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योगेश गौड़ा मर्डर केस: कर्नाटक विधायक विनय कुलकर्णी को दोहरी उम्रकैद; CBI की बड़ी जीत।






योगेश गौड़ा हत्याकांड: कर्नाटक के विधायक विनय कुलकर्णी को दोहरी उम्रकैद की सजा


CBI PRESS RELEASE

योगेश गौड़ा हत्याकांड: कर्नाटक के सिटिंग MLA और पूर्व मंत्री विनय कुलकर्णी समेत 16 को ‘दोहरी उम्रकैद’

बेंगलुरु/नई दिल्ली | 17 अप्रैल, 2026 | स्रोत: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI)

बेंगलुरु: कर्नाटक की राजनीति में आज एक बड़ा भूचाल आ गया है। बेंगलुरु की एक विशेष अदालत ने धारवाड़ से वर्तमान विधायक और पूर्व खान एवं भूविज्ञान राज्य मंत्री विनय राजशेखरप्पा कुलकर्णी को धारवाड़ जिला पंचायत सदस्य योगेश गौड़ा की हत्या के मामले में दोषी करार देते हुए दोहरी उम्रकैद (Double Life Imprisonment) की सजा सुनाई है। विधायक के साथ ही 15 अन्य आरोपियों को भी यही कठोर सजा दी गई है।

अदालत का फैसला: माननीय विशेष न्यायाधीश (सांसदों/विधायकों के मामलों के लिए) ने 15 अप्रैल 2026 को फैसला सुनाया था, जिसके बाद आज 17 अप्रैल को सजा की अवधि का ऐलान किया गया। विधायक विनय कुलकर्णी और उनके चाचा चंद्रशेखर इंदि (चंदू मामा) को धारा 120-बी और 302 के तहत दोषी पाया गया।

हत्याकांड की पृष्ठभूमि: क्या था मामला?

यह मामला 15 जून 2016 का है, जब धारवाड़ जिला पंचायत सदस्य योगेश गौड़ा की उनके ही जिम में धारदार हथियारों से बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। शुरुआती जांच कर्नाटक पुलिस द्वारा की गई थी, लेकिन बाद में मामला उलझता देख राज्य सरकार ने इसकी जांच सीबीआई (CBI) को सौंप दी थी।

सीबीआई की जांच में खुलासा हुआ कि यह हत्या कोई आकस्मिक घटना नहीं थी, बल्कि एक सोची-समझी गहरी साजिश थी। इस साजिश के मास्टरमाइंड विनय कुलकर्णी थे। जांच में यह भी सामने आया कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के चलते योगेश गौड़ा को रास्ते से हटाने के लिए यह पूरी योजना तैयार की गई थी।

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सजा और जुर्माना: कौन-कौन हुआ दंडित?

अदालत ने विधायक विनय कुलकर्णी और उनके चाचा चंद्रशेखर इंदि पर सजा के साथ-साथ 90,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अन्य 14 दोषियों, जिनमें विक्रम बल्लारी, कीर्तिकुमार कुराहट्टी और संदीप सौदत्ती शामिल हैं, को भी दोहरी उम्रकैद और प्रत्येक पर 96,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

मुख्य दोषी विनय आर. कुलकर्णी (MLA, धारवाड़)
सजा दोहरी उम्रकैद (Double Life Imprisonment)
पुलिस अधिकारी को सजा इंस्पेक्टर सी. टिंगेरीकर (7 साल कठोर कारावास)
जुर्माना राशि का उपयोग ₹16 लाख मृतक के बच्चों को दिए जाएंगे
जेल सेंट्रल जेल, बेंगलुरु

पुलिस अधिकारी की मिलीभगत और सबूत मिटाने का खेल

सीबीआई की जांच ने धारवाड़ उप-नगर पुलिस स्टेशन के तत्कालीन एसएचओ और पुलिस इंस्पेक्टर सी. टिंगेरीकर की भूमिका पर भी सवाल उठाए। अदालत ने उन्हें सबूत नष्ट करने और साजिश में मदद करने का दोषी पाया और उन्हें 7 साल के कठोर कारावास (RI) की सजा सुनाई। उन पर 80,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

अदालत ने यह भी आदेश दिया है कि कुल जुर्माना राशि में से 16 लाख रुपये मृतक योगेश गौड़ा के बच्चों को मुआवजे के तौर पर दिए जाएंगे। यह फैसला उन शक्तिशाली लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है जो कानून को अपनी मुट्ठी में समझते हैं।

झूठी गवाही देने वालों पर भी गिरेगी गाज

न्याय की प्रक्रिया को बाधित करने की कोशिश करने वालों को भी अदालत ने नहीं बख्शा है। माननीय न्यायाधीश ने 10 गवाहों के खिलाफ झूठी गवाही (Perjury) की कार्रवाई शुरू करने के आदेश दिए हैं, जिन्होंने सुनवाई के दौरान अदालत को गुमराह करने का प्रयास किया था।

निष्कर्ष: इस फैसले के बाद विनय कुलकर्णी की विधायकी पर खतरा मंडरा रहा है, क्योंकि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत दो साल या उससे अधिक की सजा होने पर सदस्यता समाप्त हो जाती है। सीबीआई की इस जीत को निष्पक्ष जांच और न्याय की जीत के तौर पर देखा जा रहा है।


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