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नारीशक्ति वंदन अधिनियम: पीएम मोदी की भावुक अपील और संसद का ऐतिहासिक दिन


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नारीशक्ति वंदन अधिनियम: “अपनी अंतरात्मा की सुनें सांसद, आज इतिहास रचने का समय” – प्रधानमंत्री मोदी की भावुक अपील

प्रकाशित: 17 अप्रैल, 2026 | स्थान: नई दिल्ली ब्यूरो | अपडेटेड: 2:45 PM

ई दिल्ली। भारतीय संसदीय इतिहास में आज का दिन स्वर्ण अक्षरों में लिखा जा सकता है। लोकसभा में ‘नारीशक्ति वंदन अधिनियम’ (महिला आरक्षण विधेयक) पर मतदान से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक के बाद एक कई भावुक और तर्कपूर्ण संदेश जारी किए हैं। प्रधानमंत्री ने सभी राजनीतिक दलों के सांसदों से अपनी दलगत राजनीति से ऊपर उठकर अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनने और करोड़ों महिलाओं के हक में मतदान करने का आह्वान किया है।

“आप अपने घर में मां-बहन-बेटी-पत्नी सबका स्मरण करते हुए अपनी अंतरात्मा को सुनिए… देश की नारीशक्ति की सेवा का, उनके वंदन का ये बहुत बड़ा अवसर है। उन्हें नए अवसरों से वंचित नहीं करिए।” – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

संसद में चर्चा का लंबा दौर: रात 1 बजे तक चला मंथन

प्रधानमंत्री ने जानकारी दी कि इस विधेयक पर चर्चा के लिए संसद में अभूतपूर्व उत्साह देखा गया। कल रात एक बजे तक सांसदों ने अपनी बातें रखीं। सरकार का दावा है कि चर्चा के दौरान विपक्ष द्वारा उठाए गए सभी भ्रमों और आशंकाओं का तार्किक जवाब दिया गया है।

प्रधानमंत्री ने कहा, “जो भ्रम फैलाए गए, उनको दूर करने के लिए तर्कबद्ध जवाब दिया गया है। हर आशंका का समाधान किया गया है। जिन जानकारियों का अभाव था, वो जानकारियां भी हर सदस्य को दी गई हैं। किसी के मन में विरोध का जो कोई भी विषय था, उसका भी समाधान हुआ है।”

मुख्य बिंदु: पिछले 4 दशकों से लंबित महिला आरक्षण के मुद्दे पर अब निर्णायक मोड़ आ गया है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि “अब समय है कि देश की आधी आबादी को उसके अधिकार अवश्य मिलें।”

चार दशकों का लंबा इंतजार और राजनीति

महिला आरक्षण विधेयक का इतिहास काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। 1996 में देवगौड़ा सरकार के समय पहली बार इसे पेश किया गया था, लेकिन आम सहमति के अभाव और भारी हंगामे के कारण यह बार-बार टलता रहा। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में इसी दर्द को बयां करते हुए कहा कि “महिला आरक्षण के इस विषय पर देश में चार दशक तक बहुत राजनीति कर ली गई है। आजादी के इतने दशकों बाद भी भारत की महिलाओं का निर्णय प्रक्रिया में इतना कम प्रतिनिधित्व रहे, ये ठीक नहीं।”

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विधेयक की प्रमुख विशेषताएं:

  • लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान।
  • निर्णय लेने वाली संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करना।
  • एससी/एसटी महिलाओं के लिए इसी 33% के भीतर कोटा का प्रावधान।
  • लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करते हुए आधी आबादी को सशक्त बनाना।

राजनीतिक दलों से अपील: “मतभेद भुलाकर साथ आएं”

प्रधानमंत्री ने सभी विपक्षी दलों से अपील करते हुए कहा कि वे पूरी संवेदनशीलता से निर्णय लें। उन्होंने सांसदों को याद दिलाया कि देश की करोड़ों महिलाओं की दृष्टि इस समय संसद पर टिकी है। पीएम ने कहा, “मैं देश की नारी शक्ति की तरफ से भी सभी सदस्यों से प्रार्थना करूंगा… कुछ भी ऐसा ना करें, जिनसे नारीशक्ति की भावनाएं आहत हों। हमारी नीयत और हमारे निर्णय पर देश की नजर है।”

पहलु महत्व प्रभाव
सामाजिक न्याय उच्चतम महिलाओं को नीति निर्माण में सीधी भूमिका मिलेगी।
लोकतांत्रिक सशक्तिकरण अति-आवश्यक संसद में आधी आबादी का उचित प्रतिनिधित्व।
वैश्विक छवि सकारात्मक भारत दुनिया के उन देशों की श्रेणी में शामिल होगा जहां महिला नेतृत्व को संवैधानिक संरक्षण है।

“इतिहास रचने का अवसर”

प्रधानमंत्री ने अपने दूसरे ट्वीट में सांसदों से सीधा संवाद करते हुए कहा कि यह संशोधन यदि सर्वसम्मति से पारित होता है, तो इससे देश का लोकतंत्र और अधिक सशक्त होगा। उन्होंने इसे ‘नारी वंदन’ का एक बड़ा अवसर करार दिया। उन्होंने सांसदों को प्रेरित करते हुए लिखा, “आइए… हम मिलकर आज इतिहास रचें। भारत की नारी को… देश की आधी आबादी को उसका हक दें।”

संसद का समीकरण और मतदान की उम्मीद

संसदीय सूत्रों के अनुसार, अब से कुछ ही देर में वोटिंग की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। सरकार को भरोसा है कि प्रधानमंत्री की इस अपील के बाद और कल रात चली गहन चर्चा के उपरांत, यह विधेयक भारी बहुमत या शायद सर्वसम्मति से पारित हो जाएगा। यदि ऐसा होता है, तो यह 2026 की सबसे बड़ी विधायी उपलब्धि मानी जाएगी।

विशेष टिप्पणी: नारीशक्ति वंदन अधिनियम केवल एक संवैधानिक संशोधन नहीं है, बल्कि यह बदलते भारत की उस सोच का प्रतीक है जहां विकास के हर पायदान पर महिलाओं की बराबरी की हिस्सेदारी सुनिश्चित की जा रही है।

विपक्ष के कुछ सदस्यों ने ओबीसी आरक्षण की मांग को लेकर संशोधन प्रस्ताव पेश किए थे, लेकिन प्रधानमंत्री के आज के बयान से स्पष्ट है कि सरकार ने चर्चा के दौरान इन सभी पहलुओं पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। अब सबकी निगाहें लोकसभा की डिजिटल स्क्रीन पर टिक गई हैं, जहां मतदान के परिणाम भारत का भविष्य तय करेंगे।


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