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पैकेट के सामने लिखो ‘सच’! राज्यसभा में रंजीत रंजन ने उठाई खाने के सामान पर ‘लाल-पीला-हरा’ चेतावनी की मांग | प्रदेश खबर






खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य संकट: विशेष रिपोर्ट – प्रदेश खबर


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मधुमेह और मोटापे का काल बनेगा ‘लाल-पीला-हरा’ निशान! राज्यसभा में रंजीत रंजन ने पैकेज्ड फूड पर पारदर्शिता की मांग की

देश में बढ़ते स्वास्थ्य संकट के बीच, राज्यसभा में आज खाने-पीने की चीजों की पारदर्शिता का मुद्दा गूंजा। सांसद रंजीत रंजन ने पैकेज्ड फूड कंपनियों की जवाबदेही तय करने और पैकेट के सामने स्पष्ट चेतावनी लिखने की जोरदार वकालत की।

नई दिल्ली: भारत आज एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती के मुहाने पर खड़ा है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के चौंकाने वाले आंकड़े बताते हैं कि देश में करीब 10 करोड़ लोग मधुमेह (Diabetes) से पीड़ित हैं। वहीं, नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS) के अनुसार, हर चौथा वयस्क मोटापे का शिकार है। इस बिगड़ते स्वास्थ्य परिदृश्य के बीच राज्यसभा सांसद रंजीत रंजन ने सदन में एक क्रांतिकारी मांग रखी है—’पैकेट के सामने पोषक तत्वों का स्पष्ट विवरण’ (Front of Pack Labeling)।

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“खाद्य पदार्थों पर जानकारी तो दी जाती है, लेकिन वो पैकेट के पीछे बहुत छोटे अक्षरों और जटिल भाषा में होती है। यदि पैकेट के सामने ही लाल-पीला-हरा रंग ये बता दे कि इसमें कौन सा तत्व अधिक या कम है, तो कोई भी आम नागरिक आसानी से समझ सकता है कि उसे क्या खाना चाहिए।”

— रंजीत रंजन, सांसद (राज्यसभा)

जटिल भाषा और छोटे अक्षरों का खेल खत्म करने की मांग

रंजीत रंजन ने तर्क दिया कि वर्तमान में कंपनियां पोषण संबंधी जानकारी को पैकेट के पीछे छिपाकर रखती हैं, जिससे आम उपभोक्ता भ्रमित रहता है। उन्होंने सरकार से मांग की कि ‘कलर कोटेड चेतावनी प्रणाली’ को अनिवार्य किया जाए, ताकि उपभोक्ता उत्पाद देखते ही समझ सके कि उसमें चीनी, नमक या वसा की मात्रा कितनी है।

कैसी होगी यह प्रणाली?

  • लाल रंग: मतलब उच्च मात्रा (खतरा)—चीनी या नमक का स्तर अधिक है।
  • पीला रंग: मतलब मध्यम मात्रा—सावधानी बरतें।
  • हरा रंग: मतलब सुरक्षित/स्वस्थ—पोषक तत्वों का संतुलन सही है।

सरकार से 3 प्रमुख मांगें:

सांसद रंजीत रंजन ने सदन के माध्यम से सरकार के सामने स्पष्ट प्रस्ताव रखा है:

  • प्रभावी नीति: पैकेज्ड फूड के लिए एक सख्त और पारदर्शी नीति की आवश्यकता।
  • स्पष्टता: पैकेट के सामने (Front side) बड़े और पढ़ने योग्य अक्षरों में जानकारी हो।
  • चेतावनी प्रणाली: खाने के पैकेट पर रंगों के जरिए चेतावनी का निशान अनिवार्य हो।

निष्कर्ष: जन स्वास्थ्य के लिए बड़ा कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस प्रणाली को लागू किया जाता है, तो न केवल खाद्य कंपनियों की जवाबदेही सुनिश्चित होगी, बल्कि लोगों की जीवनशैली और स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। अब देखना यह है कि क्या खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) और केंद्र सरकार इस दिशा में कोई ठोस कानून लाती है।


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