण विनाश: द्वीप के नाजुक ईको-सिस्टम और जैव विविधता पर गंभीर खतरा।
  • कॉर्पोरेट लाभ: विकास के नाम पर बड़े व्यापारियों के हितों को प्राथमिकता देना।

राहुल गांधी का आश्वासन

राहुल गांधी ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को ध्यानपूर्वक सुना और उनके संघर्ष के प्रति एकजुटता जताई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी जल, जंगल और जमीन पर आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। राहुल गांधी ने जोर देकर कहा कि किसी भी ‘विकास’ की कीमत वहां के मूल निवासियों के विनाश और पर्यावरण की तबाही नहीं होनी चाहिए।

निष्कर्ष: विकास बनाम विनाश की बहस

ग्रेट निकोबार में चल रहे इस प्रोजेक्ट ने एक बार फिर विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच के संतुलन पर बहस छेड़ दी है। प्रतिनिधिमंडल ने अपनी दैनिक कठिनाइयों, जैसे सड़कों की बदहाली और शिक्षा के गिरते स्तर पर भी चर्चा की। अब देखना यह है कि विपक्ष के इस हस्तक्षेप के बाद केंद्र सरकार इस परियोजना को लेकर स्थानीय समुदायों की चिंताओं पर क्या रुख अपनाती है।


ChatGPT Image Jul 20, 2026, 05_14_44 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 05_53_50 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 06_08_26 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 06_16_13 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 06_22_41 PM
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.12.06
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.16.05