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तीर्थ गोपीकॉन बैंक गारंटी घोटाला: ED ने कुर्क की 10.80 करोड़ की प्रॉपर्टी; ₹202 करोड़ के गबन का भंडाफोड़।






ED की बड़ी स्ट्राइक: तीर्थ गोपीकॉन लिमिटेड की 10.80 करोड़ की संपत्तियां कुर्क, 202 करोड़ का बैंक गारंटी घोटाला


ED कार्रवाई अपडेट

फर्जी बैंक गारंटी घोटाला: ED ने तीर्थ गोपीकॉन लिमिटेड की ₹10.80 करोड़ की संपत्ति की कुर्क; ₹202 करोड़ के गबन का खुलासा

नई दिल्ली ब्यूरो | 17 अप्रैल, 2026 | स्रोत: प्रवर्तन निदेशालय (ED)

नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ED) की मुख्यालय जांच इकाई (HIU) ने ‘तीर्थ गोपीकॉन लिमिटेड’ (TGL) और उसके प्रमोटरों के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। केंद्रीय एजेंसी ने फर्जी बैंक गारंटी जमा कर सरकारी विभागों से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी करने के मामले में लगभग ₹10.80 करोड़ की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क (Attach) कर लिया है।

घोटाले का पैमाना: जांच में सामने आया है कि इस सुनियोजित साजिश के जरिए सार्वजनिक कोष से लगभग ₹202.01 करोड़ का अवैध लाभ उठाया गया था। कुर्क की गई संपत्तियों में इंदौर और अहमदाबाद स्थित आवासीय अपार्टमेंट और व्यावसायिक स्थान शामिल हैं।

धोखाधड़ी का तरीका: फर्जी ईमेल और ‘स्पूफिंग’ का खेल

ED की जांच में एक चौंकाने वाला ‘मोडस ऑपरेंडी’ सामने आया है। कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर महेश कुंभानी ने अपने सहयोगियों और पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के तत्कालीन सीनियर ब्रांच मैनेजर गोविंद चंद्र हांसदा के साथ मिलकर जाली बैंक गारंटी तैयार कीं।

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इन जाली दस्तावेजों को वैध दिखाने के लिए “pnb-india.co” नाम का एक फर्जी ईमेल डोमेन बनाया गया, जो बैंक के आधिकारिक डोमेन जैसा दिखता था। इस फर्जी डोमेन से सरकारी एजेंसियों (MPJNM और RRECL) को पुष्टिकरण ईमेल भेजे गए, जिससे अधिकारियों को लगा कि बैंक गारंटी असली है। इसी भरोसे के आधार पर सरकारी विभागों ने कंपनी को करोड़ों रुपये का एडवांस पेमेंट जारी कर दिया।

कुल प्रोसीड्स ऑफ क्राइम ₹202.01 करोड़ (लगभग)
कुर्क संपत्ति का मूल्य ₹10.80 करोड़
प्रमुख आरोपी महेश कुंभानी, राकेश जागीरदार, गौरव धाकड़, राहुल गुप्ता
प्रभावित विभाग मप्र जल निगम (MPJNM) और राजस्थान रिन्यूएबल एनर्जी (RRECL)
लोकेशन इंदौर (मप्र) और अहमदाबाद (गुजरात)

मनी लॉन्ड्रिंग का जाल: परिवार के नाम पर निवेश

जांच में पता चला कि अपराध की कमाई (Proceeds of Crime) में से लगभग ₹22.12 करोड़ को महेश कुंभानी, उनकी पत्नी चंद्रिकाबेन कुंभानी और बेटे पल्लव कुंभानी के निजी बैंक खातों में डायवर्ट किया गया। इस पैसे का उपयोग इंदौर और अहमदाबाद में अचल संपत्तियां खरीदने के लिए किया गया। सीबीआई (CBI) पहले ही इस मामले में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, जिसके बाद अब ED ने संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया शुरू की है।

सार्वजनिक सुरक्षा सलाह: फर्जी ईमेल की पहचान कैसे करें?

ED ने आम जनता और सरकारी विभागों के लिए एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है:

  • डोमेन चेक करें: सभी आधिकारिक भारतीय बैंक वेबसाइटों और ईमेल का अंत अनिवार्य रूप से ‘.bank.in’ पर होना चाहिए।
  • स्पेलिंग पर ध्यान दें: जालसाज अक्सर ‘pnb-india.co’ जैसे मिलते-जुलते नाम का उपयोग करते हैं। हमेशा असली यूआरएल टाइप करें।
  • संदीग्ध लिंक: कभी भी संदेहास्पद ईमेल में दिए गए लिंक पर क्लिक न करें या अटैचमेंट डाउनलोड न करें।

निष्कर्ष और आगामी कदम

प्रवर्तन निदेशालय ने दोहराया है कि वह आर्थिक अपराधों, विशेष रूप से सार्वजनिक धन की लूट और सरकारी एजेंसियों के साथ धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है। मामले में आगे की जांच जारी है ताकि अपराध की शेष कमाई का पता लगाया जा सके और इसमें शामिल अन्य व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।


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