राष्ट्रीय परीक्षा संकट: राहुल गांधी ने सिस्टम की विफलता पर सरकार को घेरा
तिथि: 30 मई, 2026
अवलोकन
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET-UG) 2026 के दौरान आई तकनीकी खामियों के बाद केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। गांधी की टिप्पणी उन लाखों छात्रों की हताशा को दर्शाती है जो देश भर में प्रमुख राष्ट्रीय परीक्षाओं में बार-बार आ रही बाधाओं का सामना कर रहे हैं।
“NEET। CBSE। SSC। और आज CUET। चार परीक्षाएँ। एक करोड़ बच्चे। एक भी ईमानदारी से नहीं हो पाई। दावे ‘विश्वगुरु’ के, मगर देश में एक परीक्षा नहीं करवा सकते – मोदी जी ने पूरी शिक्षा व्यवस्था तबाह कर दी है।” — राहुल गांधी (X के माध्यम से)
वर्तमान स्थिति
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) से जुड़े विवाद ने 2026 में गंभीर मोड़ ले लिया है, क्योंकि कई राष्ट्रीय स्तरीय परीक्षाओं को भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है:
- CUET-UG 2026: 30 मई को, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) द्वारा प्रदान की गई तकनीकी सेवा में गड़बड़ी के कारण विभिन्न केंद्रों पर उम्मीदवारों को भारी देरी का सामना करना पड़ा। हालांकि NTA ने छात्रों को अतिरिक्त समय दिया है, लेकिन छात्रों और अभिभावकों ने लंबी प्रतीक्षा और खराब संचार व्यवस्था पर अपना रोष व्यक्त किया है।
- NEET-UG 2026: मेडिकल प्रवेश परीक्षा कथित पेपर लीक के आरोपों के बाद विवादों में रही है, जिससे 20 लाख से अधिक उन छात्रों के भविष्य पर सवाल उठ गए हैं जिन्होंने वर्षों तक तैयारी की और भारी आर्थिक निवेश किया।
- CBSE और SSC: बोर्ड और भर्ती परीक्षाओं में भी विसंगतियों और प्रक्रियात्मक विफलताओं की खबरें सामने आई हैं, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गया है।
सरकार और NTA की स्थिति
NTA ने CUET में हालिया तकनीकी विफलताओं को स्वीकार किया है और दावा किया है कि समस्याओं का समाधान कर दिया गया है। एजेंसी ने परीक्षाओं को ईमानदारी और पारदर्शिता से आयोजित करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। NEET-UG विवाद के संबंध में, सरकार ने सीबीआई जैसी जांच एजेंसियों को शामिल किया है, लेकिन आलोचकों का तर्क है कि ये उपाय समस्या का समाधान करने के बजाय केवल दिखावटी प्रतिक्रियाएं हैं।
छात्रों पर प्रभाव
इन बाधाओं का छात्रों पर विनाशकारी प्रभाव पड़ा है:
| मुद्दा | प्रभाव |
|---|---|
| अकादमिक अनिश्चितता | परीक्षाओं के बार-बार स्थगित होने से छात्र निरंतर तनाव और मानसिक दबाव में हैं। |
| आर्थिक बोझ | मध्यम वर्गीय परिवारों पर कोचिंग फीस, यात्रा और रहने का अतिरिक्त खर्च पड़ रहा है। |
| विश्वास की कमी | पेपर लीक और तकनीकी त्रुटियों के कारण मेरिट-आधारित चयन प्रक्रिया से छात्रों का भरोसा कम हुआ है। |
राजनीतिक प्रतिक्रिया
राहुल गांधी का बयान सरकार के लिए एक गंभीर चेतावनी है, जिसमें उन्होंने कहा है कि जिस पीढ़ी का भविष्य बर्बाद किया जा रहा है, वह पीढ़ी इसका हिसाब लेगी। अन्य राजनीतिक दलों ने भी शिक्षा और परीक्षा अवसंरचना के कुप्रबंधन को लेकर सरकार की कड़ी आलोचना की है और अधिक सक्षम व पारदर्शी व्यवस्था की मांग की है।
30 मई, 2026 तक की स्थिति के अनुसार, छात्र संगठन NTA में बड़े सुधारों और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं ताकि देश के युवाओं के भविष्य को सुरक्षित किया जा सके।










