मैनपाट बॉक्साइट खदान जनसुनवाई: पर्यावरण स्वीकृति को लेकर चार स्थानों पर कार्यक्रम तय, जिला प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था के लिए नियुक्त किए कार्यपालिक मजिस्ट्रेट
अम्बिकापुर: छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध पर्वतीय एवं पर्यटन क्षेत्र मैनपाट में औद्योगिक और खनिज विकास की दिशा में एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया जा रहा है। सरगुजा जिले के मैनपाट विकासखंड के अंतर्गत प्रस्तावित चार नई बॉक्साइट खदानों की पर्यावरणीय स्वीकृति (Environmental Clearance) के संबंध में स्थानीय प्रभावित ग्रामीणों की राय और सुझाव जानने के लिए जनसुनवाई कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। यह जनसुनवाई क्षेत्र के विभिन्न ग्रामों और प्रमुख परिसरों में आयोजित की जाएगी।
प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध और ‘छत्तीसगढ़ के शिमला’ के नाम से विख्यात मैनपाट क्षेत्र में बॉक्साइट उत्खनन को लेकर यह प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जिला प्रशासन द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस जनसुनवाई कार्यक्रम के सफल, शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित संचालन के साथ-साथ क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से पुख्ता तैयारियां की गई हैं। संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए भारी संख्या में कार्यपालिक दण्डाधिकारियों (Executive Magistrates) की मजिस्ट्रियल ड्यूटी निर्धारित कर दी गई है।
मैनपाट बॉक्साइट खदान जनसुनवाई 2026: देखें पूरा टाइम-टेबल
सरगुजा जिला प्रशासन और पर्यावरण संरक्षण मंडल के सहयोग से आयोजित होने वाली इस जनसुनवाई के लिए अलग-अलग तिथियों में चार विशेष स्थलों का चयन किया गया है, ताकि संबंधित क्षेत्रों के ग्रामीण सुगमता से अपनी बात रख सकें। कार्यक्रम का विवरण इस प्रकार है:
| क्र. | जनसुनवाई की तिथि | निर्धारित समय | तय किया गया स्थान व परिसर |
|---|---|---|---|
| 1 | 23 जून 2026 | प्रातः 11:00 बजे से | तहसील कार्यालय नर्मदापुर के सामने, मैनपाट |
| 2 | 24 जून 2026 | प्रातः 11:00 बजे से | शासकीय प्राथमिक शाला पथरई का प्रांगण, ग्राम पथरई, मैनपाट |
| 3 | 01 जुलाई 2026 | प्रातः 11:00 बजे से | कमलेश्वरपुर हाई स्कूल परिसर (थाना के बगल में), मैनपाट |
| 4 | 02 जुलाई 2026 | प्रातः 11:00 बजे से | माध्यमिक विद्यालय सरभंजा का परिसर, मैनपाट |
कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती
चूंकि मैनपाट एक पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील और जनजातीय बाहुल्य क्षेत्र है, इसलिए बॉक्साइट खदानों की जनसुनवाई के दौरान शांति और सुरक्षा व्यवस्था को अक्षुण्ण रखना जिला प्रशासन के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी के निर्देशानुसार, संपूर्ण कार्यक्रम के सुचारू संचालन की जिम्मेदारी वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपी गई है।
अनुविभागीय दण्डाधिकारी सीतापुर बने संपूर्ण कार्यक्रम प्रभारी
आधिकारिक आदेश के अनुसार, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) एवं अनुविभागीय दण्डाधिकारी सीतापुर फागेश सिन्हा को इस संपूर्ण जनसुनवाई कार्यक्रम का ओवरऑल प्रभारी नियुक्त किया गया है। उनकी देखरेख में ही सभी चारों स्थलों पर सुरक्षा, बैठक व्यवस्था और नियमों के पालन की मॉनिटरिंग की जाएगी।
विभिन्न स्थलों के लिए मजिस्ट्रियल दायित्वों का आवंटन
कार्यक्रम प्रभारी के अतिरिक्त, सरगुजा जिले के विभिन्न तहसीलों और विभागों से कार्यपालिक दण्डाधिकारियों को जनसुनवाई स्थलों पर सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात किया गया है। इन अधिकारियों की सूची और दायित्व निम्नलिखित हैं:
- उमेश्वर सिंह बाज: तहसीलदार एवं कार्यपालिक दण्डाधिकारी, मैनपाट (स्थानीय स्तर पर कानून व्यवस्था का प्रभार)।
- सुश्री चित्रलेखा: तहसीलदार एवं कार्यपालिक दण्डाधिकारी, सरगुजा (आवश्यक प्रशासनिक समन्वय हेतु तैनात)।
- निखिल श्रीवास्तव: नायब तहसीलदार एवं कार्यपालिक दण्डाधिकारी, उप तहसील राजापुर।
- राजेश यादव: नायब तहसीलदार एवं कार्यपालिक दण्डाधिकारी, सीतापुर।
- उमेश तिवारी: नायब तहसीलदार एवं कार्यपालिक दण्डाधिकारी, सीतापुर।
- श्रीमती उषा नेताम: अधीक्षक भू-अभिलेख, जिला सरगुजा (खदानों से संबंधित भू-अभिलेखीय तकनीकी जानकारियों और कानून व्यवस्था हेतु उपस्थित रहेंगी)।
मैनपाट में बॉक्साइट खनन और पर्यावरण का संतुलन: एक बड़ी चुनौती
मैनपाट पठार अपनी प्राकृतिक सुंदरता, ठंडे मौसम, झरनों और तिब्बती शरणार्थियों के अनूठे सांस्कृतिक ताने-बाने के लिए जाना जाता है। इस क्षेत्र में बॉक्साइट खनिज का भारी भंडार मौजूद है, जिसका उपयोग एल्युमिनियम उत्पादन के लिए किया जाता है। पूर्व में भी यहां कई खदानें संचालित रही हैं, जिनसे स्थानीय रोजगार के अवसर तो निर्मित हुए हैं, लेकिन पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी हमेशा सवाल उठते रहे हैं।
प्रस्तावित चार नई बॉक्साइट खदानों को लेकर होने वाली यह जनसुनवाई पर्यावरण प्रभाव आकलन (Environmental Impact Assessment – EIA) प्रक्रिया का एक अनिवार्य हिस्सा है। नियमानुसार, किसी भी खनन परियोजना को अंतिम स्वीकृति मिलने से पहले स्थानीय ग्राम सभाओं और प्रभावित नागरिकों की सहमति व उनके सुझावों को सुनना वैधानिक रूप से आवश्यक है। ग्रामीण इस दौरान जल स्रोतों के संरक्षण, वनों की कटाई, प्रदूषण नियंत्रण और उचित मुआवजे जैसे विषयों पर अपनी बात प्रशासन के समक्ष रख सकते हैं।
जिला प्रशासन ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से जनसुनवाई में भाग लें और अपनी प्रतिक्रियाएं दर्ज कराएं। सभी अधिकारी तय समय से पहले ही अपने-अपने प्रभार वाले क्षेत्रों में मोर्चा संभाल चुके हैं ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके और सुनवाई की पूरी प्रक्रिया को वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ निष्पक्ष ढंग से संपन्न कराया जा सके।














