MP Cabinet Decisions 2026: मुख्यमंत्री मोहन यादव कैबिनेट के बड़े फैसले, विकास योजनाओं के लिए ₹5,960 करोड़ मंजूर






MP Cabinet Decisions: मुख्यमंत्री मोहन यादव कैबिनेट के बड़े फैसले, ₹5,960 करोड़ की योजनाओं को मंजूरी

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MP Cabinet Decisions: मुख्यमंत्री मोहन यादव कैबिनेट के बड़े फैसले, विकास और जन-कल्याण के लिए ₹5,960 करोड़ की योजनाओं को बड़ी मंजूरी

विशेष रिपोर्ट: प्रदेश खबर न्यूज नेटवर्क | लोकेशन: भोपाल/अम्बिकापुर | दिनांक: 24 जून, 2026

भोपाल। मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में आयोजित राज्य मंत्रि-परिषद की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में मध्यप्रदेश के सर्वांगीण विकास, जन-कल्याण और सांस्कृतिक गौरव को नई दिशा देने के लिए कुल 5 हजार 960 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास योजनाओं को हरी झंडी दिखाई गई है। कैबिनेट के इन निर्णयों में महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण शिक्षा के स्तर में सुधार, किसानों को वित्तीय राहत और जनजातीय क्षेत्रों के विकास पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है।

“मंत्रि-परिषद की बैठक में मुख्य रूप से मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना को आगामी 5 वर्षों के लिए निरंतर रखने, 500 से अधिक स्कूलों के उच्च स्तरीय उन्नयन, किसानों के लिए शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर फसल ऋण की नई शर्तों और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के सुचारू संचालन के लिए भारी-भरकम राशि की मंजूरी दी गई है।”

1. मुख्यमंत्री कन्या विवाह और कल्याणी विवाह सहायता योजना: ₹1,740 करोड़ से अधिक की स्वीकृति

महिला सशक्तिकरण और सामाजिक उत्थान की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए कैबिनेट ने मुख्यमंत्री कन्या विवाह सहायता योजना और कल्याणी विवाह सहायता योजना को 1 अप्रैल 2026 से आगामी 5 वर्षों (31 मार्च 2031) तक निरंतर संचालित रखने के लिए 1,740 करोड़ 57 लाख रुपये के वित्तीय बजट को मंजूरी दी है।

योजना के मुख्य बिंदु और प्रभाव:

  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: यह योजना प्रदेश में 1 अप्रैल 2006 से निरंतर प्रभावशील है और समाज के गरीब तबके के लिए वरदान साबित हुई है।
  • आर्थिक सहायता: योजना के तहत गरीब, जरूरतमंद, निराश्रित और निर्धन परिवारों की विवाह योग्य कन्याओं, विधवाओं और परित्यक्ता महिलाओं के सामूहिक विवाह के लिए ₹55,000 प्रति कन्या के मान से आर्थिक सहायता दी जाती है।
  • ट्रैक रिकॉर्ड: वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक इस योजना के माध्यम से 1 लाख 72 हजार 905 हितग्राहियों को 989 करोड़ 80 लाख 62 हजार रुपये से अधिक की सहायता राशि सीधे वितरित की जा चुकी है।
  • सामाजिक लाभ: सामूहिक विवाह आयोजनों से समाज में शादियों के नाम पर होने वाले फिजूलखर्च में कमी आती है और विवाह की वैधानिक आयु सुनिश्चित करने में मदद मिलती है।

2. शिक्षा क्षेत्र में बड़ा सुधार: 525 शासकीय स्कूलों का होगा कायाकल्प

राज्य सरकार ने विद्यार्थियों की शैक्षणिक पहुंच बढ़ाने और स्कूलों में होने वाले ड्रॉप आउट रेट (पढ़ाई बीच में छोड़ने की दर) को कम करने के लिए शासकीय माध्यमिक और हाई स्कूलों के उच्च स्तरीय उन्नयन की योजना को सैद्धांतिक सहमति दे दी है। इसके तहत कुल ₹635 करोड़ 24 लाख के अनुमानित व्यय प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।

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उन्नयन की समयबद्ध रूपरेखा:

  • शैक्षणिक सत्र 2026-27: इस वर्ष 75 माध्यमिक शालाओं को हाई स्कूल में तथा 100 हाई स्कूल को हायर सेकेंडरी स्कूल में बदला जाएगा।
  • आगामी वर्ष (2027-28 एवं 2028-29): अगले दो सालों में भी इसी गति से प्रतिवर्ष 75 माध्यमिक और 100 हाई स्कूलों का उन्नयन किया जाएगा। इस तरह कुल 225 माध्यमिक और 300 हाई स्कूल उन्नत होंगे।
  • विकसित मध्यप्रदेश@2047 का लक्ष्य: राज्य सरकार का लक्ष्य वर्ष 2029 तक 100 प्रतिशत सकल नामांकन दर (GER) हासिल करना है। जिला स्तरीय मैपिंग के आधार पर राज्य में 315 नए हाई स्कूल और 214 हायर सेकेंडरी स्कूल खोले जाने की आवश्यकता रेखांकित की गई है।

