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कुदुरगढ़ महोत्सव 2026: सांस्कृतिक और सामाजिक चेतना का महाकुंभ






कुदुरगढ़ महोत्सव 2026: सांस्कृतिक और सामाजिक चेतना का महाकुंभ – प्रदेश खबर


PRADESH KHABAR NEWS NETWORK

विशेष ग्राउंड रिपोर्ट | सूरजपुर महोत्सव 2026

कुदुरगढ़ महोत्सव 2026: भक्ति, शक्ति और संस्कृति का त्रिवेणी संगम; शर्ली सेटिया के सुरों और खिलाड़ियों के नशामुक्ति संकल्प के साथ संपन्न

मुख्य रिपोर्टर: आशीष सिन्हा
25 मार्च, 2026 | स्थान: सूरजपुर (छत्तीसगढ़)

1. सांस्कृतिक संध्या: जब बॉलीवुड और लोककला का मिलन हुआ

कुदुरगढ़ महोत्सव का समापन दिवस सांस्कृतिक मंच की भव्यता के लिए याद किया जाएगा। कार्यक्रम का आगाज़ पारंपरिक करमा नृत्य और स्थानीय स्कूली छात्र-छात्राओं की मनमोहक प्रस्तुतियों से हुआ। अंचल की माटी की खुशबू बिखेरते हुए इन नन्हे कलाकारों ने दर्शकों को शुरुआत से ही बांधे रखा। इसके बाद अनमोल किरण लोक कलामंच की किरण कुशवाहा ने भक्तिमय भजनों की ऐसी अविरल धारा प्रवाहित की कि पूरा परिसर आस्था के सागर में डूब गया।

सरगुजा के चर्चित लोकगायक सुनील मानिकपुरी ने जैसे ही मंच संभाला, दर्शकों का उत्साह सातवें आसमान पर पहुँच गया। उनके क्षेत्रीय गीतों ने लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया। लेकिन रात का सबसे बड़ा आकर्षण बनीं बॉलीवुड स्टार शर्ली सेटिया (Shirley Setia)। शर्ली ने अपने लोकप्रिय गीतों की झड़ी लगा दी और केवल अपनी आवाज़ ही नहीं, बल्कि अपनी सादगी और संगीत यात्रा की कहानियों से हज़ारों दिलों को जीत लिया। देर रात तक गूंजती तालियों की गड़गड़ाहट इस बात का प्रमाण थी कि महोत्सव ने सफलता के नए आयाम छुए हैं।

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2. खेल का मैदान और नशामुक्ति का संदेश

कुदुरगढ़ महोत्सव में इस बार खेल के साथ-साथ एक अनूठा नवाचार ‘सेल्फी ज़ोन’ के रूप में देखा गया। खेल मैदान के केंद्र में स्थापित यह सेल्फी ज़ोन खिलाड़ियों और दर्शकों के लिए आकर्षण का सबसे बड़ा केंद्र रहा। यहाँ एक नई परंपरा शुरू हुई—प्रत्येक मैच से पहले टीमें यहाँ आकर “नशामुक्ति” की तख्ती थामकर फोटो खिंचवाती थीं।

खिलाड़ियों का यह संदेश कि “खेल ही जीवन है और नशा बर्बादी”, हज़ारों दर्शकों तक पहुँचा। खिलाड़ियों के साथ-साथ आम जनता और परिवारों ने भी इस सेल्फी ज़ोन में अपनी यादें संजोईं। यह पहल दर्शाती है कि शासन-प्रशासन खेलों के माध्यम से युवाओं को एक सकारात्मक दिशा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े का संबोधन: “हमारी आस्था ही हमारी पूँजी”

महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करते हुए महोत्सव की गरिमा बढ़ाई। उन्होंने अपने संबोधन में कहा, “यह महोत्सव माँ कुदुरगढ़ी की असीम अनुकंपा का फल है। हमारी पारंपरिक कलाएँ और देवी-देवताओं में हमारी अटूट श्रद्धा ही छत्तीसगढ़ की असली पूँजी है। सरगुजा अंचल की इस समृद्ध विरासत को वैश्विक पहचान दिलाना हमारी सरकार की प्राथमिकता है।”

3. खेल स्पर्धाएँ: अंतर्राष्ट्रीय पहलवानों का जमावड़ा

कुदुरगढ़ महोत्सव में खेल प्रतिस्पर्धाओं ने दर्शकों के रोमांच को चरम पर पहुँचा दिया। मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने खुद अखिल भारतीय कुश्ती प्रतियोगिता, जिला स्तरीय वॉलीबाल और कबड्डी मैचों का आनंद लिया।

कुश्ती प्रतियोगिता: हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, और उत्तर प्रदेश के दिग्गज पहलवानों के बीच कड़ा मुकाबला।
अंतर्राष्ट्रीय तड़का: नेपाल के प्रसिद्ध ‘थापा पहलवान’ ने अपनी कला का प्रदर्शन कर आयोजन को अंतर्राष्ट्रीय स्वरूप दिया।
स्थानीय प्रतिभा: वॉलीबाल और कबड्डी में स्थानीय ग्रामीण युवाओं ने अपने कौशल से सबको प्रभावित किया।

4. प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति

महोत्सव की सफलता में जिला प्रशासन की सूक्ष्म योजना और जनप्रतिनिधियों के सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस अवसर पर वन विकास निगम एवं कुदुरगढ़ ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री रामसेवक पैकरा, पाठ्य पुस्तक निगम के पूर्व अध्यक्ष श्री भीमसेन अग्रवाल, और कुदुरगढ़ ट्रस्ट के सदस्यों सहित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

समापन संध्या में उपस्थित हज़ारों की भीड़ ने यह साबित कर दिया कि कुदुरगढ़ महोत्सव अब केवल एक स्थानीय मेला नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान का एक विशाल स्तंभ बन चुका है। भक्ति, संगीत, खेल और सामाजिक संदेश के इस मेल ने 2026 के इस महोत्सव को अविस्मरणीय बना दिया है।


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