तेजस्वी यादव का बड़ा हमला: “नारीशक्ति वंदन संशोधन बिल का गिरना भाजपा के पाखंड की हार”






तेजस्वी यादव का बड़ा बयान: ‘संविधान संशोधन बिल का गिरना तानाशाही की हार’

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संसद में संशोधन बिल का गिरना सरकार का पाखंड और प्रपंच: तेजस्वी यादव का केंद्र पर ‘चट्टानी’ हमला

नई दिल्ली/पटना: लोकसभा में ‘नारीशक्ति वंदन अधिनियम’ में संशोधन के लिए लाए गए संविधान संशोधन विधेयक के गिरने के बाद विपक्षी खेमे में भारी उत्साह देखा जा रहा है। बिहार के दिग्गज नेता और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के मुख्य रणनीतिकार तेजस्वी यादव ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए केंद्र की मोदी सरकार को ‘नैतिक’ और ‘संवैधानिक’ रूप से विफल बताया है।

“विपक्ष की चट्टानी एकता ने आज फिर यह साबित कर दिया कि देश के लोकतांत्रिक मूल्यों, संविधान और दलित, पिछड़े व अल्पसंख्यक वर्गों की महिलाओं के अधिकारों के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

— तेजस्वी यादव

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संविधान बदलने के इरादे पर पानी फिरा

तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार महिला आरक्षण की आड़ में संविधान के मूल ढांचे को बदलने का प्रयास कर रही थी। उन्होंने कहा कि बहुमत के अहंकार में जनभावना का गला घोंटने की कोशिश को विपक्षी दलों की एकता ने विफल कर दिया है। तेजस्वी के अनुसार, परिसीमन के नाम पर क्षेत्रीय संतुलन बिगाड़ने और विपक्षी दलों के अधिकारों को कम करने की यह एक ‘साजिश’ थी जिसे सदन ने नकार दिया है।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बिना सर्वदलीय आम सहमति और व्यापक विमर्श के ‘चालाकी’ से लाया गया यह बिल सरकार की बदनीयत को उजागर करता है। तेजस्वी ने सवाल उठाया कि जब नारीशक्ति वंदन अधिनियम पहले से पारित था, तो पुन: संशोधन के लिए विशेष सत्र बुलाने का क्या तुक था?

बड़ा आरोप: चुनावी लाभ के लिए ‘प्रोपेगेंडा’

तेजस्वी यादव ने सरकार की टाइमिंग पर सवाल उठाते हुए इसे राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनावों से जोड़ा। उन्होंने कहा कि यह बिल केवल राजनीतिक लाभ के लिए किया गया एक “निम्नस्तर का पाखंड, प्रपंच और प्रोपेगेंडा” था। सरकार के पास न तो ठोस नैतिक तर्क थे और न ही संवैधानिक आधार, जिसके कारण यह विधेयक सदन में गिर गया।

विपक्ष की ‘चट्टानी एकता’ का संदेश

इस घटनाक्रम को तेजस्वी ने ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन की एकजुटता के प्रमाण के रूप में पेश किया। उन्होंने कहा कि आज के फैसले ने यह प्रमाणित कर दिया है कि बहुमत के बल पर लोकतांत्रिक मूल्यों को तार-तार नहीं किया जा सकता। दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्गों की महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए विपक्ष एक ढाल की तरह खड़ा है।

आगे क्या? राजनीतिक गलियारों में हलचल

विधेयक के गिरने के बाद अब भाजपा और एनडीए के लिए स्थितियां चुनौतीपूर्ण हो गई हैं। तेजस्वी यादव के इस हमले ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले समय में विपक्ष इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाएगा और भाजपा की ‘संविधान विरोधी’ छवि को उजागर करेगा। तेजस्वी ने अपने संदेश के अंत में इसे जनतांत्रिक संरचना की जीत बताया है।