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भारत को चाहिए अपना ‘स्वदेशी सर्च इंजन’: राज्यसभा में नीरज डांगी ने डिजिटल संप्रभुता और डेटा सुरक्षा पर सरकार को घेरा | प्रदेश खबर

 

 

PRADESH KHABAR NEWS NETWORK

तकनीकी विशेष | राष्ट्रीय सुरक्षा

गूगल-यूट्यूब पर निर्भरता खतरनाक: राज्यसभा में गूंजी ‘इंडियन सर्च इंजन’ की मांग, नीरज डांगी ने सरकार को चेताया

 

भारत की डिजिटल संप्रभुता को लेकर राज्यसभा में एक बड़ी बहस छिड़ गई है। कांग्रेस सांसद नीरज डांगी ने सरकार से तत्काल ‘स्वदेशी सर्च इंजन’ विकसित करने का आग्रह किया है, ताकि 140 करोड़ भारतीयों का डेटा विदेशी कंपनियों के हाथों में जाने से बचाया जा सके।

नई दिल्ली: डिजिटल युग में डेटा को ‘नया तेल’ (New Oil) कहा जाता है, लेकिन भारत इस मामले में अभी भी विदेशी प्लेटफार्मों पर निर्भर है। राज्यसभा के बजट सत्र के दौरान कांग्रेस सांसद नीरज डांगी ने भारत की डिजिटल सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने तर्क दिया कि चीन, रूस, फ्रांस और वियतनाम जैसे देशों के पास अपने स्वदेशी सर्च इंजन हैं, लेकिन भारत अभी भी गूगल और जीमेल जैसे विदेशी सेवाओं के भरोसे है, जो गोपनीयता और साइबर सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है।

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“हमारी डिजिटल संप्रभुता को मजबूत करने के लिए भारत को एक स्वदेशी सर्च इंजन विकसित करने की दिशा में तत्काल कदम उठाना चाहिए। 140 करोड़ भारतीयों का अधिकांश डेटा विदेशी कंपनियों द्वारा संग्रहित और विश्लेषित हो रहा है, जो चिंताजनक है।”

— नीरज डांगी, सांसद (राज्यसभा)

विदेशी प्लेटफार्मों पर निर्भरता: एक संभावित खतरा

सांसद डांगी ने एक भविष्य की कड़वी सच्चाई की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि भविष्य में यदि भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ता है, तो गूगल, यूट्यूब और जीमेल जैसी सेवाएं बंद हो सकती हैं। ऐसी स्थिति में भारत का डिजिटल ढांचा पूरी तरह चरमरा सकता है। उन्होंने जोर दिया कि राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से खुद का तकनीकी इकोसिस्टम होना अनिवार्य है।

सांसद नीरज डांगी की सरकार से 2 प्रमुख मांगें:

  • स्वदेशी इंजन की शुरुआत: केंद्र सरकार ‘इंडियन सर्च इंजन’ प्रोजेक्ट को मिशन मोड में शुरू करे।
  • सरकारी सेवाओं में अनिवार्य: सभी सरकारी कार्यालयों और सेवाओं में स्वदेशी सर्च इंजन और ईमेल सेवाओं को लागू किया जाए।

दुनिया के अन्य देशों का उदाहरण

राज्यसभा में अपनी बात रखते हुए डांगी ने उदाहरण दिया कि दक्षिण कोरिया (Naver), रूस (Yandex), और चीन (Baidu) ने अपने स्वदेशी सर्च इंजन विकसित कर न केवल अपनी डिजिटल संप्रभुता को मजबूत किया है, बल्कि अपने नागरिकों के डेटा को भी सुरक्षित रखा है। भारत, जो खुद को तकनीकी महाशक्ति कहता है, उसके पास अब तक इस दिशा में कोई ठोस विकल्प नहीं होना एक बड़ी कमी है।

निष्कर्ष: डिजिटल आत्मनिर्भरता की ओर कदम

नीरज डांगी की इस मांग ने डेटा प्राइवेसी और नेशनल सिक्योरिटी की एक नई बहस छेड़ दी है। यदि भारत अपना सर्च इंजन विकसित करता है, तो यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में सबसे बड़ा मील का पत्थर साबित होगा। अब देखना यह है कि क्या केंद्र सरकार तकनीकी संप्रभुता के इस मुद्दे पर कोई ठोस नीतिगत फैसला लेती है।

 

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