आकार-2026: संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के निर्देश पर सरगुजा संभाग में पारंपरिक शिल्प एवं कला का महाकुंभ
सरगुजा छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने के उद्देश्य से संस्कृति विभाग द्वारा एक महत्वाकांक्षी पहल ‘आकार-2026’ का आयोजन किया जा रहा है। संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के विशेष निर्देश पर, यह पारंपरिक शिल्प एवं विविध कला प्रशिक्षण शिविर अब सरगुजा संभाग में कला प्रेमियों के लिए ज्ञान का नया केंद्र बन गया है।
लोक कलाओं का संरक्षण और संवर्धन
आकार-2026 का मूल उद्देश्य केवल प्रशिक्षण प्रदान करना नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की उन विलुप्तप्राय कला विधाओं को पुनर्जीवित करना है जो लोक जीवन का अभिन्न अंग रही हैं। यह शिविर युवा कलाकारों को एक ऐसा मंच प्रदान करता है जहां वे अनुभवी कला गुरुओं के मार्गदर्शन में अपनी प्रतिभा को निखार सकते हैं। यह आयोजन भविष्य में युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए द्वार भी खोल रहा है।
शिविर की मुख्य विशेषताएं
- आयोजन अवधि: 8 जून से 14 जून 2026 तक।
- स्थान: उदयपुर (शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय परिसर) और लखनपुर (पीएमश्री स्कूल परिसर)।
- 14 पारंपरिक विधाएं: नृत्य, नाटक, वाद्ययंत्र, चित्रकला, क्ले आर्ट, म्यूरल आर्ट, हस्तकढ़ाई, ड्राई फ्लावर आर्ट, कोरिया कला, रजवार मिट्टी चित्र, मेहंदी, मृदा शिल्प, गोदना कला और बांस शिल्प।
- पंजीयन शुल्क: मात्र 100 रुपये। दिव्यांग एवं अनाथ बच्चों के लिए विशेष छूट का प्रावधान।
समय-सारणी और प्रशिक्षण सत्र
प्रशिक्षण शिविर का संचालन दो प्रमुख केंद्रों पर अलग-अलग समय में किया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक प्रतिभागी इसमें शामिल हो सकें:
| केंद्र | स्थान | समय |
|---|---|---|
| उदयपुर | शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय | सुबह 8:00 बजे से 11:00 बजे तक |
| लखनपुर | पीएमश्री स्कूल परिसर | शाम 5:00 बजे से रात 8:00 बजे तक |
पंजीयन एवं संपर्क जानकारी
इच्छुक प्रतिभागी अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए निम्नलिखित माध्यमों का उपयोग कर सकते हैं:
- आवेदन प्रारूप: आधिकारिक वेबसाइट www.cgculture.in से डाउनलोड किया जा सकता है।
- ई-मेल: sanskriti.rajbhasha@gmail.com
- संपर्क अधिकारी: अनूप किंडो (प्रभारी अधिकारी, आकार) – मोबाइल: 77730-49560
- कार्यालय फोन: 0771-2995629, 0771-2537404 (कार्यालयीन समय पर)
सांस्कृतिक पहचान और भविष्य की राह
प्रशिक्षण सत्र की समाप्ति के पश्चात, प्रतिभागियों द्वारा शिविर के दौरान तैयार की गई कलाकृतियों की एक भव्य प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी। साथ ही, सफल प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा। यह शिविर न केवल छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को नई ऊर्जा प्रदान करेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के बीच लोक कला और शिल्प के प्रति एक गहरी जागरूकता पैदा करने में मील का पत्थर साबित होगा।
आकार-2026 छत्तीसगढ़ की कला संस्कृति को विश्व पटल पर एक नई पहचान देने की दिशा में एक सशक्त कदम है।












