नमिता पाण्डेय का लेख: बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए ‘7 स्टार भोजन थाली’ और पारंपरिक आहार का महत्व।






विशेष लेख: स्वस्थ बचपन, सशक्त छत्तीसगढ़ – नमिता पाण्डेय (यूनिसेफ)

file_000000000ae07206b6dd6cb6073112cd
WhatsApp Image 2026-03-12 at 6.47.26 PM (1)
c3bafc7d-8a11-4a77-be3b-4c82fa127c77 (1)


नमिता पाण्डेय

(पोषण सलाहकार, यूनिसेफ़)

विशेष लेख: स्वस्थ बचपन ही सशक्त छत्तीसगढ़ और समृद्ध भारत की सबसे मजबूत नींव

आज का बचपन एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। बच्चों में तेजी से बढ़ता मोटापा अब केवल एक स्वास्थ्य समस्या नहीं, बल्कि हमारी बदलती जीवनशैली का स्पष्ट संकेत बन चुका है। घंटों मोबाइल और टीवी स्क्रीन के सामने बिताया जाने वाला समय, खेल के मैदानों से बढ़ती दूरी और जंक फूड की सहज उपलब्धता—इन तीनों ने मिलकर बच्चों की स्वाभाविक सक्रियता को सीमित कर दिया है।

इसके परिणामस्वरूप टाइप-2 मधुमेह, उच्च रक्तचाप और थायरॉइड विकार जैसी बीमारियाँ कम उम्र में ही सामने आने लगी हैं। साथ ही, आत्मविश्वास में कमी, सामाजिक अलगाव और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियाँ भी तेजी से उभर रही हैं।

छत्तीसगढ़ सरकार की प्राथमिकता: पोषण और स्वास्थ्य

छत्तीसगढ़ में बच्चों और माताओं के बेहतर स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। पोषण, स्वास्थ्य और जन-जागरूकता से जुड़े अभियानों को गाँव-गाँव तक पहुँचाया जा रहा है।

mantr
66071dc5-2d9e-4236-bea3-b3073018714b

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा मातृ एवं शिशु पोषण को केंद्र में रखते हुए अनेक पहलें संचालित की जा रही हैं। स्थानीय खाद्य परंपराओं को पुनर्जीवित करना, माताओं को जागरूक करना और संतुलित आहार सुनिश्चित करना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

पारंपरिक आहार: समाधान की मजबूत नींव
राष्ट्रीय पोषण पखवाड़ा 2026 रेखांकित करता है कि स्वस्थ जीवन का रास्ता हमारी अपनी रसोई से होकर गुजरता है। रागी, बाजरा, ज्वार, कोदो-कुटकी जैसे मिलेट्स पोषण का समृद्ध स्रोत हैं। रागी की इडली, बाजरे का उपमा और कोदो की खिचड़ी जैसे व्यंजन स्वाद और स्वास्थ्य का संतुलित संगम हैं।

पहले 1,000 दिन: भविष्य की नींव

वैज्ञानिक दृष्टि से गर्भधारण से लेकर बच्चे के दो वर्ष की आयु तक का समय अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। यही वह अवधि है, जब बच्चे के मस्तिष्क का सबसे तेज विकास होता है। जन्म के समय जहाँ मस्तिष्क का विकास लगभग 30 प्रतिशत होता है, वहीं पाँच वर्ष की आयु तक यह 90 प्रतिशत तक पहुँच जाता है। इस दौरान माँ का पोषण और सकारात्मक वातावरण बच्चे के मानसिक और भावनात्मक विकास की आधारशिला तैयार करते हैं।

“7 स्टार भोजन थाली” : संतुलित पोषण का सरल मॉडल

“7 स्टार भोजन थाली” एक ऐसी अवधारणा है, जो संतुलित और विविध आहार के महत्व को रेखांकित करती है। इसमें माँ और बच्चे के लिए आवश्यक कैलोरी, प्रोटीन, आयरन, फोलिक एसिड, कैल्शियम, तरल पदार्थ और विटामिन की पर्याप्त मात्रा सुनिश्चित की जाती है। यह पहल कुपोषण और एनीमिया जैसी समस्याओं से लड़ने का सशक्त आधार है।

“आज आवश्यकता इस बात की है कि हम अपनी प्राथमिकताओं को बदलें—मोबाइल से मैदान की ओर, जंक फूड से पारंपरिक आहार की ओर और लापरवाही से जागरूकता की ओर।”

आदतों में बदलाव से बनेगा बेहतर कल

पोषण पखवाड़ा हमें यह संदेश देता है कि स्वास्थ्य कोई सीमित समय का अभियान नहीं, बल्कि एक निरंतर विकसित होने वाली संस्कृति है। यह संस्कृति हर घर की रसोई, हर स्कूल के टिफिन और हर मोहल्ले के खेल मैदान में विकसित होती है। स्वस्थ बचपन ही एक सशक्त और समृद्ध राष्ट्र का निर्माण कर सकता है।