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सोलर सेक्टर में विदेशी निर्भरता और महाराष्ट्र पर संकट: वर्षा गायकवाड़ ने लोकसभा में सरकार से मांगे आंकड़े | प्रदेश खबर






सोलर सेक्टर और महाराष्ट्र का मैन्युफैक्चरिंग संकट: विशेष रिपोर्ट


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सोलर सेक्टर पर विदेशी निर्भरता की मार: वर्षा गायकवाड़ ने लोकसभा में उठाए महाराष्ट्र के मैन्युफैक्चरिंग संकट पर सवाल

संपादक: आशीष सिन्हा | 25 मार्च, 2026 | स्थान: नई दिल्ली

लोकसभा में आज भारत के सोलर सेक्टर में सप्लाई चेन की बाधाओं और विदेशी निर्भरता का मुद्दा गूंजा। कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड़ ने विशेष रूप से महाराष्ट्र के इंडस्ट्रियल क्लस्टरों को होने वाले नुकसान पर सरकार से जवाब मांगा।

नई दिल्ली: भारत को रिन्यूएबल एनर्जी (नवीकरणीय ऊर्जा) का हब बनाने के सरकार के दावों के बीच, लोकसभा में सोलर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की कड़वी सच्चाई सामने आई। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और मुंबई उत्तर-मध्य से सांसद वर्षा गायकवाड़ ने सदन को बताया कि कैसे भारत का सोलर सेक्टर विदेशी बाजारों और ग्लोबल ट्रेड समस्याओं के कारण गहरे संकट में है।

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“भारत में सोलर मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन का संकट आया है क्योंकि हमारा देश पूरी तरह विदेशों पर निर्भर है। अमेरिका द्वारा लगाई गई ड्यूटी और टैरिफ ने भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को कमजोर कर दिया है, जिसका सीधा असर महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।”

— वर्षा गायकवाड़, सांसद (लोकसभा)

ग्लोबल ट्रेड वार और भारत का नुकसान

सांसद गायकवाड़ ने तर्क दिया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे ट्रेड वार, विशेष रूप से अमेरिका द्वारा लगाए गए कड़े टैरिफ और ड्यूटी के कारण भारतीय मैन्युफैक्चरर्स को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बने रहने में कठिनाई हो रही है। उन्होंने चिंता जताई कि ‘मेक इन इंडिया’ के लक्ष्यों के बावजूद, सोलर पैनलों और आवश्यक कलपुर्जों के लिए भारत की आयात पर निर्भरता कम नहीं हुई है, जिससे स्थानीय उद्योग संकट में हैं।

वर्षा गायकवाड़ के सरकार से तीखे सवाल:

  • महाराष्ट्र का डेटा: क्या सरकार के पास कोई पुख्ता आंकड़ा है कि ग्लोबल ट्रेड समस्याओं से महाराष्ट्र के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर क्या प्रभाव पड़ा है?
  • मुंबई के लिए राहत: क्या सरकार मुंबई और उसके आसपास के इंडस्ट्रियल क्लस्टरों को इस संकट से उबारने के लिए किसी विशेष आर्थिक राहत पैकेज पर विचार कर रही है?

मुंबई और महाराष्ट्र के इंडस्ट्रियल क्लस्टर खतरे में

वर्षा गायकवाड़ ने विशेष रूप से मुंबई के औद्योगिक क्षेत्रों की ओर ध्यान आकर्षित किया, जो महाराष्ट्र के मैन्युफैक्चरिंग का केंद्र रहे हैं। उन्होंने मांग की कि सरकार को इन क्लस्टरों को विशेष राहत देनी चाहिए ताकि वे विदेशी झटकों को सह सकें और सौर ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकें। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो हजारों नौकरियां और निवेश खतरे में पड़ सकते हैं।

निष्कर्ष: क्या मिलेगी राहत?

सोलर सेक्टर में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते भारत के लिए वर्षा गायकवाड़ के सवाल एक रियलिटी चेक की तरह हैं। अब देखना यह है कि क्या केंद्र सरकार महाराष्ट्र के उद्योगों को विशेष प्रोत्साहन देती है या फिर ‘विदेशी निर्भरता’ का यह सिलसिला ऐसे ही चलता रहता है।


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