छत्तीसगढ़ निकाय चुनाव: विष्णु सरकार का बड़ा फैसला; अब जनता सीधे चुनेगी महापौर और अध्यक्ष, प्रत्यक्ष प्रणाली बहाल





छत्तीसगढ़ निकाय चुनाव: अब जनता चुनेगी अपना मेयर, विष्णु देव साय सरकार ने लागू की प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली

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सुशासन की ओर छत्तीसगढ़ | नगरीय निकाय चुनाव 2026

मेयर और अध्यक्ष का होगा सीधा चुनाव: विष्णु देव साय सरकार ने प्रत्यक्ष प्रणाली को पुनः दी मंजूरी, लोकतंत्र होगा सशक्त

ब्यूरो रिपोर्ट: न्यूज़ डेस्क, प्रदेश खबर
अपडेटेड: 29 अप्रैल, 2026 | स्थान: रायपुर/सरगुजा

रायपुर: छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार ने प्रदेश की नगरीय सत्ता के समीकरणों को बदलने वाला एक बड़ा ऐतिहासिक निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने सुशासन की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए नगरीय निकाय चुनावों में मेयर (महापौर) और अध्यक्षों के चयन के लिए प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली को पुनः लागू करने का फैसला किया है। इस निर्णय के बाद अब प्रदेश की जनता सीधे अपने शहर के प्रथम नागरिक का चुनाव कर सकेगी।

भाजपा छत्तीसगढ़ का संदेश:
“सुशासन की प्रतिबद्धता के साथ सरकार ने नगरीय निकाय चुनावों को और अधिक प्रत्यक्ष, पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाया है। जनता के अधिकारों को सर्वोपरि रखते हुए प्रदेश में मेयर एवं अध्यक्ष के चुनाव के लिए प्रत्यक्ष प्रणाली को पुनः लागू किया गया है। यह निर्णय लोकतंत्र को सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”

क्या है प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली और क्यों है महत्वपूर्ण?

प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली के तहत मतदाता पार्षदों के साथ-साथ महापौर या नगर पालिका/नगर पंचायत अध्यक्ष के लिए भी सीधे वोट डालते हैं। पिछली सरकार के दौरान इस प्रणाली को बदलकर ‘अप्रत्यक्ष’ कर दिया गया था, जिसमें पार्षद मिलकर महापौर का चुनाव करते थे। विष्णु सरकार का मानना है कि प्रत्यक्ष प्रणाली से पार्षदों की खरीद-फरोख्त (हॉर्स ट्रेडिंग) पर लगाम लगेगी और जनता के प्रति जवाबदेही बढ़ेगी।

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निर्णय के मुख्य प्रभाव:

  • पारदर्शिता: चुनाव प्रक्रिया में शुचिता आएगी और भ्रष्टाचार की गुंजाइश कम होगी।
  • सीधा जुड़ाव: जनता अपने नेता से सीधे सवाल कर सकेगी, क्योंकि वह सीधे उनके वोट से चुनकर आएगा।
  • स्थिरता: प्रत्यक्ष रूप से चुने गए महापौर को पद से हटाना कठिन होगा, जिससे शहर के विकास कार्यों में निरंतरता बनी रहेगी।

लोकतंत्र के सुदृढ़ीकरण की दिशा में कदम

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली सरकार का यह कदम छत्तीसगढ़ के सर्वांगीण विकास के मार्ग को और सुदृढ़ करने वाला माना जा रहा है। भाजपा का तर्क है कि इससे शासन व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी और स्थानीय निकायों में जनता की भागीदारी अधिक सक्रिय होगी। राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, इस बदलाव से निकाय चुनावों में बड़े चेहरों की भूमिका अहम हो जाएगी और चुनाव प्रचार का स्वरूप भी व्यापक होगा।

प्रणाली चुनाव की प्रक्रिया जवाबदेही
प्रत्यक्ष प्रणाली (नई) जनता सीधे वोट देकर चुनती है। सीधे जनता के प्रति।
अप्रत्यक्ष प्रणाली (पुरानी) निर्वाचित पार्षद आपस में चुनते हैं। पार्षदों के गुटों के प्रति।

प्रदेश खबर का विश्लेषण

सरगुजा से लेकर बस्तर तक, इस निर्णय का स्वागत स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा किया जा रहा है। प्रदेश खबर न्यूज़ नेटवर्क के विश्लेषण के अनुसार, प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली लागू होने से छोटे दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों के बजाय सीधे तौर पर भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा। सुशासन के इस मॉडल से छत्तीसगढ़ की नगरीय व्यवस्था में एक सकारात्मक बदलाव की उम्मीद है।

“विष्णु सरकार का यह निर्णय केवल एक चुनावी प्रक्रिया का बदलाव नहीं है, बल्कि यह जनता के वोट की ताकत को पुनः स्थापित करने का प्रयास है। पारदर्शिता और जवाबदेही ही सुशासन की असली पहचान है।”

प्रस्तुति: आशीष सिन्हा, संपादक – प्रदेश खबर न्यूज़ नेटवर्क

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