RBI वार्षिक रिपोर्ट 2025-26: बैंकिंग धोखाधड़ी के मामलों में गिरावट, लेकिन वित्तीय नुकसान का ग्राफ बढ़ा
प्रस्तुति: प्रदेश खबर न्यूज़ नेटवर्क
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 जारी कर दी है, जिसमें बैंकिंग सेक्टर में धोखाधड़ी (Bank Fraud) के बदलते स्वरूप को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, बीते वित्त वर्ष में धोखाधड़ी के कुल 10,114 मामले दर्ज किए गए, जिनमें शामिल कुल धनराशि 48,021 करोड़ रुपये है।
1. आंकड़ों का विरोधाभास: कम मामले, ज्यादा नुकसान
RBI के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो यह एक विरोधाभास (Paradox) की स्थिति है। पिछले वर्ष (2024-25) की तुलना में धोखाधड़ी के मामलों की संख्या में 57.4% की कमी आई है, लेकिन इसमें फंसी धनराशि 46.4% बढ़ गई है।
- वित्त वर्ष 2025-26: 10,114 मामले | 48,021 करोड़ रुपये
- वित्त वर्ष 2024-25: 23,722 मामले | 32,803 करोड़ रुपये
2. ‘एडवांस’ (ऋण) बना सबसे बड़ा खतरा
रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अब धोखाधड़ी का स्वरूप बदल गया है। पहले जहां कार्ड और डिजिटल ट्रांजेक्शन में सबसे ज्यादा घटनाएं होती थीं, वहीं अब ‘एडवांस’ (Loan/Credit) श्रेणी में सबसे बड़ी जालसाजी हो रही है।
- कुल धोखाधड़ी राशि का करीब 85% हिस्सा ऋण (Advances) से जुड़ा है।
- डिजिटल भुगतान, इंटरनेट बैंकिंग और कार्ड धोखाधड़ी के मामले घटकर मात्र 293 रह गए हैं।
3. सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक सबसे अधिक प्रभावित
बैंकों के वर्गीकरण के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (PSBs) धोखाधड़ी की मार सबसे अधिक झेल रहे हैं।
| बैंक श्रेणी | मामलों की संख्या | धोखाधड़ी राशि (करोड़ रुपये) |
|---|---|---|
| सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक | 5,418 | 35,709 |
| निजी क्षेत्र के बैंक | 3,956 | 11,399 |
4. पुरानी फाइलों का असर
रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि 48,021 करोड़ रुपये की कुल राशि में से 30,199 करोड़ रुपये की धनराशि उन 314 मामलों से संबंधित है, जो पुराने वर्षों के हैं। सुप्रीम कोर्ट के मार्च 2023 के फैसले के अनुपालन में इन्हें फिर से जांचा गया और रिपोर्ट किया गया है, जिससे चालू वित्त वर्ष के आंकड़ों में उछाल दिखा है।
5. RBI की भविष्य की सुरक्षा रणनीति
धोखाधड़ी को रोकने के लिए RBI ने कड़े कदम उठाने का संकेत दिया है:
- साइबर रेंज प्लेटफॉर्म: IDBRT के जरिए बैंकों की साइबर सुरक्षा और तत्परता की ड्रिल की जा रही है।
- माइक्रो-डेटा एनालिटिक्स: साइबर जोखिमों का पहले ही पता लगाने के लिए नई तकनीक पर काम चल रहा है।
- किल स्विच की तैयारी: आपातकाल में संदिग्ध खातों से डेबिट रोकने के लिए ‘किल स्विच’ सुविधा पर विचार किया जा रहा है।
नोट: यह रिपोर्ट बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों में 1 लाख रुपये या उससे अधिक की धोखाधड़ी के आधार पर तैयार की गई है।
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