उपयोगित जल प्रबंधन: उच्च तकनीक और प्रकृति के सामंजस्य से स्वच्छ होंगे प्रदेश के नगर
भोपाल: स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के अंतर्गत मध्यप्रदेश के नगरों को पर्यावरण के अनुकूल और पूर्णतः स्वच्छ बनाने की दिशा में नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा होटल पलाश में “उपयोगित जल प्रबंधन” विषय पर एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया।
आयुक्त श्री संकेत भोंडवे के मुख्य निर्देश:
- सीवरेज प्रबंधन के लिए SBR और बायोनेस्ट जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाए।
- STP से निकलने वाले उपचारित जल का अनिवार्य रूप से पुनरुपयोग (Reuse) सुनिश्चित हो।
- नगरों के सौंदर्य और स्वच्छता के लिए ‘नाला टैपिंग’ की भूमिका को प्राथमिकता दें।
- संयंत्र परिसरों में वायु शुद्धि के लिए पीपल जैसे प्राकृतिक शोधक पौधों का रोपण करें।
- एसटीपी की डिजाइन एवं ड्रॉइंग संबंधी समस्याओं का त्वरित निराकरण किया जाए।
तकनीकी सटीकता और कार्ययोजना पर विमर्श
अपर आयुक्त श्री शिशिर गेमावत ने कहा कि मध्यप्रदेश स्वच्छ भारत मिशन के विविध सोपानों पर सराहनीय कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि निर्माण की डिजाइन और ड्रॉइंग की सटीकता उपयोगित जल प्रबंधन की परिकल्पना को मूर्त रूप देने के लिए आवश्यक है। इसी ध्येय से 136 नगरीय निकायों की तकनीकी समस्याओं के निराकरण हेतु विशेषज्ञों के साथ गहन विमर्श किया गया।
प्रमुख अभियंता श्री प्रदीप मिश्रा ने मलजल शोधन संयंत्र (STP) से प्रवाहित होने वाले जल की शुद्धता एवं गुणवत्ता बनाए रखने पर जोर दिया, ताकि जल प्रबंधन का मूल उद्देश्य सार्थक हो सके।
विशेषज्ञ सत्र और सहभागिता
कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में निम्नलिखित विषयों पर प्रस्तुतीकरण दिए गए:
- प्रोफेसर श्री राजेश विनिवाल: उपयोगित जल प्रबंधन के सूक्ष्म पहलुओं पर सारगर्भित जानकारी।
- श्री कार्तिकेय तिवारी: “पॉल्यूटेड नाला टू क्लीन वॉटर” विषय पर नवीन तकनीकों का साझाकरण।
कार्यशाला में 136 नगरीय निकायों के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, इंटरसेप्शन एवं डाइवर्जन से जुड़े घटकों पर व्यापक मंथन हुआ। इस अवसर पर संभागीय कार्यपालन यंत्री, संयुक्त संचालक, PDMC टीम, डिजाइनर्स, कॉन्ट्रैक्टर्स और तकनीकी प्रदाता उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन उप संचालक श्री नीलेश दुबे द्वारा किया गया।










