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TMC में बड़ी टूट की आहट: ममता बनर्जी के 21 सांसद BJP में होंगे शामिल? दिल्ली में सीक्रेट मीटिंग से हलचल





पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल: TMC सांसदों के बीजेपी में शामिल होने की अटकलें

पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा भूचाल: क्या TMC के 21 सांसद बीजेपी में होंगे शामिल?

कोलकाता/दिल्ली: हाल ही में संपन्न हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की करारी हार के बाद राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया है। चुनाव परिणामों के बाद से ही पार्टी के भीतर असंतोष और बगावत की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। इसी क्रम में अब एक बड़ी खबर ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है कि TMC के 21 सांसद बीजेपी के पाले में जा सकते हैं।

दिल्ली में गुप्त बैठक की चर्चा

मीडिया रिपोर्ट्स और राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, दिल्ली में एक गुप्त स्थान पर TMC के करीब 21 सांसदों की बैठक हुई है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब TMC प्रमुख ममता बनर्जी और सांसद अभिषेक बनर्जी खुद दिल्ली में मौजूद हैं और इंडिया गठबंधन की महत्वपूर्ण बैठकों में हिस्सा ले रहे हैं।

सूत्रों का दावा है कि रविवार रात एक गुप्त स्थान पर हुई इस बैठक में लगभग 20 सांसदों ने हिस्सा लिया। यद्यपि इस बैठक की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसने तृणमूल कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

पार्टी के भीतर गहराता संकट

मई 2026 में घोषित विधानसभा चुनाव परिणामों में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत और TMC की सत्ता से बेदखली के बाद से ही पार्टी के भीतर दो फाड़ की स्थिति बनी हुई है।

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  • नेतृत्व पर सवाल: पार्टी के भीतर एक गुट ने निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी का समर्थन किया है, जिससे पार्टी की एकजुटता पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
  • विधायकों का असंतोष: खबरों के मुताबिक, TMC के 80 में से 58 विधायकों ने बागी तेवर अपनाते हुए ऋतब्रत बनर्जी गुट के प्रति अपना समर्थन जताया है।
  • BJP का बढ़ता प्रभाव: राज्य में अब बीजेपी की सरकार है और मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी के नेतृत्व में प्रशासन में बड़े बदलाव देखे जा रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों की राय

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि TMC के सामने इस समय अपने अस्तित्व को बचाने की सबसे बड़ी चुनौती है। यदि सांसदों का एक बड़ा वर्ग वाकई बीजेपी में शामिल होता है, तो यह ममता बनर्जी की पार्टी के लिए एक अपूरणीय क्षति होगी। यह स्थिति महाराष्ट्र में शिवसेना के विभाजन जैसी ही दिखाई दे रही है, जहां पार्टी के भीतर का असंतोष एक बड़े राजनीतिक बिखराव में बदल गया था।

आगे की स्थिति

मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी, जिन्होंने खुद Bhabanipur सीट पर ममता बनर्जी को हराकर एक बड़ा राजनीतिक उलटफेर किया था, का दिल्ली दौरा भी इस पूरी घटनाक्रम को और अधिक महत्वपूर्ण बना रहा है। राजनीतिक जानकारों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह महज अटकलें हैं या फिर पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ रही है।


यह अपडेट मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रमों पर आधारित है। अधिक जानकारी के लिए जुड़े रहें।


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