भौगोलिक और तकनीकी विश्लेषण:

वर्तमान में मध्यप्रदेश में हाई स्कूल स्तर पर सकल नामांकन दर 75 प्रतिशत और हायर सेकेंडरी स्तर पर केवल 55 प्रतिशत है। वहीं, कक्षा 8 से 9 में जाने वाले बच्चों की दर 77 प्रतिशत और कक्षा 10 से 11 में कक्षांतरण दर 68 प्रतिशत है। दूरी अधिक होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र, विशेषकर छात्राएं, नियमित स्कूल नहीं जा पातीं। अब गति शक्ति पोर्टल, जनसंख्या और यू-डाइस (U-DISE) के आंकड़ों के आधार पर जरूरत वाले क्षेत्रों में स्कूल उपलब्ध कराए जाएंगे। सांदीपनि विद्यालयों के कैचमेंट एरिया के स्कूलों का युक्तियुक्तकरण किया जाएगा ताकि संसाधनों का सही उपयोग हो सके।

3. किसानों के लिए बड़ी राहत: शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर फसल ऋण की नई शर्तें

किसानों को आर्थिक संबल प्रदान करने के लिए वर्ष 2026-27 में भी शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर अल्पावधि फसल ऋण देने की योजना जारी रहेगी, लेकिन अब इसे अधिक व्यावहारिक और किसान-हितैषी बनाया गया है।

ऋण प्रक्रिया में हुए बदलाव:

  • वार्षिक एकल ऋण सीमा: अब खरीफ और रबी सीजन के लिए अलग-अलग देय तिथि (Due Date) नहीं होगी। इसके स्थान पर एक वार्षिक एकल ऋण सीमा (Single Annual Credit Limit) निर्धारित की जाएगी, जिसमें नगद और वस्तु ऋण की उप-सीमाएं तय होंगी।
  • 12 महीने की अवधि: ऋण की देय तिथि अब किसान द्वारा स्वीकृत वार्षिक लिमिट से पहले ऋण आहरण (पैसा निकालने) की तारीख से 12 महीने के लिए मान्य होगी।
  • ब्याज अनुदान और प्रोत्साहन: अल्पावधि फसल ऋण लेने वाले किसानों को 1.25 प्रतिशत सामान्य ब्याज अनुदान मिलेगा। इसके अलावा, तय समय सीमा के भीतर ऋण चुकाने वाले किसानों को सरकार की ओर से 4 प्रतिशत अतिरिक्त ब्याज अनुदान (प्रोत्साहन स्वरूप) दिया जाएगा।
  • यह योजना राज्य में वर्ष 2012-13 से प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (PACS) के माध्यम से सफलतापूर्वक संचालित है, जिसके तहत ₹3 लाख तक के अल्पावधि ऋण पर कोई ब्याज नहीं लिया जाता।

4. शुजालपुर (शाजापुर) में खुलेगा नवीन शासकीय विधि महाविद्यालय

मुख्यमंत्री की पूर्व घोषणा के अनुपालन में कैबिनेट ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से शाजापुर जिले के शुजालपुर में एक नवीन शासकीय विधि (Law) महाविद्यालय स्थापित करने की स्वीकृति दे दी है।

वर्तमान में वहां के जवाहरलाल नेहरू स्मृति शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में एलएलबी तीन वर्षीय पाठ्यक्रम केवल एक संकाय के रूप में चल रहा था। बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के ‘लीगल एजुकेशन रूल्स 2008’ के नियमों के तहत कानून की पढ़ाई के लिए एक स्वतंत्र कॉलेज होना अनिवार्य है। इस नए कॉलेज के संचालन के लिए कुल 17 पदों (9 शैक्षणिक और 8 अशैक्षणिक) के सृजन और ₹2 करोड़ 39 लाख 92 हजार के बजट को मंजूरी दी गई है।

5. लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के लिए ₹3,580 करोड़ मंजूर

गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों तक राशन की सुचारू आपूर्ति बनाए रखने के लिए खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के तहत लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली को मजबूती दी गई है। इसके अंतर्गत परिवहन और कमीशन व्यय की प्रतिपूर्ति के लिए 16वें केंद्रीय वित्त आयोग की अवधि (1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक) के लिए 3 हजार 580 करोड़ 7 लाख रुपये की निरंतरता को प्रशासनिक मंजूरी दी गई है।

6. जनजातीय क्षेत्रों के लिए अन्य महत्वपूर्ण निर्णय

कैबिनेट बैठक में ‘प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान’ (PM JANMAN) और ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ के तहत बिजली से वंचित जनजातीय बस्तियों और गांवों के विद्युतीकरण कार्य में तेजी लाने का निर्णय लिया गया। इसके तहत भारत सरकार द्वारा दिए जाने वाले केंद्रांश पर जो एसजीएसटी (SGST) की राशि देय होगी, उसे राज्य सरकार अपनी ओर से बिजली वितरण कंपनियों (Discoms) को अंश पूंजी के रूप में उपलब्ध कराएगी, जिससे विकास कार्यों में वित्तीय बाधा न आए।