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माउंट एवरेस्ट विजय: आज के इतिहास में 29 मई का महत्व और एडमंड हिलेरी-तेनजिंग नोर्गे की ऐतिहासिक उपलब्धि





माउंट एवरेस्ट विजय: इतिहास के पन्नों से


माउंट एवरेस्ट विजय: मानवीय साहस और दृढ़ निश्चय की गाथा

29 मई 1953 का दिन मानवता के अदम्य साहस और दृढ़ निश्चय का प्रतीक है। इस दिन न्यूज़ीलैंड के एडमंड हिलेरी और नेपाल के शेरपा तेनजिंग नोर्गे ने दुनिया की सबसे ऊँची चोटी, माउंट एवरेस्ट (8,848 मीटर) के शिखर पर कदम रखकर इतिहास रचा था।

1. पृष्ठभूमि और तैयारी

1953 का ब्रिटिश माउंट एवरेस्ट अभियान कर्नल जॉन हंट के नेतृत्व में आयोजित किया गया था। उस समय तक माउंट एवरेस्ट को ‘अजेय’ माना जाता था।

  • अभियान का आकार: इसमें 400 से अधिक लोग, 20 अनुभवी शेरपा गाइड और 10 पर्वतारोही शामिल थे।
  • चुनौतियां: पर्वतारोहियों को बेहद ठंड (-30°C) और “डेथ ज़ोन” में ऑक्सीजन की कमी का सामना करना था।

2. शिखर की ओर अंतिम चढ़ाई

अभियान के दौरान 26 मई को अन्य पर्वतारोहियों की विफलता के बाद, हिलेरी और तेनजिंग को अंतिम मौका मिला।

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  • 28 मई: उन्होंने 8,500 मीटर की ऊँचाई पर अपना अंतिम टेंट लगाया।
  • 29 मई: सुबह 11:30 बजे, उन्होंने शिखर पर कदम रखा।
  • हिलरी स्टेप: रास्ते में आने वाली 12 मीटर ऊँची खड़ी चट्टान, जिसे अब ‘हिलरी स्टेप’ कहा जाता है, को पार करना सबसे बड़ी चुनौती थी।

3. शिखर पर वे 15 मिनट

शिखर पर पहुँचते ही हिलेरी और तेनजिंग ने एक-दूसरे को गले लगाकर अपनी खुशी जाहिर की।

  • प्रतीक: हिलेरी ने बर्फ में एक छोटा क्रूस रखा, जबकि तेनजिंग ने कुछ खाद्य सामग्री भेंट की।
  • प्रमाण: हिलेरी द्वारा ली गई तस्वीरों ने इस ऐतिहासिक जीत को दुनिया के सामने रखा।

4. वैश्विक प्रभाव और विरासत

इस जीत की खबर को महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के राज्याभिषेक (2 जून 1953) के साथ सार्वजनिक किया गया।

  • सम्मान: एडमंड हिलेरी को नाइटहुड की उपाधि से नवाजा गया।
  • मानवीय कार्य: सर एडमंड हिलेरी ने बाद में ‘हिमालयन ट्रस्ट’ के जरिए नेपाल में स्कूल और अस्पताल बनवाकर अपना जीवन शेरपा समुदाय के नाम कर दिया।

एक रोचक तथ्य: तेनजिंग नोर्गे ने अपनी आत्मकथा में लिखा था कि हिलेरी ने शिखर पर पहला कदम रखा था और वे उनके पीछे थे। यह उनकी आपसी एकता और टीमवर्क का ही परिणाम था कि वे दोनों एक साथ उस ऊंचाई तक पहुँच पाए।

यह उपलब्धि आज भी दुनिया भर के साहसी लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है और हमें याद दिलाती है कि कठिन से कठिन लक्ष्य भी मेहनत और धैर्य से प्राप्त किए जा सकते हैं।


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