28वां CSPOC: प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में वैश्विक मंच पर भारत का बढ़ता प्रभाव
नई दिल्ली: हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित 28वें ‘कॉन्फ्रेंस ऑफ स्पीकर्स एंड प्रेसिडिंग ऑफिसर्स ऑफ द कॉमनवेल्थ’ (CSPOC) ने यह साबित कर दिया है कि ‘लोकतंत्र की जननी’ के रूप में भारत अब वैश्विक संसदीय संवाद का केंद्र बन चुका है। जनवरी 2026 में आयोजित यह सम्मेलन केवल एक बैठक नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती वैश्विक साख का प्रमाण था।
सम्मेलन का स्वरूप
इस सम्मेलन में 42 कॉमनवेल्थ देशों और चार अर्ध-स्वायत्त संसदों के 61 अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों ने भाग लिया। यह अब तक के सबसे बड़े CSPOC आयोजनों में से एक रहा, जिसने संसदीय कार्यप्रणाली, एआई (AI) का उपयोग, और सार्वजनिक जुड़ाव जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की।
प्रधानमंत्री मोदी का विजन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने उद्घाटन संबोधन में भारत के ‘लोकतंत्र की जननी’ होने के गौरव को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत आज न केवल वैश्विक चर्चाओं में भाग ले रहा है, बल्कि उन्हें एक नई दिशा भी दे रहा है। प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि भारत ने अपनी विविधता को लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति में परिवर्तित किया है।
प्रमुख उपलब्धियाँ और चर्चा के विषय
- तकनीकी नवाचार: भारतीय संसद में एआई आधारित रीयल-टाइम अनुवाद और ट्रांसक्रिप्शन की प्रणालियों को वैश्विक सराहना मिली।
- महिला नेतृत्व: भारत में जमीनी स्तर पर 1.5 मिलियन से अधिक निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों का उदाहरण वैश्विक स्तर पर एक मानक के रूप में उभरा।
- वैश्विक संकट और समाधान: कोविड-19 के दौरान ‘वैक्सीन मैत्री’ के माध्यम से भारत के मानवीय दृष्टिकोण को दुनिया ने एक मिसाल माना।
- ई-विधान पहल: ‘एक राष्ट्र, एक एप्लिकेशन’ के माध्यम से डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा देने की भारत की पहल ने अन्य देशों के लिए एक मॉडल प्रस्तुत किया।
28वें CSPOC ने विश्व को यह संदेश दिया कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में ‘नया भारत’ आत्मविश्वास से भरपूर, तकनीकी रूप से उन्नत और सांस्कृतिक मूल्यों में गहरा विश्वास रखने वाला राष्ट्र है। यह सम्मेलन भारत की उस क्षमता को दर्शाता है जिसके माध्यम से वह वैश्विक शांति और स्थिरता में एक बड़ी भूमिका निभा सकता है।
अधिक जानकारी के लिए देखें: 28th CSPOC: India’s Global Ascent Powered by PM Modi










