मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और जर्मन काउंसलेट जनरल की ऐतिहासिक भेंट
भोपाल, मंगलवार: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से आज समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में जर्मनी के काउंसलेट जनरल श्री क्रिस्टोफ हालियर ने शिष्टाचार भेंट की। यह मुलाकात न केवल राजनयिक संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से की गई, बल्कि मध्य प्रदेश और जर्मनी के बीच उद्योग, शिक्षा, कौशल विकास और तकनीकी सहयोग के नए रास्तों को खोलने का एक महत्वपूर्ण कदम भी है।
स्वागत और आत्मीयता का वातावरण
मुलाकात की शुरुआत बेहद गर्मजोशी के साथ हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्री क्रिस्टोफ हालियर का स्वागत पुष्प-गुच्छ और मध्य प्रदेश की विश्व धरोहर स्मारक ‘सांची स्तूप’ की एक सुंदर फ्रेम युक्त तस्वीर भेंट कर किया। श्री हालियर ने भोपाल की सुंदरता की मुक्तकंठ से सराहना की और अपनी यात्रा के अनुभव साझा किए।
भारत-जर्मनी संबंधों का ऐतिहासिक संदर्भ
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारत और जर्मनी के बीच प्राचीन काल से चले आ रहे संबंधों का स्मरण किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इन संबंधों को एक नया आयाम मिला है। उद्योग और व्यवसाय जगत में दोनों देशों की भागीदारी अब पहले से कहीं अधिक प्रगाढ़ और सुदृढ़ हो गई है। मुख्यमंत्री ने जर्मन विद्वान मैक्समूलर का उल्लेख करते हुए बताया कि कैसे उन्होंने भारतीय ग्रंथों और वेदों का अनुवाद कर विश्व को भारतीय ज्ञान से परिचित कराया। वे स्वामी विवेकानंद की नैसर्गिक प्रतिभा के भी बड़े प्रशंसक थे।
तकनीक और नवाचार: मध्य प्रदेश के लिए नई संभावनाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश की प्राकृतिक संपदा और मानव संसाधनों के साथ जर्मनी की विश्वस्तरीय तकनीक का संगम राज्य की प्रगति के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा। इसी दिशा में नवंबर 2024 में म्यूनिख में आयोजित इंटरैक्टिव सेशन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जर्मनी के साथ दोतरफा सहयोग के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। प्रदेश में जर्मन प्रतिष्ठानों द्वारा निवेश को प्रोत्साहित किया जा रहा है और राज्य के उच्च शिक्षा संस्थानों में जर्मन भाषा शिक्षण की व्यवस्था की गई है ताकि युवा वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हो सकें।
शिक्षा और कौशल विकास पर विशेष जोर
बैठक का एक मुख्य आकर्षण ‘जर्मन ड्यूल एजुकेशन मॉडल’ पर चर्चा रही। मुख्यमंत्री ने कहा कि जर्मनी के साथ मिलकर मध्य प्रदेश के युवाओं के कौशल उन्नयन (Skill Development) पर विशेष कार्य किया जाएगा। राज्य के विश्वविद्यालयों और जर्मनी के उच्च शिक्षण संस्थानों के बीच शैक्षणिक एवं शोध सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे विद्यार्थियों और पेशेवरों के लिए नए अवसर पैदा होंगे। इंदौर स्थित इंडो-जर्मन टूल रूम को दोनों देशों के सफल औद्योगिक सहयोग का एक उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए उन्होंने और अधिक निवेश के प्रस्तावों का स्वागत किया।
राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष और भविष्य की राह
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारत और जर्मनी के बीच राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूर्ण होने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि औद्योगिक निवेश, पर्यावरण स्थिरता, जल संरक्षण और ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच साझेदारी का विस्तार किया जाएगा। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि विश्व की प्रमुख भाषाओं का अध्ययन अब किसी भी देश के लिए सहज है और मध्य प्रदेश इसमें अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
जर्मन काउंसलेट जनरल का दृष्टिकोण
श्री क्रिस्टोफ हालियर ने मध्य प्रदेश के आतिथ्य पर खुशी जताई और कहा कि वे राज्य के विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों से मिलकर काफी प्रभावित हुए हैं। उन्होंने जनवरी में प्रधानमंत्री श्री मोदी और जर्मन फेडरल चांसलर श्री फ्रेडरिक मर्ज की मुलाकात का संदर्भ देते हुए कहा कि दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी निरंतर सशक्त हो रही है।
औद्योगिक सुगमता (Ease of Doing Business): बैठक में जर्मन काउंसलेट सेंटर इंडिया के पदाधिकारी श्री अविनाश कश्यप ने बताया कि मध्य प्रदेश का औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग जर्मनी की कंपनियों को पूर्ण सहयोग देने के लिए तत्पर है। नागदा में जर्मन सहयोग से संचालित संस्थान की समस्याओं के त्वरित समाधान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश शासन किसी भी प्रकार की औद्योगिक बाधाओं को दूर करने के लिए पूरी तरह से तैयार है।
इस अवसर पर एमपी औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक श्री चंद्रमौली शुक्ला भी उपस्थित थे। यह भेंट न केवल एक औपचारिक शिष्टाचार थी, बल्कि इसने आने वाले समय में मध्य प्रदेश की औद्योगिक और शैक्षणिक प्रगति की दिशा तय कर दी है।










